लिख देना लिख देना ओ गणपति Likh Dena Likh Dena O Ganpati Lyrics

संपूर्ण Likh Dena Likh Dena O Ganpati भजन लिरिक्स और उसका गहरा पारिवारिक व आध्यात्मिक भावार्थ जानें। महिलाओं के सत्संग में गाए जाने वाले इस प्रसिद्ध Bhagya Hamara Bhi भजन की महिमा, गायन का समय और भगवान श्री गणेश से मांगी गई सुंदर प्रार्थनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करें।

Likh Dena Likh Dena O Ganpati Lyrics

लिख देना लिख देना ओ गणपति

लिख देना लिख देना ओ गणपति,
भाग्य हमारा भी,
जैसे सबको दिया सहारा देना,
साथ हमारा भी,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
भाग्य हमारा भी ।

एक तो लिखना मात पिताजी,
एक तो लिखना मात पिताजी,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
प्यारा सा भैया जी,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
भाग्य हमारा भी ।

एक तो लिखना सास ससुरजी,
एक तो लिखना सास ससुरजी,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
प्यारा सजनवा जी,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
भाग्य हमारा भी ।

एक तो लिखना बेटा और बेटी,
एक तो लिखना बेटा और बेटी,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
बेटे को नौकरिया भी,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
भाग्य हमारा भी ।

चाहे जितनी लिखना उमरिया,
चाहे जितनी लिखना उमरिया,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
जाऊँ सुहागन ही,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
भाग्य हमारा भी ।

दूर रहूं मैं पाप दोष से,
दूर रहूं मैं पाप दोष से,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
ऐसी बुद्धि भी,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
भाग्य हमारा भी ।

लिख देना लिख देना ओ गणपति,
भाग्य हमारा भी,
जैसे सबको दिया सहारा देना,
साथ हमारा भी,
लिख देना लिख देना ओ गणपति,
भाग्य हमारा भी ।

Likh Dena Likh Dena O Ganpati एक अत्यंत ही मधुर, भावपूर्ण और पारिवारिक लोक-भजन है। यह भजन विशेष रूप से ‘महिला संगीत’ और घर के सत्संग में गाया जाता है। इस भजन में एक भक्त (विशेषकर एक स्त्री) भगवान गणेश जी (जो बुद्धि और भाग्य के दाता हैं) से प्रार्थना कर रही है कि वे उसका भी भाग्य (Bhagya) सुंदर लिखें। वह अपने मायके, ससुराल, पति, बच्चों की खुशी, अखंड सौभाग्य और सबसे बढ़कर, पापों से दूर रहने वाली सद्बुद्धि का वरदान मांगती है, ताकि उसका पूरा जीवन Bhagya Hamara Bhi की तरह सुखमय हो जाए।

Courtesy : Fine Digital Haryanvi

संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth)

यह भजन एक गृहस्थ स्त्री की संपूर्ण जीवन-यात्रा और उसकी सबसे पवित्र इच्छाओं का दर्पण है। इसका विस्तृत अर्थ इस प्रकार है:

1. Likh Dena Likh Dena O Ganpati, Bhagya Hamara Bhi (मुखड़ा): भक्त प्रथम पूज्य भगवान गणेश जी से प्रार्थना करते हुए कहती है, “हे विघ्नहर्ता गणपति! जिस प्रकार आप पूरी दुनिया का बेड़ा पार लगाते हैं और सबको सहारा देते हैं, वैसे ही आप मेरा भी भाग्य (Bhagya Hamara Bhi) अत्यंत सुंदर लिख देना और जीवन भर मेरा साथ देना।”

2. मायके की खुशी (मात-पिता और भैया): स्त्री सबसे पहले अपने जन्मदाता यानी माता-पिता और एक प्यारे से भाई का सुख मांगती है। वह भगवान से कहती है कि उसके भाग्य में उसके मायके परिवार का अटूट प्रेम और आशीर्वाद हमेशा लिखा रहे।

3. ससुराल का सुख (सास-ससुर और सजनवा): अगले पद में वह अपने ससुराल की सुख-शांति मांगती है। वह प्रार्थना करती है कि हे Likh Dena Likh Dena O Ganpati, मेरे भाग्य में माता-पिता के समान प्रेम करने वाले सास-ससुर और जीवन भर साथ निभाने वाला एक प्यारा सा पति (सजनवा) लिख देना।

