Ujjain ki Nagari Me Lyrics : उज्जैन के राजा महाकालेश्वर को समर्पित प्रसिद्ध शिव भजन “उज्जैनी की नगरी में बाबा महाँकाल है” का भावार्थ, महत्व और गाने की विधि जानें। क्षिप्रा नदी के पावन तट, बाबा के अद्भुत शृंगार और महाकाल की शाही सवारी (पालकी) का सुंदर वर्णन यहाँ पढ़ें।
Ujjain ki Nagari Me Lyrics
| उज्जैनी की नगरी में, बाबा महाँकाल है, क्या गजब है इनका दरबार, रोज शुबह शाम होता, रूप शंगार है, भगत है आते दरबार।। देखो क्या अजब से, है गजब से यहाँ के नजारे है, चल के पालकी में, हाल सुनने भगतो के आते है, चन्द्रमौलि रूप में भगतो से मिलने, आते है बाबा महाँकाल, रोज शुबह शाम होता, रूप शंगार है, भगत है आते दरबार।। नैया बिन महाँकाल, के पार कैसे लग सकती है, छिप्रा नदी भी यंहा, कल कल बहती ही रहती है, सच्चा ये दरबार है, लगती जय जयकार है, बनती है बिगड़ी सभी की, रोज शुबह शाम होता, रूप शंगार है, भगत है आते दरबार।। बाबा महाँकाल के, दर पे ही अब तो रहना है, इस दर के सिवा अब, नही दूजा कोई सहारा है, तुम भी चल के देख लो, इस दरबार को, ओर लगाओ जयकारे, रोज शुबह शाम होता, रूप शंगार है, भगत है आते दरबार।। उज्जैनी की नगरी में, बाबा महाँकाल है, क्या गजब है इनका दरबार, रोज शुबह शाम होता, रूप शंगार है, भगत है आते दरबार।। |
Explanation and Proper Reference (व्याख्या और संदर्भ)
यह एक अत्यंत ही मधुर और भावपूर्ण शिव भजन है, जो मध्य प्रदेश के उज्जैन (Ujjain) में स्थित श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (Mahakaleshwar Jyotirlinga) की महिमा का बखान करता है।
- The Context (प्रसंग): इस भजन में बाबा महाकाल के दरबार की दिव्यता का वर्णन किया गया है। उज्जैन को शिव की नगरी माना जाता है, जहाँ महाकाल राजा के रूप में विराजमान हैं।
- The Central Theme (मूल भाव): भजन में तीन मुख्य बातों का बहुत ही सुंदर चित्रण है:
- रूप शृंगार: बाबा महाकाल की विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती और सुबह-शाम होने वाले उनके अलौकिक शृंगार का वर्णन।
- शाही सवारी (पालकी): जब बाबा महाकाल ‘चन्द्रमौलि’ रूप धारण करके पालकी में सवार होकर अपनी प्रजा (भक्तों) का हाल जानने उज्जैन की सड़कों पर निकलते हैं।
- क्षिप्रा नदी की पवित्रता: मोक्षदायिनी क्षिप्रा नदी का कल-कल बहना और उस सच्चे दरबार में सभी बिगड़े कामों का बनना।
How and When to Sing (सही समय और गाने की विधि)
यह भजन बाबा महाकाल के प्रति पूर्ण समर्पण और भक्ति का प्रतीक है। इसे गाते समय ऐसा प्रतीत होता है जैसे भक्त सीधे महाकाल के दरबार में खड़ा हो।
Proper Time (सही समय):
Best Occasions: सावन (Sawan) के पवित्र महीने में, महाशिवरात्रि पर, या सावन-भादौ के सोमवार को जब बाबा महाकाल की सवारी निकलती है, तब इसे विशेष रूप से गाया जाता है।
Best Time: सुबह पूजा के समय या संध्याकाल में शिव आरती से पूर्व इसे गाना मन को अत्यंत शांति देता है।
Proper Method (सही विधि):
Musical Instruments (वाद्ययंत्र): इसे ढोलक (Dholak), हारमोनियम और मंजीरे के साथ एक मध्यम और आनंदमयी लय (Rhythm) में गाया जाना चाहिए।
Mindset (भाव): गाते समय हृदय में उज्जैन महाकाल के दर्शनों की लालसा और उनके शृंगारित रूप का ध्यान (Visualization) होना चाहिए।
Offerings: शिव जी की पूजा में बेलपत्र, भस्म, और जल अर्पित करते हुए इस भजन का गुणगान करें।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: भजन में वर्णित ‘पालकी’ और ‘चन्द्रमौलि रूप’ का क्या महत्व है?
A: उज्जैन में सावन और भादौ मास के प्रत्येक सोमवार को बाबा महाकाल की शाही सवारी निकलती है। मान्यता है कि महाकाल उज्जैन के राजा हैं और वे पालकी (Palki) में बैठकर अपनी प्रजा का हाल-चाल जानने नगर भ्रमण पर निकलते हैं। इस दौरान पालकी में भगवान शिव के ‘चन्द्रमौलि’ (जिनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है) स्वरूप के मुखारविंद को विराजित किया जाता है।
Q2: ‘छिप्रा नदी’ (Kshipra River) का उज्जैन से क्या संबंध है?
A: क्षिप्रा (या छिप्रा) भारत की पवित्र नदियों में से एक है, जिसके तट पर उज्जैन नगरी बसी है। महाकाल के दरबार में जाने से पहले भक्त अक्सर क्षिप्रा नदी में स्नान करते हैं। इसी नदी के तट पर विश्व प्रसिद्ध ‘सिंहस्थ कुंभ मेला’ भी लगता है।
Q3: ‘रोज शुबह शाम होता, रूप शंगार है’ का क्या तात्पर्य है?
A: महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग दुनिया का एकमात्र ऐसा शिवलिंग है जहाँ भगवान शिव की ‘भस्म आरती’ (Bhasma Aarti) होती है। प्रतिदिन सुबह और शाम भगवान का भव्य और मनमोहक शृंगार किया जाता है, जिसे देखने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं।
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