लल्ला की सुन के मैं आयी यशोदा मैया देदो बधाई Lalla Ki Sun Ke Main Aayi Yashoda Maiya Dedo Badhai

संपूर्ण Lalla Ki Sun Ke Main Aayi Yashoda Maiya Dedo Badhai भजन लिरिक्स और उसका आनंदमयी भावार्थ। श्री कृष्ण जन्माष्टमी और नंदोत्सव के अवसर पर गाए जाने वाले इस प्रसिद्ध ‘बधाई गीत’ (Badhai Geet) की महिमा और अर्थ यहाँ विस्तार से पढ़ें।

लल्ला की सुन के मैं आयी यशोदा मैया देदो बधाई

Lalla Ki Sun Ke Main Aayi Yashoda Maiya Dedo Badhai


लल्ला की सुन के मैं आयी ,
यशोदा मैया देदो बधाई
लल्ला की सुन के मै आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई,

कान्हा की सुनके मै आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई,
लाला जनम सुन आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई,
दे दो बधाई मैया दे दो बधाई,
दे दो बधाई मैया दे दो बधाई,
लल्ला की सुन के मैं आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई।।

टीका भी लूँगी मैया,
बिंदियां भी लूँगी,
रेशम की लूँगी रजाई,
यशोदा मैया देदो बधाई,
लल्ला की सुन के मैं आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई।।

साड़ी भी लूँगी मैया,
लहँगा भी लूँगी,
धोती भी लूँगी मैया,
कुर्ता भी लूँगी,
पगडि की होगी चढ़ाई,
यशोदा मैया देदो बधाई,
लल्ला की सुन के मैं आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई।।

हरवा भी लूँगी मैया,
चूड़ी भी लूँगी,
कंगना पे होगी चढ़ाई,
यशोदा मैया देदो बधाई,
लल्ला की सुन के मैं आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई।।

चन्द्र सखी भज,
बाल कृष्ण छवि,
नित नित जाऊँ बलिहारी,
यशोदा मैया देदो बधाई,
लल्ला की सुन के मैं आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई।।

लल्ला की सुन के मै आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई,
कान्हा की सुनके मै आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई,
लाला जनम सुन आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई,

दे दो बधाई मैया दे दो बधाई,
दे दो बधाई मैया दे दो बधाई,
लल्ला की सुन के मैं आयी,
यशोदा मैया देदो बधाई।।

स्वर – लखबीर सिंह जी लक्खा।

Lalla Ki Sun Ke Main Aayi Yashoda Maiya Dedo Badhai – भजन लिरिक्स और संपूर्ण भावार्थ

लल्ला की सुन के मैं आयी यशोदा मैया देदो बधाई | Lalla Ki Sun Ke Main Aayi Lyrics

संक्षिप्त सार (In Short): “Lalla ki sun ke main aayi, Yashoda maiya dedo badhai” भगवान श्री कृष्ण के जन्म (जन्माष्टमी) और नंदोत्सव पर गाया जाने वाला एक अत्यंत लोकप्रिय और पारंपरिक बधाई गीत (Badhai Bhajan) है। जब गोकुल में कान्हा का जन्म होता है, तो पूरा गाँव खुशी से झूम उठता है। इस भजन में ब्रज की गोपियाँ (महिलाएं) मैया यशोदा के पास दौड़ कर आती हैं और लाला (श्री कृष्ण) के जन्म की खुशी में नेग (उपहार/बधाई) मांगती हैं। गोपियों की यह प्यारी सी ज़िद कि यशोदा मैया देदो बधाई, इस भजन को बहुत ही मधुर और वात्सल्य रस से भर देती है।

संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth of Lalla Ki Sun Ke Main Aayi)

यह भजन ब्रजवासियों के उत्साह और मैया यशोदा के साथ उनके आत्मीय संबंधों का बहुत ही सुंदर वर्णन करता है। आइए इसका पद-वार अर्थ समझें:

1. मुखड़ा (बधाई की मांग): गोपियाँ मैया यशोदा के घर आकर कहती हैं, “हे मैया! हम तुम्हारे घर लल्ला की सुन के मैं आयी हूँ (अर्थात लल्ला के जन्म की खबर सुनकर आई हूँ)। अब हमें कान्हा के जन्म की खुशी में सुंदर-सुंदर उपहार दो।” गोपियां बार-बार ज़िद करते हुए गाती हैं, यशोदा मैया देदो बधाई

