संपूर्ण Jabse Janme Kanhaiya Karamat Ho Gayi भजन लिरिक्स और उसका अद्भुत भावार्थ। श्री कृष्ण जन्माष्टमी की मध्यरात्रि को गाए जाने वाले इस भजन में जानें भगवान कृष्ण के जन्म, वासुदेव जी द्वारा गोकुल गमन और उस रात हुए चमत्कारों की पूरी संगीतमय कथा।
खुल गये सारे ताले वाह क्या बात हो गयी
Jabse Janme Kanhaiya Karamat Ho Gayi
तर्ज – छुप गये सारे नजारे। दोहा – कभी नरसिंह बनकर, पेट हिरणाकुश का वो फाड़े, कभी अवतार लेकर, राम का रावण को सँहारे, कभी श्री श्याम बन करके, पटक कर कंस को मारे, दसों गुरुओं का ले अवतार, वो ही हर रुप थे धारें, धरम का लोप होकर जब, पापमय संसार होता है, दुखी और दीन निर्बल का, जब हाहाकार होता है, प्रभु के भक्तो पर जब, घोर अत्याचार होता है, तभी संसार मे भगवान का, अवतार होता है। खुल गये सारे ताले वाह क्या बात हो गयी, जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गयी, था घनघोर अँधेरा कैसी रात हो गयी, जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गयी।। था बंदिखाना जनम लिये कान्हा, द्वापर का ज़माना पुराना, ताले लगाना पहरे बिठाना, वो कंस का जुलम ढाना, उस रात का द्रश्य भयंकर था, उस कंस को मरने का डर था, बादल छाये उमडाये बरसात हो गयी, जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गयी।। खुल गये ताले सोये थे रखवाले, थे हाथो मे बर्छीया भाले, दील के वो काले पड़े थे पाले, वो काल के हवाले होने वाले, वासुदेव ने श्याम को उठाया था, टोकरी मे श्री श्याम को लिटाया था, गोकुल धाये हर्षांये केसी बात हो गई, जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गयी।। घटायें थी काली अजब मतवाली, और टोकरे मे मोहन मुरारी, सहस बनधारी करे रखवारि, तो जमुना ने बात विचारि, श्याम आये है भक्तो के हितकारी, इनके चरणों मे हो जाऊँ बलिहारी, जाऊँ वारी हमारी मुलाकात हो गई, जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गयी।। छवि नटवर की वो परमेश्वर की, वो ईश्वर विश्वम्भर की, ना बात बीदर की ना जमुना के सर की, देख के झांकी गिरधर की, वासुदेव डगर ली नंद घर की, भक्तो ने कथा कही सावल की, सफल तंवर की कलम दवात हो गई, जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गयी।। खुल गये सारे ताले वाह क्या बात हो गयी, जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गयी, था घनघोर अँधेरा कैसी रात हो गयी, जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गयी।। |
Jabse Janme Kanhaiya Karamat Ho Gayi – भजन लिरिक्स और संपूर्ण भावार्थ
जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गयी | Jabse Janme Kanhaiya Karamat Ho Gayi
संक्षिप्त सार (In Short): “जबसे जन्मे कन्हैया करामात हो गयी” श्री कृष्ण के प्राकट्य (जन्म) और उनके जन्म की रात हुए चमत्कारों पर आधारित एक अत्यंत ही रोमांचक और कथात्मक भजन है। इसे बॉलीवुड के प्रसिद्ध गीत ‘छुप गये सारे नजारे’ की तर्ज (Tune) पर गाया जाता है। यह भजन गीता के उस उपदेश को सिद्ध करता है जहाँ भगवान कहते हैं कि जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब वे अवतार लेते हैं। भजन में मथुरा के बंदीगृह (जेल) के ताले टूटने, पहरेदारों के सोने, और वासुदेव जी द्वारा यमुना पार कर बाल कृष्ण को गोकुल ले जाने का सजीव वर्णन किया गया है।
संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth)
यह भजन भगवान के अवतार और जन्म की लीला का एक संगीतमय चित्रण (Musical Narration) है। आइए इसके पदों का विस्तृत अर्थ समझें:
1. दोहा (अवतार का कारण): भजन की शुरुआत एक बहुत ही शक्तिशाली दोहे से होती है। इसमें बताया गया है कि जब-जब संसार में पाप और हाहाकार बढ़ता है, तब भगवान अवतार लेते हैं। वे ही नरसिंह बनकर हिरण्यकश्यप का वध करते हैं, श्री राम बनकर रावण को मारते हैं और श्री कृष्ण बनकर कंस का संहार करते हैं। वे ही ईश्वर सभी रूपों और गुरुओं के रूप में प्रकट होते हैं।
