मेरा भोला है भंडारी करे नंदी की सवारी Mera Bhola Hai Bhandari Kare Nandi Ki Sawari Lyrics

मेरा भोला है भंडारी करे नंदी की सवारी

Mera Bhola Hai Bhandari Kare Nandi Ki Sawari Lyrics

भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध और ऊर्जावान हिमाचली लोक-भजन “Mera Bhola Hai Bhandari / Sabna Da Rakhwala O Shivji” का संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth), उत्पत्ति (Origin), गायन का सही समय (Practices Time) और महत्व (Importance) विस्तार से जानें। हंसराज रघुवंशी द्वारा गाए इस गीत की पूरी जानकारी और FAQs के लिए यह लेख पढ़ें।

मेरा भोला है भंडारी करे नंदी की सवारी

सबना  दा रखवाला ओ शिवजी
डमरूवाला जी डमरू वाला
उपर कैलाश रहंदा भोले नाथजी… 

धर्मियो जो तारदे शिवजी 
पापिया जो मारदा जी पापिया जो मारदा 
बड़ा ही दयाल मेरा भोले अमली 

ॐ नमः शिवाय शम्भु ॐ नमः शिवाय हिंदू धर्म
ॐ नमः शिवाय शम्भु ॐ नमः शिवाय 

महादेव तेरा डमरू डम डम,
डम डम बजतो जाये रे हो महादेवा…
ॐ नमः शिवाय शम्भु 

सर से तेरी बेहती गंगा काम मेरा हो जाता चंगा 
नाम तेरा जब लेता ता ता ता महादेवा… 

मां पियादे घरे ओ गोरा 
महला च रहन्दी जी महला च रेहन्दी 
विच सम्साना राहंदा भोले नाथ जी 

कालेया कुंडला वाला मेरा भोले बाबा 
किधर कैलाश तेरा डेरा ओ जी… 
सर पे तेरे ओं गंगा  मैया विराजे 
मुकुट पे चंदा मामा ओं जी 
ॐ नमः शिवाय शम्भु ॐ नमः शिवाय 

भंग जे पिन्दा ओं शिवजी 
धुनी रमान्दा जी धुनी रमान्दा
बड़ा ही तपारी मेरा भोले अमली 

मेरा भोला है भंडारी करता नंदी की सवारी 
भोलेनाथ रे ओं शंकर नाथ रे 

गौरा भांग रगड़ के बोली 
तेरे साथ है भूतो की टोली 
मेरे नाथ रे शम्भू  नाथ रे

ओं भोले बाबा जी दर तेरे मै आया जी 
झोली खाली लाया जी खाली झोली भरदो जी 

कालिया सर्पा वाला मेरा भोले बाबा 
शिखरे कैलाशा विच रहंदा ओं जी
ॐ नमः शिवाय शम्भु ॐ नमः शिवाय

सबना दा रखवाला ओ शिवजी / मेरा भोला है भंडारी (Mera Bhola Hai Bhandari) – संपूर्ण विवरण, इतिहास और महिमा

सनातन हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के कई रूप हैं—कहीं वे गंभीर तपस्वी हैं, तो कहीं वे अत्यंत भोले और सरलता से मान जाने वाले ‘भंडारी’ हैं। आज के समय में शिव भक्ति का पर्याय बन चुका अत्यंत लोकप्रिय और मनमोहक गीत “Sabna Da Rakhwala O Shivji” (जो मुख्य रूप से ‘Mera Bhola Hai Bhandari’ के नाम से विख्यात है), भगवान शिव के उसी भोले, वैरागी और लोक-कल्याणकारी स्वरूप का दर्शन कराता है।

इस अत्यंत विस्तृत, सांस्कृतिक और ज्ञानवर्धक लेख में हम हिमाचल की वादियों से निकले इस परम पावन शिव भजन का संपूर्ण पाठ, इसकी साहित्यिक व लोक-परंपरागत उत्पत्ति (Origin), गहरा दार्शनिक और क्षेत्रीय भावार्थ (Bhavarth), इसके गान और श्रवण करने की सही विधि व समय (Practices Time), इसका आध्यात्मिक व लौकिक महत्व (Importance) और इससे जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) प्रस्तुत कर रहे हैं।

