यह अत्यंत लोकप्रिय और चुलबुला शिव भजन भक्त और भगवान के बीच के एक बहुत ही प्यारे, वात्सल्य और सखा भाव को दर्शाता है। विशेषकर सावन के महीने और ‘महिला संगीत’ में Kaise chadhaun bhola phool bel paati अत्यंत उत्साह के साथ गाया जाता है।
Kaise chadhaun bhola phool bel paati Lyrics
कैसे चढ़ाऊँ भोला फूल बेल पाती
| कैसे चढ़ाऊँ भोला फूल बेल पाती, जटा इधर उधर, जटा इधर उधर, पूजा करने दे करने दे, कैसे चढ़ाऊँ भोला फूल बेल पाती….. ओ भोले तेरे सिर पर है गंगा मैं जल कैसे चढ़ाऊँ हो, गंगा हटा लो मैं जल चढ़ादूँ कर डालूँ श्रृंगार हो, जटा इधर उधर जटा इधर उधर पूजा करने दे करने दे, कैसे चढ़ाऊँ भोला फूल बेल पाती….. ओ भोला तेरे माथे पे चंदा चन्दन कैसे लगाऊं हो, चंदा हटा लो चंदन लगा दूँ कर डालूँ श्रृंगार हो, जटा इधर उधर जटा इधर उधर पूजा करने दे करने दे, कैसे चढ़ाऊँ भोला फूल बेल पाती… ओ भोला तेरे कानो में बिच्छू कुण्डल कैसे चढ़ाऊँ हो, बिच्छू हटा लो कुण्डल पहना दूँ कर डालूँ श्रृंगार हो, जटा इधर उधर जटा इधर उधर पूजा करने दे करने दे, कैसे चढ़ाऊँ भोला फूल बेल पाती….. ओ भोले गले नाग है काले माला कैसे पहनाऊँ हो, नाग हटा लो गजरे पहना दूँ कर डालूँ श्रृंगार हो, जटा इधर उधर जटा इधर उधर पूजा करने दे करने दे, कैसे चढ़ाऊँ भोला फूल बेल पाती…. भोले तेरा भोग है भगिया लड्डू कैसे चढ़ाऊँ हो, भगिया हटा दो लड्डू खिला दूँ हो जाऊं भव से पार हो, जटा इधर उधर जटा इधर उधर पूजा करने दे करने दे, कैसे चढ़ाऊँ भोला फूल बेल पाती…. |
भजन का संपूर्ण भावार्थ (Meaning of the Bhajan)
इस लोक-भजन में एक भक्त भोलेनाथ का पारंपरिक श्रृंगार और पूजा करना चाहता है, लेकिन शिव जी का अघोर स्वरूप उसमें बाधा बन रहा है। भक्त प्रेमपूर्वक शिकायत करता है:
- अनोखा श्रृंगार: भक्त शिवलिंग पर जल, चंदन, कुंडल, फूलों का गजरा और लड्डू चढ़ाना चाहता है। लेकिन शिव जी के सिर पर पहले से ही विशाल गंगा, माथे पर चंद्रमा, कानों में बिच्छू, गले में भयंकर काले नाग और भोग के लिए भांग-धतूरा मौजूद है।
- भक्त की मनुहार: इन सबके कारण भक्त अपना श्रृंगार नहीं कर पा रहा है। इसलिए वह भोलेनाथ से मीठी ज़िद करता है कि हे प्रभु, अपनी इन लंबी जटाओं को थोड़ा किनारे कर लीजिए (Jata idhar udhar), ताकि मैं ठीक से आपकी पूजा कर सकूँ और आपका सुंदर श्रृंगार कर सकूँ।
उत्पत्ति और गायन का समय (Origin & Practice Time)
- Origin: Kaise chadhaun bhola phool bel paati उत्तर भारत की महिला कीर्तन मंडलियों (Mahila Sangeet) का एक प्रमुख पारंपरिक लोक-गीत है।
- Practices Time: इसे मुख्य रूप से सावन मास के सोमवार, महाशिवरात्रि के जागरण, और विवाह से पूर्व होने वाले मंगल-गीतों के दौरान ढोलक की ताल पर गाया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
इस भजन में “जटा इधर उधर” (Jata idhar udhar) कहने का क्या भाव है?
यह पंक्ति भक्त के उस अधिकार और निडरता को दर्शाती है जहाँ वह ईश्वर को किसी बाहरी शक्ति की तरह नहीं, बल्कि अपने परिवार के एक सदस्य की तरह मानता है और प्रेम से उन्हें संवरने के लिए कहता है।
शिव जी गले में नाग और कानों में बिच्छू क्यों धारण करते हैं?
भगवान शिव ‘पशुपतिनाथ’ हैं। समाज और प्रकृति जिन विषैले जीवों को ठुकरा देती है, परम वैरागी भोलेनाथ उन्हें आभूषण के रूप में अपनाते हैं। यह संसार के प्रति उनके समभाव का प्रतीक है।