Ab Lat Khoto Meri Maan ki Jas Lyrics
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के महाकौशल क्षेत्र का प्रसिद्ध लोकगीत ‘Devi Jas Geet’ के बारे में विस्तार से जानें। यहाँ पढ़ें Ab Lat Khoto Meri Maan ki Jas Lyrics के गहरे अर्थ, माता रानी को पुष्प अर्पण करने की परंपरा और इस पारंपरिक जस गीत को गाने का सही समय।
अब लट खोलो मेरी माँ, कि नैना रतन जड़े ।।
Ab Lat Khoto Meri Maan ki Naina Ratan Jade

अब लट खोलो मेरी माँ, कि नैना रतन जड़े ।।
| अब लट खोलो मेरी माँ, कि नैना रतन जड़े ।। अब लट खोलो मेरी माँ, कि नैना रतन जड़े ।। वो तो कहा लगा दऊ , दूध रे मोंगरों, चम्पा रे मोंगरों अनार, कि कहाँ लगा दाऊ मेरी माँ , कि बन की केवड़िया ।। मैया अब ।। वो तो अंगना लगा दाऊ दूध रे मोंगरों, चम्पा रे मोंगरों अनार, कि कहाँ लगा दाऊ मेरी माँ, कि बन की केवड़िया ।। मैया अब ।। वो तो कहाँ न सिचू दूध मोंगरों, चम्पा रे मोंगरों, अनार, की कहाँ न सिचू मेरी माँ , कि बन की केवड़िया ।। मैया अब ।। वो तो उगन लागो चम्पा रे मोंगरों, दूधरे मोंगरों अनार, कि उगन लगोमेरी माँ कि बन कि केवड़िया ।। मैया अब ।। वो तो फूलन लगा चम्पा रे मोंगरों, दूध रे मोंगरों अनार, कि फूलन लगा मेरी माँ कि बन की केवड़िया ।। मैया अब ।। वो तो कहाँ न तोडु चम्पा रे मोंगरों, दूध रे मोंगरों अनार, कि कहाँ न तोडु मेरी माँ कि बन की केवड़िया ।। मैया अब ।। वो तो उलमन तोडु चम्पा रे मोंगरों, दूध रे मोंगरों अनार, कि डलीयन तोडु मेरी माँ कि बन की केवड़िया ।। मैया अब ।। वो तो काहे चढ़ा दाऊ चम्पा रे मोंगरों , दूध रे मोंगरों अनार, कि कोहे चढ़ा दाऊ मेरी माँ कि बन की केवड़िया ।। मैया अब ।। वो तो दुर्गा चढ़ा दाऊ चम्पा रे मोंगरों , दूध रे मोंगरों अनार, कि लुंगरा चढ़ा दाऊ मेरी माँ कि बन की केवड़िया ।।मैया अब ।। वो तो सुमर सुमर मैया , तेरो जस गा लऊ तेरो जस गा लऊ की रखियों चरण चित लाये ।। मैया अब ।। |
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Ab Lat Kholo Meri Maan, Ki Naina Ratan Jade
Ab lat kholo meri maan, ki naina ratan jade।।
Wo to kahan laga dau, doodh re mongro, champa re mongro anar,
Ki kahan laga dau meri maan ki ban ki kevadiya।। Maiya ab।।
Wo to angna laga dau doodh re mongro, champa re mongro anar,
Ki kahan laga dau meri maan ki ban ki kevadiya।। Maiya ab।।
Wo to kahan na sichu doodh mongro, champa re mongro, anar,
Ki kahan na sichu meri maan, ki ban ki kevadiya।। Maiya ab।।
Wo to ugan lago champa re mongro, doodhre mongro anar,
Ki ugan lago meri maan ki ban ki kevadiya।। Maiya ab।।
Wo to phoolan laga champa re mongro, doodh re mongro anar,
Ki phoolan laga meri maan ki ban ki kevadiya।। Maiya ab।।
Wo to kahan na todu champa re mongro, doodh re mongro anar,
Ki kahan na todu meri maan ki ban ki kevadiya।। Maiya ab।।
Wo to ulman todu champa re mongro, doodh re mongro anar,
Ki daliyan todu meri maan ki ban ki kevadiya।। Maiya ab।।
Wo to kahe chadha dau champa re mongro, doodh re mongro anar,
Ki kohe chadha dau meri maan ki ban ki kevadiya।। Maiya ab।।
Wo to Durga chadha dau champa re mongro, doodh re mongro anar,
Ki lungra chadha dau meri maan ki ban ki kevadiya।। Maiya ab।।
Wo to sumar sumar Maiya, tero jas ga lau, tero jas ga lau,
Ki rakhiyo charan chit laaye।। Maiya ab।।
Explanation and Proper Reference (व्याख्या और संदर्भ)