भजन का विस्तृत विवरण (Description of Mera Bhola Hai Bhandari)

Description of Mera Bhola Hai Bhandari को समझना भारत की लोक-संस्कृति (Folk Culture) और शिव भक्ति के अनूठे संगम को समझना है। यह कोई पारंपरिक संस्कृत स्तोत्र नहीं है, बल्कि यह एक विशुद्ध ‘पहाड़ी (हिमाचली)’ भजन है।

इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सरलता और अपनापन है। इसमें भगवान शिव को किसी दूर बैठे ईश्वर की तरह नहीं, बल्कि एक अपने ही परिवार के बड़े-बुजुर्ग, एक वैरागी और एक ‘अमली’ (मस्तमौला) सखा के रूप में दर्शाया गया है। भजन में शिव और पार्वती (गौरा) के विवाह के बाद के पारिवारिक जीवन और उनके रहन-सहन के अंतर (गौरा महलों में रहने वाली और शिव श्मशान में रहने वाले) का बहुत ही सुंदर और काव्यात्मक वर्णन किया गया है। इसकी लय (Beat) इतनी तेज़ और ऊर्जावान है कि इसे सुनते ही श्रोता शिव-भक्ति में झूमने और नाचने पर विवश हो जाता है।

उत्पत्ति और इतिहास (Origin of the Bhajan)

Origin of Mera Bhola Hai Bhandari की कहानी बहुत ही प्रेरणादायक और लोक-संगीत के आधुनिक प्रसार से जुड़ी हुई है।

  • लोक-परंपरा (Folk Origin): इस भजन के बोल मूल रूप से हिमाचल प्रदेश और उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों की लोक-परंपरा (Pahari Folk Tradition) से लिए गए हैं। पीढ़ियों से पहाड़ी लोग स्थानीय भाषा में शिव जी के ऐसे ही गीत गाते आए हैं।
  • आधुनिक प्रस्तुति और वैश्विक सफलता: इस भजन को वैश्विक और अपार लोकप्रियता वर्ष 2019 में मिली, जब इसे प्रसिद्ध शिव-भक्त और गायक हंसराज रघुवंशी (Hansraj Raghuwanshi – Babaji) ने अपने अद्वितीय और मस्तमौला अंदाज़ में गाया। संगीतकार सुरेश वर्मा (Suresh Verma) के संगीत निर्देशन में बना यह गीत इंटरनेट पर वायरल हो गया और रातों-रात इसने इतिहास रच दिया।
  • सांस्कृतिक प्रभाव: आज यह भजन महाशिवरात्रि, सावन मास और कांवड़ यात्रा का सबसे बड़ा ‘एंथम’ (Anthem) बन चुका है। इसने हिमाचली बोली को पूरे विश्व के शिव भक्तों की जुबान पर ला दिया।

संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth of Mera Bhola Hai Bhandari)

इस भजन में हिमाचली/पहाड़ी भाषा के शब्दों का प्रयोग हुआ है, इसलिए इसका अर्थ समझना अत्यंत आनंददायक है। आइए, Bhavarth of Mera Bhola Hai Bhandari का एक-एक पद और शब्द का विस्तृत विश्लेषण करें:

पद 1 का भावार्थ

सबना दा रखवाला ओ शिवजी, डमरूवाला जी डमरू वाला उपर कैलाश रहंदा भोले नाथजी…

भावार्थ (Meaning): भगवान शिव (डमरू वाले) हम सभी के (सबना दा) सच्चे रक्षक (रखवाला) हैं। वे भोलेनाथ इस संसार से दूर, बहुत ऊपर पवित्र कैलाश पर्वत पर निवास करते (रहंदा) हैं।

पद 2 का भावार्थ

धर्मियो जो तारदे शिवजी, पापिया जो मारदा जी पापिया जो मारदा बड़ा ही दयाल मेरा भोले अमली