2. आभूषण और रजाई की मांग: अगले पद में गोपियाँ अपने नेग (उपहार) की सूची बताती हैं। वे कहती हैं कि हे मैया, हम माथे का टीका भी लेंगी, बिंदिया भी लेंगी, और सर्दी से बचने के लिए रेशम की कीमती रजाई भी लेंगी। Lalla ki sun ke main aayi yashoda maiya dedo badhai गाते हुए वे अपना हक जताती हैं।

3. कपड़ों की मांग (साड़ी, लहँगा, पगड़ी): गोपियाँ केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि अपने पूरे परिवार के लिए उपहार मांग रही हैं। वे महिलाओं के लिए सुंदर साड़ी और लहँगा मांगती हैं, तथा घर के पुरुषों के लिए धोती, कुर्ता और सिर पर सजाने के लिए पगड़ी की मांग करती हैं।

4. गहनों की मांग (हरवा, चूड़ी, कंगना): गोपियाँ आगे कहती हैं कि वे गले का हार (हरवा), हाथों की चूड़ियाँ और सुंदर कंगना भी लेंगी। यह ब्रज की उस समृद्ध परंपरा को दर्शाता है जहाँ मुखिया के घर संतान होने पर पूरे गाँव को खुले हाथों से दान-दक्षिणा दी जाती थी।

5. चन्द्र सखी का समर्पण: अंतिम पद में संत ‘चन्द्र सखी’ (भजन के रचयिता) बाल कृष्ण के मनमोहक स्वरूप का ध्यान करते हुए कहते हैं कि मैं इस सुंदर छवि पर प्रतिदिन न्योछावर (बलिहारी) जाता हूँ।

उत्पत्ति और महत्व (Origin and Importance)

  • उत्पत्ति: यह भजन उत्तर भारत की लोक और भजन परंपरा का एक अहम हिस्सा है। इसे प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा जी ने अपनी आवाज़ देकर घर-घर में लोकप्रिय बना दिया है।
  • महत्व: भारतीय संस्कृति में बच्चे के जन्म पर रिश्तेदारों और पड़ोसियों को नेग (Badhai) देने की परंपरा है। यह भजन उसी सामाजिक उल्लास, प्रेम और आपसी भाईचारे का प्रतीक है, जिसे भगवान कृष्ण के जन्म के साथ जोड़ा गया है।

गायन का सही समय (Practices Time)

इस आनंदमयी और चुलबुले बधाई गीत को गाने के सबसे उपयुक्त अवसर हैं:

  • नंदोत्सव (Nandotsav): जन्माष्टमी के अगले दिन जब मंदिरों में बधाई बांटी जाती है और खिलौने लुटाए जाते हैं, तब यह गीत सबसे ज्यादा गाया जाता है।
  • छठी और नामकरण: परिवारों में जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है, तो उसकी ‘छठी’ (Chhathi) की रात को ढोलक की ताल पर महिला संगीत में यह गीत गाया जाता है।
  • कृष्ण जन्माष्टमी (Krishna Janmashtami): रात 12 बजे कृष्ण जन्म के तुरंत बाद जश्न मनाने के लिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: इस भजन में “बधाई” (Badhai) मांगने का क्या अर्थ है?
उत्तर: भारतीय परंपरा में, जब घर में कोई शुभ कार्य या बच्चे का जन्म होता है, तो खुशी प्रकट करने के लिए लोग (किन्नर, सगे-संबंधी, पड़ोसी) आते हैं और उपहार या नेग मांगते हैं। इसी नेग को ‘बधाई’ कहा जाता है। यशोदा मैया देदो बधाई पंक्ति में गोपियां वही नेग मांग रही हैं।

प्रश्न 2: गोपियां मैया यशोदा से इतनी सारी चीज़ें क्यों मांग रही हैं?
उत्तर: नंद बाबा गोकुल के राजा (मुखिया) थे। उनके यहाँ बहुत वर्षों बाद पुत्र (कृष्ण) का जन्म हुआ था। इसलिए ब्रजवासियों को पता था कि मैया यशोदा खुशी के मारे जो मांगोगे वो देंगी। यह उनके बीच के प्यार और अधिकार को दर्शाता है।

प्रश्न 3: इस भजन को ऑनलाइन सर्च करने के लिए सबसे अच्छे कीवर्ड्स क्या हैं?
उत्तर: आप इस भजन को खोजने के लिए lalla ki sun ke main aayi yashoda maiya dedo badhai, lalla ki sun ke main aayi, या यशोदा मैया देदो बधाई लिरिक्स जैसे कीवर्ड्स का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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