4. संतान और समृद्धि (बेटा, बेटी और नौकरी): गृहस्थ जीवन की पूर्णता संतान से होती है। भक्त भगवान से एक स्वस्थ बेटा और बेटी का वरदान मांगती है। साथ ही, परिवार के आर्थिक सुख और उज्जवल भविष्य के लिए वह अपने बेटे के लिए अच्छी नौकरी (नौकरिया) का आशीर्वाद भी मांगती है।

5. अखंड सौभाग्य (जाऊँ सुहागन ही): भारतीय संस्कृति में एक स्त्री के लिए उसका सुहाग (पति की लंबी उम्र) सबसे बड़ा आभूषण है। वह निस्वार्थ भाव से कहती है कि, “हे प्रभु! मेरी उम्र (उमरिया) चाहे कितनी भी लंबी या छोटी हो, लेकिन मेरे भाग्य में यह लिख देना कि मैं इस संसार से एक ‘सुहागन’ के रूप में ही विदा होऊँ।”

6. सद्बुद्धि की प्रार्थना (पाप दोष से दूर): भजन का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पद आध्यात्मिक है। गणेश जी ‘बुद्धि’ के देवता हैं। भक्त उनसे प्रार्थना करती है कि, “हे गजानन, मुझे ऐसी पवित्र और निर्मल बुद्धि देना कि मैं जीवन भर किसी भी प्रकार के पाप, दोष और बुरे कर्मों से दूर रह सकूँ।”

उत्पत्ति और महत्व (Origin and Importance)

  • उत्पत्ति: यह एक अत्यंत लोकप्रिय पारंपरिक ‘महिला लोक-भजन’ है। इसे विशेष रूप से महिलाओं द्वारा ढोलक की ताल पर सामूहिक रूप से गाया जाता है।
  • महत्व: यह भजन भारतीय पारिवारिक मूल्यों (Family Values) की गहराई को दर्शाता है। इसमें भक्त केवल अपने लिए नहीं, बल्कि अपने माता-पिता, भाई, सास-ससुर, पति और बच्चों—सभी के कल्याण की कामना करती है। यह सिद्ध करता है कि सच्ची भक्ति में स्वार्थ नहीं, बल्कि पूरे परिवार का मंगल छिपा होता है।

गायन का सही समय (Practices Time)

इस पारिवारिक और उल्लासपूर्ण भजन को गाने के सबसे उत्तम अवसर इस प्रकार हैं:

  • गणेश चतुर्थी उत्सव: घर में गणपति बप्पा की स्थापना के समय और 10 दिनों तक चलने वाले उत्सव में इसे गाना बहुत फलदायी है।
  • महिला कीर्तन (Ladies Sangeet): विवाह से पहले होने वाले हल्दी, मेहंदी या ‘महिला संगीत’ के कार्यक्रमों में निर्विघ्नता और सौभाग्य के लिए इसे अवश्य गाया जाता है।
  • बुधवार का सत्संग: बुधवार भगवान गणेश का दिन है, इस दिन घर की महिलाओं द्वारा गाए जाने वाले भजनों में यह सबसे प्रमुख है।

क्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भगवान गणेश जी से ही भाग्य लिखने की प्रार्थना क्यों की गई है?
उत्तर: भगवान गणेश जी को ‘विघ्नहर्ता’ (कष्ट दूर करने वाले) और ‘बुद्धि व ज्ञान’ के देवता माना जाता है। हिंदू धर्म में हर शुभ कार्य की शुरुआत उन्हीं से होती है। महर्षि वेदव्यास जी के मुख से सुनकर महाभारत भी स्वयं गणेश जी ने ही लिखी थी। इसलिए भक्त उनसे अपने जीवन की सुंदर कहानी (भाग्य) लिखने की प्रार्थना करते हैं।

प्रश्न 2: “जाऊँ सुहागन ही” का क्या अर्थ है?
उत्तर: हिंदू मान्यताओं में, पत्नी का अपने पति से पहले परलोक सिधारना (सुहागन मरना) एक बहुत बड़ा सौभाग्य माना जाता है। यह पंक्ति एक पत्नी के अपने पति के प्रति अगाध प्रेम और पति की लंबी उम्र की प्रार्थना को दर्शाती है।

प्रश्न 3: भजन के अंत में “ऐसी बुद्धि भी” मांगकर भक्त क्या कहना चाहता है?
उत्तर: परिवार और सुख-सुविधाओं के साथ-साथ, इंसान को सही और गलत की पहचान होना बहुत ज़रूरी है। भक्त भगवान गणेश से ज्ञान (बुद्धि) मांग रहा है ताकि सुख के दिनों में भी उसमें कोई अहंकार न आए और वह पाप-कर्मों से बचा रहे।

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