भावार्थ (Meaning): भगवान शिव का न्याय बहुत ही स्पष्ट है। वे धर्म के मार्ग पर चलने वालों (धर्मियो) का उद्धार करते हैं (तारदे) और उन्हें भवसागर से पार लगाते हैं। वहीं, जो पापी और दुष्ट हैं, उनका वे संहार (मारदा) करते हैं। फिर भी, मेरा भोलेनाथ बहुत ही दयालु है। उन्हें यहाँ ‘अमली’ कहा गया है— ‘अमली’ का अर्थ यहाँ नशेड़ी नहीं, बल्कि अपनी ही दिव्य मस्ती, वैराग्य और भक्ति के नशे में डूबा रहने वाला मस्तमौला ईश्वर है।

पद 3 का भावार्थ

महादेव तेरा डमरू डम डम, डम डम बजतो जाये रे हो महादेवा… सर से तेरी बेहती गंगा काम मेरा हो जाता चंगा, नाम तेरा जब लेता ता ता ता महादेवा…

भावार्थ (Meaning): हे महादेव! आपका डमरू निरंतर ‘डम-डम’ बज रहा है (जो सृष्टि के चलने का प्रतीक है)। आपके सिर (जटाओं) से परम पवित्र गंगा नदी बह रही है। हे प्रभु, जब भी मैं सच्चे मन से आपका नाम लेता हूँ, तो मेरे सारे बिगड़े हुए काम अपने आप ‘चंगे’ (शुभ और सफल) हो जाते हैं।

पद 4 का भावार्थ (शिव और पार्वती के वैवाहिक जीवन का अंतर)

मां पियादे घरे ओ गोरा महला च रहन्दी जी महला च रेहन्दी विच सम्साना राहंदा भोले नाथ जी

भावार्थ (Meaning): यह पद बहुत ही प्यारा है। भक्त कहता है कि माता पार्वती (गौरा) तो अपने माता-पिता (मां पियादे घरे – अर्थात् राजा हिमालय के घर) में सुंदर महलों (महला च) में रहती थीं। वे एक राजकुमारी थीं। लेकिन जब उनका विवाह शिव जी से हुआ, तो वे शिव जी के साथ आ गईं, जो कि महलों में नहीं, बल्कि श्मशानों (सम्साना) के बीच रहते हैं। यह शिव जी के परम वैराग्य को दर्शाता है।

पद 5 का भावार्थ

कालेया कुंडला वाला मेरा भोले बाबा, किधर कैलाश तेरा डेरा ओ जी… सर पे तेरे ओं गंगा मैया विराजे, मुकुट पे चंदा मामा ओं जी

भावार्थ (Meaning): मेरे भोले बाबा के बाल (जटाएं) काले और घुंघराले (कालेया कुंडला) हैं। हे प्रभु, आपने अपना निवास (डेरा) कैलाश पर्वत पर न जाने कहाँ बनाया हुआ है। आपके सिर पर गंगा मैया सुशोभित हैं और आपके मस्तक रूपी मुकुट पर चंद्रमा (चंदा मामा) विराजमान हैं।

पद 6 का भावार्थ

भंग जे पिन्दा ओं शिवजी, धुनी रमान्दा जी धुनी रमान्दा बड़ा ही तपारी मेरा भोले अमली

भावार्थ (Meaning): भगवान शिव जड़ी-बूटियों (भांग) का रस पीते हैं और श्मशान या पहाड़ों पर अपनी ‘धुनी’ (पवित्र अग्नि) जलाकर तपस्या में लीन (रमान्दा) रहते हैं। वे बहुत बड़े तपस्वी (तपारी) हैं और अपनी ही धुन में रहने वाले (अमली) देवता हैं।

पद 7 का भावार्थ

मेरा भोला है भंडारी करता नंदी की सवारी, भोलेनाथ रे ओं शंकर नाथ रे गौरा भांग रगड़ के बोली, तेरे साथ है भूतो की टोली, मेरे नाथ रे शम्भू नाथ रे

