Aao Aao Veer Hanuman : प्रसिद्ध और भावुक भजन “आओ आओ वीर हनुमान, राम तुम्हे याद करे” के गहरे अर्थ, रामायण के संदर्भ और गाने की सही विधि के बारे में जानें। यह भजन भगवान राम के उस विलाप को दर्शाता है जब लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे और प्राण बचाने के लिए केवल हनुमान जी का ही सहारा था।
| आओ आओ वीर हनुमान, राम तुम्हे याद करे हो याद करे रे तुम्हे याद करे।। आओ आओ वीर हनुमान, राम तुम्हे याद करे हो याद करे रे तुम्हे याद करे। लक्ष्मण प्यारा पड़ा धरा में, मुख से बोल्या कोन्या रोये रोये मैं इसे पुकारूं, आंख्या खोले कोन्या करो जल्दी उड़ीको ध्यान, राम तुम्हे याद करे आओ आओ वीर हनुमान, राम तुम्हे याद करे हो याद करे रे तुम्हे याद करे।। चौदह साल साथ में सोया, इसा कदे ना सोया इसके प्राण मेरे में अटके, मैं इसके अंदर खोया मचा दिल में बड़ा घमासान, राम तुम्हे याद करे आओ आओ वीर हनुमान, राम तुम्हे याद करे।। एक सहारा तुही है, अब आके प्राण बचाले जै सूरज उग गया धरती पे, प्राण इसने खाले दिखे चारो और श्मशान, राम तुम्हे याद करे आओ आओ वीर हनुमान, राम तुम्हे याद करे।। बूटी लेके चले हनुमंत, हाथ में पहाड़ ने उठाया वैद्य सुषेन ले, लक्ष्मण का प्राण बचाया थारे मुख से निकला राम, राम तुम्हे याद करे आओ आओ वीर हनुमान, राम तुम्हे याद करे।। हिंदू धर्मलोकेश शेखावत दीन, इसकी करदे आज सहाई प्यारे लाल गुरु ने, मुझे हरि की राह दिखाई वीरेंद्र सपला करे बखान, राम तुम्हे याद करे आओ आओ वीर हनुमान, राम तुम्हे याद करे।। |
How and When to Sing (सही समय और गाने की विधि)
चूँकि यह स्तोत्र या मंत्र नहीं, बल्कि एक भजन है, इसलिए इसके नियम मंत्रों जितने strict नहीं होते, लेकिन फिर भी इसे सही भाव के साथ गाना महत्वपूर्ण है।
Proper Time (सही समय):
- Best Occasions: इसे सुंदरकांड के पाठ के बाद, रामायण कथा के दौरान, हनुमान जयंती, या मंगलवार/शनिवार के सत्संग (Satsang) में गाना सबसे उपयुक्त होता है।
- Best Time: शाम के समय या कीर्तन (Kirtan) के दौरान इसका गायन माहौल को बहुत ही भक्तिमय बना देता है।
Proper Method (सही विधि):
- Musical Instruments: इसे ढोलक (Dholak), हारमोनियम (Harmonium), और मंजीरे के साथ सामूहिक रूप से (in a group) गाना चाहिए।
- The Emotion (भाव): इस भजन की शुरुआत ‘करुण रस’ (sorrow/grief) से होती है। जब राम जी विलाप कर रहे होते हैं, तब आवाज़ में ठहराव और दर्द होना चाहिए। लेकिन जब हनुमान जी संजीवनी लेकर आते हैं (“बूटी लेके चले हनुमंत, हाथ में पहाड़ ने उठाया”), तब इसे ‘वीर रस’ (energy and enthusiasm) के साथ तेज़ स्वर में गाना चाहिए।
- Mindset: गाते समय उस दृश्य (scene) को visualize करें जहाँ भगवान राम अपने भाई के लिए तड़प रहे हैं और हनुमान जी हवा को चीरते हुए संजीवनी ला रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: यह भजन रामायण की किस घटना पर आधारित है? A: यह भजन लंका कांड (Lanka Kand) के उस हिस्से पर आधारित है जहाँ मेघनाद द्वारा चलाई गई शक्ति से लक्ष्मण जी मूर्छित हो जाते हैं (Lakshman Murccha) और उनके प्राण संकट में पड़ जाते हैं।
Q2: राम जी यह क्यों कहते हैं कि “जै सूरज उग गया धरती पे…”? A: वैद्य सुषेण (Vaidya Sushena) ने चेतावनी दी थी कि लक्ष्मण जी के प्राण बचाने वाली संजीवनी बूटी का प्रभाव तभी होगा जब उसे सुबह सूर्य उगने (sunrise) से पहले लाया जाए। अगर सूरज निकल गया, तो लक्ष्मण जी को बचाया नहीं जा सकेगा।
Q3: इस भजन का मुख्य संदेश (Message) क्या है? A: यह भजन दो चीज़ें सिखाता है—पहला, भगवान राम का अपने भाई लक्ष्मण के प्रति असीम प्रेम, और दूसरा, जब भगवान स्वयं संकट में होते हैं, तब भी वे अपने सच्चे भक्त (हनुमान जी) को ही याद करते हैं। हनुमान जी संकटमोचन हैं।
Q4: इस भजन के रचयिता कौन हैं? A: भजन की आखिरी पंक्तियों के अनुसार, यह भजन वीरेंद्र सपला (Virendra Sapla) और लोकेश शेखावत (Lokesh Shekhawat) जैसे लोक गायकों/रचयिताओं द्वारा तैयार और गाया गया है, जिन्हें उनके गुरु प्यारे लाल जी से प्रेरणा मिली।
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