2. मुखड़ा (चमत्कार की रात): भक्त आश्चर्य से कहता है कि जैसे ही कन्हैया (कृष्ण) का जन्म हुआ, वैसे ही बड़ी करामात (चमत्कार) हो गई। मथुरा के बंदीगृह के सारे ताले अपने आप खुल गए और उस घनघोर अँधेरी रात में भी ईश्वरीय प्रकाश छा गया।
3. पहला पद (कंस का अत्याचार और बरसात): द्वापर युग में जब कंस का जुल्म अपने चरम पर था, उसने अपनी बहन देवकी और वासुदेव को जेल (बंदिखाना) में डाल दिया था। कंस को अपनी मौत का डर था इसलिए उसने कड़े पहरे लगा रखे थे। लेकिन जिस रात कान्हा का जन्म हुआ, उस भयंकर रात में अचानक काले बादल छा गए और भारी बरसात होने लगी।
4. दूसरा पद (रखवालों का सोना और गोकुल गमन): ईश्वरीय माया के कारण, जिन दुष्ट और निर्दयी (दिल के काले) पहरेदारों के हाथों में बर्छियां और भाले थे, वे सभी गहरी नींद में सो गए। तब वासुदेव जी ने बाल कृष्ण को उठाया, उन्हें एक टोकरी में लिटाया और हर्षित मन से गोकुल की ओर चल पड़े।
5. तीसरा पद (शेषनाग की रक्षा और यमुना का स्पर्श): रात घनघोर थी, लेकिन टोकरी में स्वयं भगवान (मोहन मुरारी) विराजमान थे। उनके ऊपर हज़ारों फनों वाले शेषनाग (सहस बनधारी) छतरी बनकर रक्षा कर रहे थे। उधर यमुना नदी में भी उफान आ गया क्योंकि यमुना माता भगवान के चरणों को छूकर उन पर बलिहारी (न्योछावर) होना चाहती थीं। चरण स्पर्श करते ही यमुना शांत हो गईं।
6. चौथा पद (नंद भवन में प्रवेश): उस परमेश्वर, विश्वम्भर और नटवर की छवि इतनी मनमोहक थी कि वासुदेव जी बिना किसी चिंता और फिक्र के सीधे नंद बाबा के घर (नंद भवन) पहुँच गए। भजन के रचयिता (‘तंवर’ जी) कहते हैं कि सांवले सलोने भगवान की इस कथा को लिखकर मेरी कलम और दवात दोनों ही सफल और धन्य हो गए।
उत्पत्ति और महत्व (Origin and Importance)
- उत्पत्ति: यह एक आधुनिक कथात्मक भजन (Narrative Bhajan) है जिसे कथावाचकों और भजन गायकों द्वारा बहुत पसंद किया जाता है। इसकी तर्ज लोकप्रिय गीत ‘छुप गए सारे नजारे’ पर आधारित होने के कारण इसे आम जनमानस द्वारा आसानी से गाया जा सकता है।
- महत्व: यह भजन भागवत पुराण के दशम स्कंध (कृष्ण जन्म कथा) का एक संक्षिप्त और गीतात्मक रूप है। यह हमें सिखाता है कि ईश्वर की इच्छा के सामने दुनिया की कोई भी रुकावट, जेल, ताले या तानाशाह (कंस) टिक नहीं सकता।
गायन का सही समय (Practices Time)
इस भावपूर्ण भजन को गाने के सबसे उपयुक्त अवसर हैं:
- कृष्ण जन्माष्टमी की मध्यरात्रि: रात 12 बजे जब कृष्ण जन्म का उत्सव मनाया जाता है, तब ठीक जन्म के बाद इस भजन को गाकर जन्म लीला का स्मरण किया जाता है।
- श्रीमद्भागवत कथा: भागवत कथा के चौथे दिन जब ‘कृष्ण जन्मोत्सव’ का प्रसंग आता है, तब कथावाचक और श्रोता इसे झूमते हुए गाते हैं।
- प्रभात फेरी और कीर्तन: सावन और भादों के महीने में होने वाले कीर्तनों में यह भजन मुख्य रूप से शामिल होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: “सहस बनधारी करे रखवारि” का क्या अर्थ है?
उत्तर: ‘सहस बनधारी’ का अर्थ है सहस्र (हज़ार) फनों (फन/हुड) वाले भगवान शेषनाग। जब वासुदेव जी कृष्ण को यमुना पार करा रहे थे, तब भारी बारिश से बचाने के लिए शेषनाग ने अपने हज़ारों फनों से उनके ऊपर छतरी बना ली थी।
प्रश्न 2: यमुना नदी ने “क्या बात विचारी” थी?
उत्तर: जब वासुदेव जी यमुना नदी पार कर रहे थे, तो यमुना का जलस्तर बढ़ने लगा था। यमुना ने यह विचार किया कि स्वयं जगत के पालनहार आए हैं, तो मुझे उनके शुभ चरणों को छूकर अपना जीवन धन्य कर लेना चाहिए। चरण स्पर्श होते ही यमुना का जलस्तर नीचे चला गया।
प्रश्न 3: इस भजन की तर्ज (Tune) क्या है?
उत्तर: इस भजन को 1969 की सुपरहिट फिल्म ‘दो रास्ते’ के प्रसिद्ध गीत “छुप गए सारे नजारे ओए क्या बात हो गई” की धुन (तर्ज) पर गाया जाता है, जिससे यह बहुत ही संगीतमय और आकर्षक लगता है।