भावार्थ (Meaning): मेरे भोलेनाथ संसार के सारे भंडार भरने वाले (भंडारी) हैं, और वे अपने वाहन ‘नंदी’ (बैल) की सवारी करते हैं। माता गौरा (पार्वती) जब उनके लिए भांग रगड़ती (पीसती) हैं, तो वे प्रेम से शिकायत करती हैं कि “हे मेरे नाथ! हे शम्भू! आपके साथ तो हमेशा भूतों और प्रेतों की टोली (समूह) ही घूमती रहती है।”

पद 8 का भावार्थ

ओं भोले बाबा जी दर तेरे मै आया जी, झोली खाली लाया जी खाली झोली भरदो जी कालिया सर्पा वाला मेरा भोले बाबा, शिखरे कैलाशा विच रहंदा ओं जी

भावार्थ (Meaning): हे भोले बाबा! मैं बहुत उम्मीद लेकर आपके दर (दरवाजे/शरण) पर आया हूँ। मैं अपनी मुरादों की खाली झोली लेकर आया हूँ, कृपया अपनी दया से मेरी इस खाली झोली को खुशियों से भर दीजिए। मेरे भोले बाबा काले भयंकर सर्पों (कालिया सर्पा) को गले में धारण करते हैं और कैलाश पर्वत के सबसे ऊंचे शिखर पर निवास करते हैं।

भजन गायन और श्रवण का सही समय (Practices Time)

यह भजन उल्लास, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है। अतः आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने के लिए Practices Time of Mera Bhola Hai Bhandari के कुछ विशेष अवसर इस प्रकार हैं:

1. कांवड़ यात्रा और सावन का महीना (Sawan & Kanwar Yatra)

श्रावण (सावन) मास में जब लाखों शिव भक्त कांवड़ लेकर पैदल यात्रा करते हैं, तब यह भजन उनके कदमों की थकान मिटाकर उनमें असीम ऊर्जा भर देता है। यात्रा के दौरान इस गीत को सुनना सर्वोत्तम है।

2. महाशिवरात्रि का जागरण (Maha Shivaratri Jagran)

महाशिवरात्रि की रात को, जब भक्तों को चारों प्रहर जागकर शिव आराधना करनी होती है, तब यह तेज़ लय वाला भजन नींद और आलस्य को भगाकर पूरे वातावरण को शिवमय बना देता है।

3. यात्रा और दैनिक कार्य (During Commute and Daily Chores)

अपनी दिनचर्या, यात्रा (ड्राइविंग) या व्यायाम (Workout) के दौरान इस ऊर्जावान गीत को सुनने से मन में सकारात्मक विचार आते हैं और दिन भर के काम आसानी से ‘चंगे’ (सफल) हो जाते हैं।

धार्मिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक महत्व (Importance of the Bhajan)

Importance of Mera Bhola Hai Bhandari केवल एक वायरल गीत होने तक सीमित नहीं है, इसने समाज और संस्कृति पर गहरा प्रभाव छोड़ा है:

1. लोक संस्कृति का संरक्षण (Preservation of Folk Culture)

इस भजन ने हिमाचल प्रदेश की ‘पहाड़ी बोली’ और वहां के संगीत को पूरे भारत और विश्व पटल पर स्थापित किया। यह प्रमाणित करता है कि ईश्वर की स्तुति किसी भी क्षेत्रीय भाषा या लोक-गीत में की जा सकती है, ईश्वर केवल भाव समझते हैं।

2. ईश्वर से आत्मीयता (Personal Connection with the Divine)

आमतौर पर मनुष्य ईश्वर से डरता है। लेकिन यह भजन ईश्वर को एक ‘भंडारी’ और ‘अमली’ के रूप में प्रस्तुत करता है, जिससे भक्त का ईश्वर के साथ डर का नहीं, बल्कि प्रेम और सखा (मित्र) का रिश्ता बनता है। इससे मनुष्य मानसिक रूप से अत्यधिक सुरक्षित महसूस करता है।

3. तनाव और अवसाद से मुक्ति (Stress Relief)

