शिवजी तेरे द्वार हम भी आयेंगे Shivji Tere Dwar Hum Bhi Ayenge Lyrics

शिवजी तेरे द्वार हम भी आयेंगे

सनातन हिंदू धर्म में भगवान शिव को जल और विशेष रूप से ‘गंगाजल’ अत्यंत प्रिय है। श्रावण मास (सावन) और कांवड़ यात्रा के दौरान शिव भक्त अपने आराध्य का जलाभिषेक करने के लिए मीलों पैदल चलते हैं। “Shivji Tere Dwar Hum Bhi Aayenge” एक ऐसा ही अत्यंत सुमधुर, भावपूर्ण और समर्पण से भरा शिव भजन है। यह भजन एक भक्त के हृदय की उस असीम प्यास और तड़प को दर्शाता है, जो जन्म-जन्मांतर से केवल शिव की शरण में जाने के लिए व्याकुल है।

शिवजी तेरे द्वार हम भी आयेंगे
(फ़िल्मी तर्ज -तू मेरा सनम मेरा हमदम)

शिवजी तेरे द्वार हम भी आयेंगे
गंगाजल से आपको हम नहलायेंगे


जनम जनम का प्यासा ये मन
तेरे शरण में ही आयेंगे हम
हम दीवाने हो गये है आपके
हर साँस में तेरे गुण गायेंगे

बोलो बोलो बम बम तेरे मिट जाये गम
दुःख दूर रहेंगे तुझसे जनम जनम  
शिवजी तेरे द्वार हम भी आयेंगे 
गंगाजल से आपको हम नहलायेंगे 

भजन का विस्तृत विवरण और उत्पत्ति (Description & Origin)

Description: यह भजन एक भक्त की भगवान शिव के प्रति अटूट निष्ठा का काव्यात्मक रूप है। इसमें भक्त कहता है कि वह शिव के द्वार (मंदिर या कैलाश) आकर उन्हें पवित्र गंगाजल से स्नान कराएगा। भजन में “बम बम” के जयकारे की महिमा बताई गई है, जो सभी दुखों को दूर करने वाला महामंत्र है। यह गीत बहुत ही शांत, मीठी और भक्तिमय लय में गाया जाता है, जो सीधे आत्मा को स्पर्श करता है।

Origin: इस सुमधुर भजन की उत्पत्ति आधुनिक भक्ति संगीत और विशेष रूप से ‘कांवड़ यात्रा’ की लोक-परंपरा से जुड़ी है। उत्तर भारत में सावन के महीने में जब शिव भक्त गंगाजल लेकर हरिद्वार, ऋषिकेश या काशी से लौटते हैं, तो वे अपनी थकान मिटाने और शिव का ध्यान करने के लिए ऐसे ही भक्तिपूर्ण भजनों का गायन करते हैं। इसे कई स्थानीय और प्रसिद्ध भजन गायकों ने अपनी आवाज़ दी है।

धार्मिक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक महत्व (Importance)

Importance of this Bhajan भक्त के जीवन में असीम शांति और शुद्धता लेकर आता है:

1. आत्मा की शुद्धि (Purification of the Soul)

गंगाजल भौतिक रूप से शरीर और शिवलिंग को शुद्ध करता है, लेकिन प्रतीकात्मक रूप से यह भजन मनुष्य के मन के विकारों (ईर्ष्या, क्रोध, लोभ) को धोकर आत्मा को शुद्ध करने का संदेश देता है।

2. सांसारिक मोह से विरक्ति और शांति

“जनम जनम का प्यासा ये मन” यह अहसास कराता है कि हमारी आत्मा की असली शांति भौतिक वस्तुओं में नहीं, बल्कि परमात्मा के चरणों में है। यह मनोवैज्ञानिक रूप से मनुष्य को तनाव (Anxiety) और भटकाव से बचाता है।

3. सकारात्मकता का संचार (Spreading Positivity)

जब भक्त “बम-बम” का नाद करता है, तो उसके आस-पास के वातावरण में सकारात्मक ध्वनि तरंगें (Sound Waves) उत्पन्न होती हैं, जो नकारात्मकता और दुखों (गम) को दूर भगाकर मानसिक बल प्रदान करती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भगवान शिव को गंगाजल क्यों अत्यंत प्रिय है?
उत्तर: पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब स्वर्ग से माता गंगा पृथ्वी पर अवतरित हो रही थीं, तो उनके भयंकर वेग को संभालने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण कर लिया था। शिव जी ने गंगा के वेग को शांत कर पृथ्वी का कल्याण किया। इसलिए शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने से शिव जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और इसे परम पुण्यदायी माना जाता है।

प्रश्न 2: भजन में “जनम-जनम का प्यासा” होने का क्या अर्थ है?
उत्तर: हिंदू दर्शन में पुनर्जन्म की मान्यता है। जीवात्मा कई योनियों में भटकने के बाद मनुष्य का जन्म पाती है। आत्मा की अंतिम प्यास परमात्मा (शिव) से मिलन यानी मोक्ष (Salvation) है। यह प्यास जन्म-जन्मांतर की होती है, जो शिव की शरण में जाने पर ही बुझती है।

प्रश्न 3: क्या शिवलिंग पर केवल गंगाजल ही चढ़ाया जा सकता है?
उत्तर: यद्यपि गंगाजल सर्वोत्तम माना गया है, लेकिन भगवान शिव तो ‘आशुतोष’ (भोलेनाथ) हैं। यदि आपके पास गंगाजल नहीं है, तो आप पूर्ण श्रद्धा के साथ किसी भी शुद्ध जल, कुएं के जल या नल के साफ जल से भी उनका अभिषेक कर सकते हैं। शिव केवल भक्त का भाव देखते हैं।

प्रश्न 4: “बम-बम” शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: ‘बम-बम’ शिव भक्तों द्वारा लगाया जाने वाला एक अत्यंत शक्तिशाली जयघोष और बीज मंत्र है। इसका निरंतर उच्चारण शरीर में एक विशेष ऊर्जा और नाद (Vibration) उत्पन्न करता है, जो भक्त के भीतर से भय, दुख और संकटों को नष्ट कर देता है।

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