यह एक अत्यंत ही सुंदर और पारंपरिक देवी जस गीत (Devi Jas Geet) है। ‘जस’ शब्द ‘यश’ (praise/glory) का अपभ्रंश है।
- Reference and Origin: यह लोकगीत मुख्य रूप से मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh), छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) और विशेष रूप से महाकौशल (Mahakaushal) क्षेत्र (जबलपुर, मंडला, सिवनी आदि) में माता के भक्तों द्वारा गाया जाता है। यह इस क्षेत्र की समृद्ध लोक-संस्कृति (folk culture) का एक अभिन्न हिस्सा है।
- The Theme (मूल भाव): इस गीत में भक्त माता रानी (दुर्गा/भवानी) से प्रार्थना कर रहा है कि वे अपनी लटें (बाल) खोलकर अपने रत्न जड़ित सुंदर नेत्रों से दर्शन दें। इसके बाद, पूरे गीत में एक बहुत ही प्यारा प्राकृतिक वर्णन है कि भक्त अपनी माता के लिए चंपा, मोंगरा (Mogra), अनार और केवड़े (Kewda) के फूलों के पौधे कहाँ लगाए, उन्हें कैसे सींचे, फूल खिलने पर उन्हें कैसे तोड़े और अंततः माता के चरणों में कैसे अर्पित करे। यह देवी पूजा में प्रकृति और पुष्पों के महत्व को दर्शाता है।
गीत के मुख्य अंश (Short Quote)
अब लट खोलो मेरी माँ, कि नैना रतन जड़े ।। वो तो कहा लगा दऊ , दूध रे मोंगरों, चम्पा रे मोंगरों अनार, कि कहाँ लगा दाऊ मेरी माँ कि बन की केवड़िया ।। मैया अब ।। वो तो अंगना लगा दाऊ दूध रे मोंगरों, चम्पा रे मोंगरों अनार…
How and When to Sing (सही समय और गाने की विधि)
जस गीत गाने का अपना एक अलग ही उत्साह और लोक-शैली (folk style) होती है।
Proper Time (सही समय):
- Best Occasions: यह गीत विशेष रूप से चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान गाया जाता है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले ‘जवारा विसर्जन’ (Jawara Visarjan) और माता के जगरातों में यह जस गीत अनिवार्य रूप से गाया जाता है।
Proper Method (सही विधि):
- Musical Instruments (वाद्ययंत्र): इसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे ढोलक (Dholak), मंजीरा, टिमकी, और झांझ के साथ तेज़ थाप पर गाया जाता है।
- Singing Style (गायन शैली): यह सामूहिक रूप (Group chorus) में गाया जाने वाला गीत है। एक मुख्य गायक पंक्ति उठाता है और बाकी भक्त उसे ऊंचे स्वर में दोहराते हैं। गीत के बोलों में सवाल-जवाब की शैली (जैसे कहाँ लगाऊँ? -> अंगना लगाऊँ) इसे और भी आकर्षक बनाती है।
- Mindset: गाते समय भक्तों के भीतर माता के प्रति पूर्ण समर्पण और उल्लास होना चाहिए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: ‘जस गीत’ (Jas Geet) क्या होता है?
A: ‘जस’ का अर्थ है यश या महिमा। जस गीत मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के वे पारंपरिक लोकगीत हैं, जिनमें देवी माँ की महिमा, उनके रूप, और उनकी शक्तियों का लोक-भाषा में गुणगान किया जाता है।
Q2: गीत में “अब लट खोलो मेरी माँ” का क्या अर्थ है?
A: माता के खुले बाल (लटें) उनके स्वतंत्र, उग्र और ममतामयी दोनों ही स्वरूपों का प्रतीक हैं। भक्त माता से आग्रह कर रहा है कि वे अपने सभी आवरण हटाकर अपने वास्तविक, तेजोमय रूप (रत्न जैसे नेत्रों) में उन्हें दर्शन दें।
Q3: इस जस गीत में किन फूलों का ज़िक्र किया गया है?
A: इस गीत में माता को अर्पित करने के लिए अत्यंत सुगंधित फूलों का वर्णन है— मोंगरा (Mogra), चंपा (Champa), अनार के फूल, और केवड़ा (Kewda)। ये सभी फूल देवी पूजा में बहुत शुभ माने जाते हैं।
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