सूरत की मालनी हो कि दुरगा Surat ki Malani Ho Ki Durga Jas Lyrics

Surat ki Malani Ho Ki Durga

सूरत की मालनी हो ,
कि दुरगा काहे रखियो भरमाय ।।
Surat ki Malani Ho
Ki Durga Kahe Rakhiyo Bharmay

Surat ki Malani Ho Ki Durga

सूरत की मालनी हो ,
कि दुरगा काहे रखियो भरमाय ।।

ओ तो कहाँ लगा दऊ केवड़ो रे ,
बिरन मे रे कहा लगा दऊ रे अनार ।। सूरत की मालनी ।।
वो तो वन में लगा दऊ केवड़ों,
बिरन मेरे अंगना लगा दऊ रे अनार ॥ सूरत की मालनी ।।
वो तो कहाँ न सिचू केवड़ों रे,
वो तो कहाँ न सिचू अनार ।। सूरत की मालनी ।।
वो तो दूध सिचू केवड़ों रे,
दहीन सिचू अनार ॥ सूरत की मालनी ।।
वो तो कहा न तोडु केवड़ों रे,
कहान तोडु अनार ।। सूरत की मालनी ।।
वो तो अंगना लागो केवड़ों रे,
सरकन लगो अनार ।। सूरत की मालनी ।।
वो तो कहान तोडु केवड़ों रे,
बिरन में कहान तोडु अनार ।। सूरत की मालनी ।।
वो तो मलमल तोडु केवड़ों रे,
डली मन तोडु अनार ।। सूरत की मालनी ।।
वो तो कोहे चढ़ा दाऊ रे केवड़ों रे,
बिरन मे रे कोहे चढ़ा दाऊ ए अनार ॥ सूरत की मालनी । ।
वो तो दुर्गा चढ़ा दाऊ रे केवड़ों रे,
बिरन मे रे लुंगरा चढ़ा दाऊ रे अनार ।। सूरत की मालनी ।।
वो तो सुमर सुमर जस जायों रे, हो कि
दुर्गा रखियो चरण चितलाए ।। सूरत की मालनी ।।

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Surat Ki Malani Ho, Ki Durga Kahe Rakhiyo Bharmaay

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