Jhumo Nacho Khushiyan Manao Janam Bhayo Re Kanha Ka भजन का संपूर्ण भावार्थ और महिमा। कृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर गाए जाने वाले इस आनंदमयी और झूमने वाले भजन की पूरी कथा और अर्थ यहाँ विस्तार से पढ़ें।
झूमो नाचो खुशियां मनाओ जन्म भयो रे कान्हा का
Jhumo Nacho Khushiyan Manao
| जय कन्हैया लाल की जय हो नंद लाल की हां झूमो नाचो खुशियां मनाओ जन्म भयो रे कान्हा का रंग उड़ाओ मौज मनाओ जन्म भयो रे कान्हा का झूमो ना खुशियां मनाओ जन्म भयो रे कान्हा का रंग उड़ा मौज मनाओ जन्म भयो रे कान्हा का जय कन्हैया लाल की जय हो नंदलाल की जय कन्हैया लाल की जय हो नंद लाल की हो वृंदावन में धूम मची है सज गया सारा धाम रे सज गया सारा धाम रे मां यशोदा लेती बलैया मैया तोड़ के सारा काम रे तोड़ के सारा काम रे हो नंद बाबा जी जान लुटाते कान्हा जी के नाम का रंग उड़ाओ मौज मनाओ जनम भयो रे कान्हा का झूमो ना खुशियां मनाओ जनम भयो रे कान्हा का रंग उड़ा मौज मना भयो रे कान्हा का जय कन्हैया लाल की जय हो नंदलाल की जय कन्हैया लाल की जय हो नंदलाल की हां रंग बिरंगी सारी नगरी खुशियों का दिन आया रे खुशियों का दिन आया रे हां ढोल नगाड़े बजते तासे घर घर हर्ष समाया रे घर घर हर्ष समाया रे देने बधाई नंद बाबा को सब पहुंचे गोकुल धाम रे रंग उड़ाओ मौज मनाओ जन्म भयो रे कान्हा का घूमो ना खुशियां मना जन्म भयो रे कान्हा का रंग उड़ा मौज मना जन्म भयो रे कान्हा का जय कन्हैया लाल की जय हो नंदलाल की जय कन्हैया लाल की जय हो नंदलाल की हां चारों दिशाओं में हलचल है। देव सभी हर्षाते हैं। देव सभी हर्षाते हैं। योगी भेंट चढ़ाते सुमन की मन ही मन मुस्काते हैं। मन ही मन मुस्काते हैं। हो सारे ग्वाले हो मतवाले रूप निहारे श्याम का रंग उड़ाओ मौज मनाओ जन्म भयो रे कान्हा का झूमो ना खुशियां मनाओ जन्म भयो रे कान्हा का रंग उड़ा मौज मना भयो रे कान्हा का |
Jhumo Nacho Khushiyan Manao – भजन भावार्थ और महिमा
झूमो नाचो खुशियां मनाओ जन्म भयो रे कान्हा का
संक्षिप्त सार (In Short): यह एक अत्यंत ही उल्लासपूर्ण और ऊर्जा से भरा हुआ जन्माष्टमी भजन है। इसमें भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय गोकुल और वृंदावन में मची धूम, नंद बाबा की खुशी और देवताओं के उल्लास का बहुत ही सजीव चित्रण किया गया है। यह गीत भक्तों को कान्हा के जन्म की खुशी में रंग उड़ाने और नाचने-गाने के लिए प्रेरित करता है।
संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth)
भक्तों द्वारा गाए जाने वाले इस भजन में कृष्ण जन्म के विभिन्न दृश्यों का बहुत ही सुंदर वर्णन किया गया है। आइए इसके मुख्य भावों को समझें:
- नंद भवन और वृंदावन में उल्लास: कान्हा के जन्म से वृंदावन में धूम मच गई है और सारा धाम सज गया है। माता यशोदा इतनी आनंदित हैं कि वे घर के सारे कामकाज छोड़कर केवल अपने लाडले की बलैयाँ (नज़र उतारना) ले रही हैं। वहीं, नंद बाबा अपने पुत्र के नाम पर जी-जान से खुशी और धन लुटा रहे हैं।
- गोकुल में उत्सव और बधाइयां: कृष्ण जन्म के दिन पूरी नगरी रंग-बिरंगी और आनंदित हो गई है। चारों ओर ढोल-नगाड़े और ताशे बज रहे हैं। हर घर में हर्ष और उल्लास समाया हुआ है। सभी गोकुलवासी नंद बाबा को बधाई देने के लिए गोकुल धाम की ओर भागे चले आ रहे हैं।
- देवताओं और ग्वालों का आनंद: कान्हा का जन्म केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं है, बल्कि चारों दिशाओं में हलचल है। स्वर्ग से सभी देवता भी हर्षित हो रहे हैं। बड़े-बड़े योगी मन ही मन मुस्कुराते हुए बाल कृष्ण को पुष्प (सुमन) की भेंट चढ़ा रहे हैं। सारे ग्वाले (गोप-बालक) श्याम के इस अलौकिक रूप को निहार कर प्रेम में मतवाले हो गए हैं।
गायन का सही समय (Practices Time)
इस आनंदमयी और झूमने वाले भजन को गाने के सबसे उपयुक्त अवसर हैं:
- कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami): मध्यरात्रि में भगवान के जन्म के तुरंत बाद जश्न मनाने और भक्तों को नचाने के लिए यह भजन सबसे उत्तम है।
- नंदोत्सव (Nandotsav): जन्माष्टमी के अगले दिन जब दही-हांडी फोड़ी जाती है और रंग उड़ाया जाता है, तब इस भजन की ताल पर भक्त जमकर झूमते हैं।
- बाल रूप की झांकी: मंदिरों में जब भी बाल कृष्ण की झांकी सजाई जाती है, तब यह मंगल-गीत उत्सव के माहौल को दोगुना कर देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- प्रश्न 1: इस भजन में मुख्य रूप से किस बात का आह्वान किया गया है? उत्तर: इस भजन में भक्तों से आह्वान किया गया है कि वे अपने सारे दुख भूलकर कान्हा के जन्म की खुशी में झूमें, नाचें और रंग उड़ाकर मौज मनाएं।
- प्रश्न 2: भजन के अनुसार माता यशोदा और नंद बाबा क्या कर रहे हैं? उत्तर: माता यशोदा घर के सारे काम छोड़कर बाल कृष्ण को लाड लड़ा रही हैं और नंद बाबा खुशी में भरकर अपना सब कुछ लुटाने को तैयार हैं।
- प्रश्न 3: कान्हा के जन्म पर स्वर्ग से कौन हर्षित हो रहा है? उत्तर: भजन के अनुसार, कान्हा के जन्म पर स्वर्ग से सभी देवता प्रसन्न (हर्षित) हो रहे हैं और योगी उन्हें फूलों की भेंट चढ़ा रहे हैं।