भगवान शिव और माता पार्वती की मीठी नोक-झोंक पर आधारित अत्यंत प्यारे और पारंपरिक लोक-भजन “Rooth Gayi Gora O Maharani” का संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth), उत्पत्ति (Origin), गायन का सही समय (Practices Time) और सांस्कृतिक महत्व (Importance) विस्तार से जानें। शिव-पार्वती के इस दांपत्य प्रेम के गीत की पूरी जानकारी के लिए यह लेख पढ़ें।
Rooth Gayi Gora O Maharani Lyrics
रूठ गई गोरा ओ महारानी
| रूठ गई गोरा ओ महारानी, मनाए रहे भोला मानत नाही, जो गोरा तुम भोजन ना दोगी, भोजन ना दोगी गोरा भोजन ना दोगी, धतूरा हम खाले ओ महारानी, रूठ गई गोरा…. जो गोरा तुम जल नहीं दोगी, जल नहीं दोगी गोरा जल नहीं दोगी, भंगिया हम पी ले ओ महारानी, रूठ गई गोरा… जो गोरा तुम वीड़ा ना दोगी, वीड़ा ना दोगी गोरा वीड़ा ना दोगी, बेलपत्र हम चाबे ओ गोरा रानी, रूठ गई गोरा…. जो गोरा तुम सेज ना बिछाओगी, सेज ना बिछाओगी गोरा सेज ना बिछाओगी, गंगा जी को बुला ले ओ गोरा रानी, रूठ गई गोरा…. जो गोरा तुम संग ना चलोगी, संग ना चलोगी गोरा संग ना चलोगी, नंदी को हम बुला ले ओ महारानी, रूठ गई गोरा…. |
भजन का विस्तृत विवरण (Description of Rooth Gayi Gora O Maharani)
Description of Rooth Gayi Gora O Maharani को समझना भारतीय ग्रामीण परिवेश और महिलाओं के लोक-संगीत को समझना है। यह गीत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा ढोलक और मंजीरे की थाप पर गाया जाता है।
इस गीत का मूल स्वर ‘शृंगार और हास्य रस’ है। इसमें भगवान शिव का वह वैरागी स्वरूप दर्शाया गया है जिसे किसी भौतिक सुख-सुविधा की आवश्यकता नहीं है। यदि माता पार्वती उन्हें भोजन नहीं देंगी, तो वे ज़हरीला धतूरा खा लेंगे; यदि पान (बीड़ा) नहीं देंगी, तो वे कड़वे बेलपत्र चबा लेंगे। यह शिव जी का माता पार्वती को चिढ़ाने का एक बहुत ही प्यारा और निर्दोष तरीका है। यह भजन श्रोताओं के चेहरों पर एक सहज मुस्कान ला देता है और ईश्वर को अत्यंत आत्मीय और अपना सा महसूस कराता है।
उत्पत्ति और इतिहास (Origin of the Bhajan)
Origin of Rooth Gayi Gora O Maharani की पृष्ठभूमि विशुद्ध रूप से उत्तर भारत की महिला-संगीत (Mahila Sangeet) और लोक-परंपराओं से जुड़ी हुई है।
- लोक-गीत परंपरा (Folk Tradition): यह कोई शास्त्रीय या पौराणिक ग्रंथ का स्तोत्र नहीं है। यह उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश की ग्रामीण महिलाओं द्वारा रचा गया एक मौखिक लोक-गीत (Oral Folk Song) है। पीढ़ियों से महिलाएं शादियों, सावन के झूलों और शिवरात्रि पर इसे गाती आ रही हैं।
- दांपत्य जीवन का चित्रण: इस गीत की उत्पत्ति (Origin) का मुख्य कारण भारतीय समाज में पति-पत्नी के रिश्ते की खट्टी-मीठी तकरार को ईश्वर के माध्यम से व्यक्त करना है। यह दर्शाता है कि रूठना और मनाना दांपत्य जीवन का एक स्वाभाविक और सुंदर हिस्सा है।
संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth of Rooth Gayi Gora O Maharani)
यह गीत शिव जी के अघोर/वैरागी जीवन और एक गृहस्थ जीवन के बीच का बहुत ही सुंदर तुलनात्मक वर्णन है। आइए, Bhavarth of Rooth Gayi Gora O Maharani का एक-एक पद अत्यंत सरल और आनंदमयी रूप से समझें:
मुखड़ा का भावार्थ
रूठ गई गोरा ओ महारानी, मनाए रहे भोला मानत नाही
