मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो Mere Baba Bholenath Sab Dukh Door Karo

संपूर्ण Mere Baba Bholenath Sab Dukh Door Karo भजन का गहरा आध्यात्मिक भावार्थ जानें। सावन मास और शिव जागरण में गाए जाने वाले इस प्रसिद्ध लोक-भजन की महिमा, उत्पत्ति और मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो

Mere Baba Bholenath Sab Dukh Door Karo

मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो

अलख निरंजन सब दुख भंजन,
शंकर भोलेनाथ सब दुख दूर करो
मेरे बाबा भोलेनाथ,
सब दुख दूर करो मेरे बाबा भोलेनाथ। [1]

माथे पे चंदा, जटाओं में गंगा,
गले सर्पों का हार सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ,
सब दुख दूर करो मेरे बाबा भोलेनाथ। [1]

कानों में कुंडल, हाथ कमंडल,
पहनें बागमंबर छाल सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ,
सब दुख दूर करो मेरे बाबा भोलेनाथ। [1]

हाथों में डमरू, पैरों में घुंघरू,
चले मस्तानी चाल सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ,
सब दुख दूर करो मेरे बाबा भोलेनाथ। [1]

नंदी सवारी, संग गौरा प्यारी,
गोदी में गणपति लाल सब दुख दूर करो,
मेरे बाबा भोलेनाथ,
सब दुख दूर करो मेरे बाबा भोलेनाथ। [1]

अलख निरंजन सब दुख भंजन,
शंकर भोलेनाथ सब दुख दूर करो
मेरे बाबा भोलेनाथ,
सब दुख दूर करो मेरे बाबा भोलेनाथ। [1]

मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो | Mere Baba Bholenath Sab Dukh Door Karo

संक्षिप्त सार (In Short): “Mere baba bholenath sab dukh door karo” भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत ही भावपूर्ण और प्रार्थना-स्वरूप भजन है। इस भजन में भक्त पूरी श्रद्धा के साथ महादेव (भोलेनाथ) से अपने सभी कष्टों और दुखों को हरने (दूर करने) की विनती करता है। यह शिव जी के ‘दुख भंजन’ स्वरूप की स्तुति करता है और उनके संपूर्ण आलौकिक श्रृंगार तथा शिव-परिवार का बहुत ही सजीव वर्णन करता है।

संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth of Mere Baba Bholenath Sab Dukh Door Karo)

इस भजन में भगवान शिव के दिव्य स्वरूप का बहुत ही सुंदर चित्रण किया गया है। आइए इसका विस्तृत अर्थ समझें:

1. कष्ट हरने की पुकार (Alakh Niranjan Sab Dukh Bhanjan): भक्त महादेव को पुकारते हुए कहता है कि हे ‘अलख निरंजन’ (अदृश्य और पवित्र स्वरूप वाले) और ‘सब दुख भंजन’ (सभी कष्टों का नाश करने वाले) शिव शंकर! मेरे सभी सांसारिक और मानसिक दुखों को दूर कर दीजिए (मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो)।

2. शिव जी का दिव्य श्रृंगार: भजन में भोलेनाथ के अलौकिक रूप का वर्णन है। उनके मस्तक पर चंद्रमा (चंदा) सुशोभित है, उनकी जटाओं से परम पावन गंगा बह रही है और उनके गले में विषैले सर्पों का हार है। भक्त ऐसे कल्याणकारी रूप से प्रार्थना करता है कि mere baba bholenath sab dukh door karo

3. वैरागी स्वरूप और मस्तानी चाल: भोलेनाथ के कानों में कुंडल और हाथों में कमंडल है। वे बाघंबर (शेर की खाल) पहने हुए हैं। जब वे अपने हाथों में डमरू और पैरों में घुंघरू बांधकर अपनी अलमस्त और मस्तानी चाल चलते हैं, तो पूरा ब्रह्मांड आनंदित हो उठता है।

4. संपूर्ण शिव परिवार: भक्त महादेव के गृहस्थ रूप का स्मरण करते हुए कहता है कि शिव जी अपने प्रिय वाहन नंदी पर सवार हैं। उनके साथ उनकी प्राणप्रिय अर्धांगिनी माता गौरा (पार्वती) हैं और उनकी गोद में उनके प्यारे लाल, भगवान गणपति (गणेश) विराजमान हैं। ऐसे पूर्ण और मंगलकारी परिवार से भक्त अपने उद्धार की विनती करता है।

उत्पत्ति और महत्व (Origin and Importance)

  • उत्पत्ति: यह भजन उत्तर भारत की लोक-परंपराओं, सत्संग और जागरण मंडलियों के बीच अत्यंत प्रसिद्ध है। इसे ढोलक और मंजीरे की ताल पर बड़े ही भाव-विभोर होकर गाया जाता है।
  • महत्व: यह भजन सिखाता है कि भगवान शिव केवल संहारकर्ता नहीं हैं, बल्कि वे परम दयालु हैं जो अपने भक्तों की एक सच्ची पुकार (मेरे बाबा भोलेनाथ सब दुख दूर करो) सुनकर उनके सारे कष्ट हर लेते हैं।

गायन का सही समय (Practices Time)

इस शांतिदायक और प्रार्थनापूर्ण भजन को गाने के सबसे उत्तम अवसर इस प्रकार हैं:

  • दैनिक शिव पूजा: प्रतिदिन सुबह या प्रदोष काल में शिव जी की आरती और पूजा के बाद इसे गाना मानसिक शांति देता है।
  • सावन और शिवरात्रि: श्रावण (Sawan) मास के सोमवार या महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर शिवभक्त सामूहिक रूप से इस भजन का गान करते हैं।
  • संकट के समय: जब भी जीवन में कोई परेशानी या दुख हो, तब शांत मन से Mere baba bholenath sab dukh door karo का स्मरण करने से असीम शक्ति मिलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: शिव जी को “अलख निरंजन” क्यों कहा जाता है?
उत्तर: ‘अलख’ का अर्थ है जिसे साधारण आँखों से देखा न जा सके (निराकार) और ‘निरंजन’ का अर्थ है जो बिना किसी अंजन या दोष (Flawless/Pure) के हो। शिव जी परमेश्वर के निर्गुण और शुद्ध स्वरूप हैं, इसलिए उन्हें अलख निरंजन कहा जाता है।

प्रश्न 2: “सब दुख भंजन” का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: भंजन का अर्थ होता है नाश करने वाला या तोड़ने वाला। भगवान शिव को सब दुख भंजन कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों के सभी दुखों, रोगों और कष्टों को पूरी तरह से नष्ट कर देते हैं।

प्रश्न 3: इस भजन का मुख्य संदेश क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य संदेश ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण (Surrender) है। भक्त यह मानकर चलता है कि केवल भोलेनाथ के पास ही वह शक्ति है जो उसके जीवन के सभी कष्टों को मिटा सकती है (mere baba bholenath sab dukh door karo)।

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