गीत का संगीत और “डम डम डम डम” की ध्वनि मानव मस्तिष्क में एंडोर्फिन (Endorphins – Happy hormones) रिलीज़ करती है। जब व्यक्ति इस भजन को गाते हुए झूमता है, तो उसके भीतर का सारा तनाव (Stress), अवसाद (Depression) और चिंताएं नष्ट हो जाती हैं।

4. जीवन में संतोष का संदेश (Message of Contentment)

यह भजन सिखाता है कि सृष्टि का सबसे बड़ा स्वामी (शिव) महलों में नहीं, श्मशान और बर्फ में रहता है। यह मनुष्य को अत्यधिक भौतिकवाद (Materialism) से दूर कर सादगी (Simplicity) और संतोष का जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs about Mera Bhola Hai Bhandari)
इस विश्व प्रसिद्ध शिव भजन से जुड़े कई प्रश्न भक्तों के मन में उठते हैं। यहाँ कुछ सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों (FAQs) के विस्तृत उत्तर दिए गए हैं:

प्रश्न 1: “मेरा भोला है भंडारी” भजन किसने गाया है?
उत्तर: इस अत्यंत लोकप्रिय भजन को मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध गायक हंसराज रघुवंशी (Hansraj Raghuwanshi) जी ने गाया है, जिन्हें उनके प्रशंसक प्यार से ‘बाबाजी’ भी कहते हैं। इस गीत ने ही उन्हें विश्वव्यापी पहचान दिलाई।

प्रश्न 2: भजन में प्रयुक्त शब्द ‘अमली’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: लोक भाषा (विशेषकर पंजाबी और हिमाचली) में ‘अमली’ शब्द का प्रयोग उस व्यक्ति के लिए किया जाता है जिसे किसी चीज़ की गहरी लत या नशा हो। यहाँ भगवान शिव को ‘अमली’ कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वे सांसारिक मोह-माया से दूर, अपनी ही आध्यात्मिक मस्ती, वैराग्य और भक्ति के नशे में चूर रहने वाले (मस्तमौला) देवता हैं।

प्रश्न 3: “मां पियादे घरे ओ गोरा महला च रहन्दी” का ऐतिहासिक प्रसंग क्या है?
उत्तर: माता पार्वती (जिन्हें गौरा कहा गया है) पर्वतों के राजा ‘हिमालय’ (हिमवान) की पुत्री थीं। अपने माता-पिता (मां-पिया) के घर वे सुंदर महलों में एक राजकुमारी की तरह रहती थीं। यह पंक्ति उनके विवाह पूर्व के जीवन की संपन्नता को दर्शाती है, जिसे छोड़कर उन्होंने वैरागी शिव को अपना पति चुना।

प्रश्न 4: भगवान शिव को ‘भंडारी’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: ‘भंडारी’ का अर्थ है भंडार (खजाना) भरने वाला। भगवान शिव अत्यंत भोले और कृपालु हैं। जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से उनके सामने अपनी खाली झोली फैलाता है, शिव जी बिना किसी भेदभाव के उसके सुख, शांति और समृद्धि के सारे भंडार भर देते हैं।

प्रश्न 5: क्या इस भजन को घर की दैनिक शांतिपूर्ण पूजा में गाया जा सकता है?
उत्तर: यह भजन मुख्य रूप से एक उल्लास, उत्सव और जागरण का गीत है, जिसकी लय बहुत तेज़ है। दैनिक शांतिपूर्ण पूजा या ध्यान के समय लोग अक्सर धीमी गति की आरतियों (जैसे ‘ओम जय शिव ओंकारा’) का प्रयोग करते हैं। हालांकि, यदि आप मन की खुशी और उत्सव के भाव से इसे पूजा के अंत में गाना चाहें, तो यह पूरी तरह से शुभ और उचित है।

#MeraBholaHaiBhandari, #HansrajRaghuwanshi, #LordShiva, #ShivBhajan, #Mahadev, #Bholenath, #PahariBhajan, #KanwarYatra, #SawanBhajan, #MahaShivaratri, #SanatanDharma, #Bhavarth, #BhaktiMarg, #SpiritualPeace, #HarHarMahadev, #ShivParvati

Leave a Comment

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now