भावार्थ (Meaning): महारानी गौरा (माता पार्वती) किसी बात पर अपने पति भगवान शिव से रूठ (नाराज़ हो) गई हैं। उनके सीधे-सादे और भोले पति (शिव जी) उन्हें बहुत मना रहे हैं, लेकिन माता पार्वती इतनी आसानी से मानने को तैयार नहीं हैं।
पद 1 का भावार्थ (भोजन बनाम धतूरा)
जो गोरा तुम भोजन ना दोगी… धतूरा हम खाले ओ महारानी
भावार्थ (Meaning): शिव जी पार्वती जी को चिढ़ाते हुए कहते हैं कि हे महारानी गौरा! यदि तुम नाराज़ होकर मुझे स्वादिष्ट भोजन बनाकर नहीं दोगी, तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं तो एक वैरागी हूँ, मेरी भूख तो कड़वा और नशीला ‘धतूरा’ खाकर भी शांत हो जाएगी।
पद 2 का भावार्थ (जल बनाम भांग)
जो गोरा तुम जल नहीं दोगी… भंगिया हम पी ले ओ महारानी
भावार्थ (Meaning): हे गोरा! यदि तुम रूठकर मुझे पीने के लिए शीतल जल (पानी) भी नहीं दोगी, तो मैं प्यासा नहीं रहूंगा। मैं अपनी जड़ी-बूटियों वाली ‘भांग’ (भंगिया) घोंटकर पी लूंगा और उसी में मस्त रहूँगा।
पद 3 का भावार्थ (पान का बीड़ा बनाम बेलपत्र)
जो गोरा तुम वीड़ा ना दोगी… बेलपत्र हम चाबे ओ गोरा रानी
भावार्थ (Meaning): भोजन के बाद खाए जाने वाले मीठे पान के बीड़े (वीड़ा) का जिक्र करते हुए शिव जी कहते हैं कि यदि तुम मुझे अपने हाथों से पान का बीड़ा नहीं दोगी, तो मैं अपना प्रिय ‘बेलपत्र’ (जो स्वाद में फीका और औषधीय होता है) ही चबा लूंगा, लेकिन तुम्हारे आगे नहीं झुकूंगा।
पद 4 का भावार्थ (सेज बनाम गंगा जी)
जो गोरा तुम सेज ना बिछाओगी… गंगा जी को बुला ले ओ गोरा रानी
भावार्थ (Meaning): हे गौरा! यदि तुम मेरे विश्राम के लिए मुलायम बिस्तर (सेज) नहीं बिछाओगी, तो मैं अपनी जटाओं में निवास करने वाली परम शीतल ‘गंगा जी’ को बुला लूंगा और उन्हीं की शीतलता में आराम से सो जाऊंगा। (यह पंक्ति पार्वती जी के भीतर मीठी ईर्ष्या जगाने के लिए कही गई है, क्योंकि गंगा जी भी शिव की जटाओं में रहती हैं)।
पद 5 का भावार्थ (साथी बनाम नंदी)
जो गोरा तुम संग ना चलोगी… नंदी को हम बुला ले ओ महारानी
भावार्थ (Meaning): हे महारानी! यदि तुम हठ करके मेरे साथ कैलाश पर्वत पर या कहीं घूमने नहीं चलोगी, तो मुझे तुम्हारे बिना अकेले जाने में कोई परेशानी नहीं है। मैं अपने परम भक्त और वाहन ‘नंदी’ (बैल) को बुला लूंगा और उसी के साथ अपनी यात्रा पर निकल जाऊंगा।
भजन गायन और श्रवण का सही समय (Practices Time)
यह लोक-गीत मूल रूप से महिलाओं के उत्सवों और खुशी के मौकों का गीत है। Practices Time of Rooth Gayi Gora O Maharani के कुछ विशेष अवसर इस प्रकार हैं:
1. सावन का महीना (Sawan Month)
सावन के महीने में जब महिलाएं एकत्रित होकर झूला झूलती हैं और ढोलक बजाकर मंगल गीत गाती हैं, तब शिव-पार्वती की इस नोक-झोंक का गान सबसे अधिक किया जाता है।
2. महिला संगीत और विवाह समारोह (Mahila Sangeet & Marriages)
उत्तर भारत में शादियों के दौरान होने वाले ‘महिला संगीत’ (हल्दी/मेहंदी की रस्म) में शिव-पार्वती के विवाह और उनके दांपत्य प्रेम के ऐसे गीत गाए जाते हैं, ताकि नव-दंपति का जीवन भी शिव-पार्वती की तरह प्रेमपूर्ण रहे।
3. महाशिवरात्रि और हरितालिका तीज (Festivals)
महाशिवरात्रि के दिन या हरितालिका तीज (जब महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं), तब रात्रि जागरण के समय यह गीत गाकर महिलाएं अपना मनोरंजन करती हैं और ईश्वर का ध्यान लगाती हैं।
सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक महत्व (Importance)
Importance of Rooth Gayi Gora O Maharani केवल एक लोक-गीत होने तक सीमित नहीं है, यह भारतीय समाज के मनोविज्ञान को दर्शाता है:
1. ईश्वर का मानवीकरण (Humanization of the Divine)
यह गीत यह संदेश देता है कि ईश्वर कोई बहुत दूर बैठा कठोर शासक नहीं है। वे भी हमारी तरह परिवार वाले हैं, उनमें भी पति-पत्नी वाला प्रेम और तकरार है। यह भाव भक्त के मन से ईश्वर का डर निकालकर उन्हें अपना बना लेता है।
2. दांपत्य जीवन की मिठास (Sweetness of Marital Life)
गीत मनोवैज्ञानिक रूप से सिखाता है कि पति-पत्नी के बीच छोटी-मोटी नोक-झोंक (रूठना-मनाना) रिश्ते को कमज़ोर नहीं करती, बल्कि उसमें और अधिक मिठास और गहराई लाती है। शिव जी का पार्वती जी को मनाने का तरीका बहुत ही चंचल और प्रेमपूर्ण है।
3. शिव का परम वैराग्य (Detachment of Shiva)
हास्य के साथ-साथ यह गीत एक बहुत बड़ा दार्शनिक संदेश भी देता है। शिव जी को दुनिया के किसी भी भौतिक सुख (भोजन, सेज, पान) की लत नहीं है। वे प्रकृति के बहुत करीब हैं— वे धतूरा, बेलपत्र और भांग में ही पूर्ण रूप से संतुष्ट हैं। यह मनुष्य को सादगी (Simplicity) का संदेश देता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
शिव-पार्वती के इस मधुर लोक-गीत से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों (FAQs) के उत्तर यहाँ दिए गए हैं:
प्रश्न 1: माता पार्वती को ‘गोरा’ (गौरा) क्यों कहा जाता है?
उत्तर: ‘गौरा’ या ‘गौरी’ का अर्थ होता है अत्यंत गोरे और उज्जवल वर्ण (Fair Complexion) वाली। माता पार्वती का रूप अत्यंत कांतिवान और गौर वर्ण का है, इसलिए लोक-गीतों और शास्त्रों में उन्हें अत्यंत लाड़ से ‘गौरा’ कहा जाता है।
प्रश्न 2: भगवान शिव को ‘भोला’ क्यों कहा गया है?
उत्तर: भगवान शिव बहुत ही सीधे, निष्कपट और सरल हृदय वाले हैं। वे चालाकी या सांसारिक प्रपंचों से दूर रहते हैं। उनकी इसी सरलता और मासूमियत के कारण उन्हें ‘भोलेनाथ’ या ‘भोला बाबा’ कहा जाता है।
प्रश्न 3: गीत में “गंगा जी को बुला ले” कहने पर पार्वती जी क्यों मान जाएंगी?
उत्तर: लोक कथाओं में अक्सर गंगा जी को शिव जी की दूसरी पत्नी या पार्वती जी की सौतन के रूप में (हास्य रस में) चित्रित किया जाता है, क्योंकि गंगा शिव जी की जटाओं में रहती हैं। जब शिव जी कहते हैं कि “मैं गंगा जी को बुला लूंगा”, तो यह पार्वती जी को थोड़ी मीठी ईर्ष्या दिलाने और उन्हें जल्दी से मना लेने की एक युक्ति (Trick) है।
प्रश्न 4: “वीड़ा” (Paan) और बेलपत्र की तुलना क्यों की गई है?
उत्तर: पान का ‘बीड़ा’ राजसी सुख, स्वाद और शृंगार का प्रतीक है, जबकि ‘बेलपत्र’ जंगल में मिलने वाला एक साधारण और औषधीय पत्ता है जो शिव को अति प्रिय है। यह शिव जी के राजसी सुखों के प्रति वैराग्य को दर्शाता है।
प्रश्न 5: क्या यह कोई वैदिक आरती है?
उत्तर: नहीं, यह कोई वैदिक स्तोत्र या आरती नहीं है। यह एक पारंपरिक ‘लोक-गीत’ (Folk Song) है जो विशुद्ध रूप से ग्रामीण भारत की महिलाओं द्वारा अपने मनोरंजन और शिव-पार्वती के प्रति प्रेम प्रकट करने के लिए रचा गया है।
#RoothGayiGora, #ShivParvati, #LokGeet, #FolkBhajan, #SawanGeet, #MahilaSangeet, #LordShiva, #Bholenath, #MataParvati, #NokJhok, #SanatanDharma, #Bhavarth, #IndianFolkCulture, #HarHarMahadev