आरती की बिरिया होने लगी माँ Aarti ki Biriya Hone Lagi Maa

आरती की बिरिया होने लगी माँ
(Aarti ki Biriya Hone Lagi Maa

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं में गाई जाने वाली पारंपरिक ‘जस आरती’—”आरती की बिरिया होने लगी माँ” का भावार्थ, महत्व और गाने की सही विधि जानें। यह आरती माता के विभिन्न स्वरूपों, ज्ञान और जीवन देने वाली शक्तियों की सुंदर लोक-वंदना है।

आरती की बिरिया होने लगी माँ

आरती की बिरिया होने लगी माँ

सुंदर मालन मेरी माँ, आरती की बिरिया होने लगी माँ ॥
सुंदर मालन मेरी माँ, आरती की बिरिया होने लगी माँ ॥

पहली आरति ये हो माँ कमलापति की माँ ,
जो जनम ड़ाए रे हमार ॥ आरती ॥

दूसरी आरती ये हो माँ सरस्वती की ओ माँ ,
जो ड़ाए है रे ज्ञान ॥ आरती ॥

तीसरी आरती रे ये वो शीतला माता की माँ,
जो मन बसी रे हमार ॥ आरती ॥

चौथी आरती रे ये वो माँ, चौसठ जोगिनी की रे,
खप्पर पर लाई हाथ ॥ आरती ॥

रही आरती रे ये वो माँ, सबरी मटा की ,
सब मिल घर रही ध्यान ॥ आरती ॥

सुमर सुमर माई तेरो रे आरती ,
रखियों चरण चितलाए ॥ आरती ॥

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Aarti Ki Biriya Hone Lagi Maa

Sundar malan meri Maa, aarti ki biriya hone lagi Maa ||
Sundar malan meri Maa, aarti ki biriya hone lagi Maa ||

Pehli aarti ye ho Maa Kamlapati ki Maa,
Jo janam daye re hamaar || Aarti ||

Doosri aarti ye ho Maa Saraswati ki O Maa,
Jo daye hai re gyaan || Aarti ||

Teesri aarti re ye wo Sheetla Mata ki Maa,
Jo man basi re hamaar || Aarti ||

Chauthi aarti re ye wo Maa, Chausath Jogini ki re,
Khappar par layi haath || Aarti ||

Rahi aarti re ye wo Maa, sabri mata ki,
Sab mil ghar rahi dhyaan || Aarti ||

Sumar sumar Maayi tero re aarti,
Rakhiyo charan chitlaaye || Aarti ||

Explanation and Proper Reference (व्याख्या और संदर्भ)

यह एक अत्यंत ही सुंदर और पारंपरिक देवी जस आरती है। मध्य प्रदेश (विशेषकर महाकौशल और बुंदेलखंड) और छत्तीसगढ़ में जब देवी ‘जस गीत’ (Devi Jas Geet) का गायन और जगराता समापन की ओर होता है, तब पूर्ण श्रद्धा के साथ यह आरती गाई जाती है।

  • The Context (प्रसंग): स्थानीय लोक भाषा में ‘बिरिया’ (Biriya) का अर्थ ‘वेला’, ‘बेला’ या ‘समय’ (Time) होता है। भक्त कह रहे हैं कि “हे माँ! अब आपकी आरती की पावन वेला (समय) हो गई है।”
  • The Central Theme (मूल भाव): इस आरती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल एक देवी की नहीं, बल्कि संपूर्ण देव-शक्तियों की आरती उतारी गई है। इसमें जीवन देने वाले कमलापति (भगवान विष्णु/ईश्वर), ज्ञान देने वाली माता सरस्वती, हृदय में बसने वाली शीतला माता, और दुष्टों का नाश करने के लिए हाथ में खप्पर (Skull bowl) धारण करने वाली चौसठ योगिनियों (64 Yoginis) की महिमा का बहुत ही सुंदर क्रमबद्ध वर्णन है।

आरती के मुख्य अंश (Short Quote)

आरती की बिरिया होने लगी माँ सुंदर मालन मेरी माँ, आरती की बिरिया होने लगी माँ ॥ पहली आरति ये हो माँ कमलापति की माँ , जो जनम ड़ाए रे हमार ॥ आरती ॥

How and When to Sing (सही समय और गाने की विधि)

जस शैली की आरती में शास्त्रीय आरतियों की तुलना में एक अलग ही लोक-उत्साह (folk enthusiasm) और भक्ति का प्रवाह होता है।

Proper Time (सही समय):

  • Best Occasions: नवरात्रि (Navratri) के नौ दिनों में, जवारा विसर्जन के समय, देवी जगराते (Jagran) के समापन पर, या गाँव के देवी मंदिरों में संध्याकाल (Evening) के समय इस आरती को गाया जाता है।

Proper Method (सही विधि):

  1. Preparation (तैयारी): आरती शुरू करने से पहले पीतल या तांबे की थाली में शुद्ध घी या कपूर का दीपक प्रज्वलित करें। थाली में फूल, कुमकुम और अक्षत रखें।
  2. Musical Instruments (वाद्ययंत्र): चूँकि यह जस शैली की आरती है, इसलिए इसे केवल घंटी बजाकर नहीं, बल्कि ढोलक (Dholak), झांझ, टिमकी और मंजीरे की तेज़ और लयबद्ध थाप के साथ गाया जाता है।
  3. Singing Style (गायन शैली): इसे सामूहिक रूप (Group chorus) में गाया जाता है। मुख्य गायक जब एक देवी/देवता की आरती की पंक्ति गाता है, तो बाकी सभी भक्त तालियों और वाद्ययंत्रों की थाप पर उसे दोहराते हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: आरती में ‘बिरिया’ (Biriya) शब्द का क्या अर्थ है?
A: क्षेत्रीय लोक भाषा में ‘बिरिया’ का अर्थ ‘वेला’, ‘समय’ या ‘पहरे’ (Time or moment) से होता है। “आरती की बिरिया” का अर्थ है कि माता की आरती का शुभ समय हो गया है।

Q2: इस आरती में ‘चौसठ जोगिनी’ (Chausath Jogini) का उल्लेख क्यों है?
A: चौसठ योगिनियाँ (64 Yoginis) आदिशक्ति माता काली और दुर्गा की अत्यंत उग्र और शक्तिशाली सहायिकाएं मानी जाती हैं। मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र (जैसे जबलपुर का भेड़ाघाट) में चौसठ योगिनी का बहुत ही प्राचीन और सिद्ध मंदिर है, इसलिए इस क्षेत्र के लोकगीतों में उनका विशेष आह्वान किया जाता है।

Q3: आरती में माता सरस्वती और शीतला माता को किस रूप में पूजा गया है?
A: आरती के बोलों के अनुसार, माता सरस्वती की आरती इसलिए की जा रही है क्योंकि वे हमें ‘ज्ञान’ (Wisdom) प्रदान करती हैं। वहीं, शीतला माता की आरती इसलिए की जा रही है क्योंकि वे अपने भक्तों के मन/हृदय में हमेशा निवास करती हैं और शीतलता (शांति) प्रदान करती हैं।

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