Ambe Mai Durga Aa Gai Pahuni Jas Lyrics
मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध जस गीत Ambe Mai Durga Aa Gai Pahuni Jas Lyrics का अर्थ, महत्व और परंपरा जानें। देवी माँ को अतिथि (Guest) के रूप में पूजने वाले इस मधुर लोकगीत Ambe Mai Durga Aa Gai Pahuni को गाने की सही विधि और कथा यहाँ पढ़ें।
अम्बे माई दुर्गे आ गई , पाहुनी वो जगतारण ।
Ambe Mai Durga Aa Gai Pahuni Wo Jagtaran
| अम्बे माई दुर्गे आ गई पाहुनी वो जगतारण । कौन जो मिस से जाऊँ हो राजा की मलनिया ।। अम्बे माई ।। हलत डुलत मैया कुम्हरा दुकान गई , जोड़ा कलश बनवा लाई वो, राजा की मलनिया ।। अम्बे माई ।। हलत डुलत मैया लोहरा दुकान कई , जोड़ा त्रिशूल बनवा लाई रे राजा के मलनिया ।। अम्बे माई ।। हलत डुलत मैया सुनरा दुकान कई , जोड़ा पैजन बनवा लाई रे राजा के मलनिया ।। अम्बे माई ।। हलत डुलत मैया दर्जी दुकान कई , जोड़ा ध्वजा बनवा लाई रे राजा के मलनिया ।। अम्बे माई ।। हलत डुलत मैया माली दुकान कई , जोड़ा हार बनवा लाई रे राजा के मलनिया ।। अम्बे माई ।। सुमर सुमर मैया तेरो जस गा लाऊं, रखियों चरण चितलाई रे राजा के मलनिया ।। अम्बे माई ॥ |

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Ambe Mai Durge Aa Gayi, Pahuni Wo Jagataran
Ambe Mai Durge aa gayi, pahuni wo jagataraan.
Kaun jo miss se jaao ho raja ki malaniya।। Ambe Mai।।
Halat dulat Maiya kumhra dukaan gayi,
Joda kalash banwa laayi wo, raja ki malaniya।। Ambe Mai।।
Halat dulat Maiya lohra dukaan gayi,
Joda trishul banwa laayi re raja ki malaniya।। Ambe Mai।।
Halat dulat Maiya sunra dukaan gayi,
Joda paijaan banwa laayi re raja ki malaniya।। Ambe Mai।।
Halat dulat Maiya darzi dukaan gayi,
Joda dhwaja banwa laayi re raja ki malaniya।। Ambe Mai।।
Halat dulat Maiya maali dukaan gayi,
Joda haar banwa laayi re raja ki malaniya।। Ambe Mai।।
Sumar sumar Maiya tero jas ga laaoon,
Rakhiyo charan chitlaayi re raja ki malaniya।। Ambe Mai।।
Explanation and Proper Reference (व्याख्या और संदर्भ)
Ambe Mai Durga Aa Gai Pahuni Jas Lyrics एक बहुत ही पारंपरिक और भावपूर्ण ‘देवी जस गीत’ (Devi Jas Geet) है। यह गीत मुख्य रूप से मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के महाकौशल क्षेत्र और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की समृद्ध लोक-संस्कृति का हिस्सा है।
- The Context (प्रसंग): इस जस गीत में देवी माँ (अम्बे/दुर्गे) को एक ‘पाहुनी’ यानी अतिथि (Guest) के रूप में संबोधित किया गया है। लोक परंपराओं में जब देवी माँ का घर में आगमन होता है (जैसे नवरात्रि में कलश स्थापना के समय), तो उनका स्वागत एक बेहद खास और सम्मानित अतिथि की तरह किया जाता है।
- The Central Theme (मूल भाव): Ambe Mai Durga Aa Gai Pahuni गीत की सुंदरता इस बात में है कि इसमें माता की पूजा की तैयारियों का बहुत ही ज़मीनी और व्यावहारिक वर्णन है। माता के श्रृंगार और पूजा सामग्री के लिए कुम्हार (Potter) से कलश, लोहार (Blacksmith) से त्रिशूल, सुनार (Goldsmith) से पैंजन (पायल), दर्जी (Tailor) से ध्वजा, और माली (Gardener) से हार बनवाने का सुंदर ज़िक्र किया गया है। यह दर्शाता है कि देवी पूजा में समाज के हर वर्ग (हर शिल्पकार) का योगदान होता है।
गीत के मुख्य अंश (The Lyrics)
अम्बे माई दुर्गे आ गई पाहुनी वो जगतारण । कौन जो मिस से जाऊँ हो राजा की मलनिया ।। अम्बे माई ।। हलत डुलत मैया कुम्हरा दुकान गई , जोड़ा कलश बनवा लाई वो, राजा की मलनिया ।। अम्बे माई ।। हलत डुलत मैया लोहरा दुकान गई , जोड़ा त्रिशूल बनवा लाई रे राजा के मलनिया ।। अम्बे माई ।।
(यह Ambe Mai Durga Aa Gai Pahuni Jas Lyrics जस गायकों द्वारा बहुत ही भक्ति और उत्साह के साथ गाया जाता है।)
How and When to Sing (सही समय और गाने की विधि)
यह कोई साधारण भजन नहीं, बल्कि एक लोक-उत्सव का गीत है। Ambe Mai Durga Aa Gai Pahuni गाते समय माहौल में एक अलग ही ऊर्जा होती है।
Proper Time (सही समय):
- Best Occasions: यह जस गीत विशेष रूप से चैत्र और शारदीय नवरात्रि (Navratri) के दौरान गाया जाता है। माता की स्थापना (Kalash Sthapana), जवारा विसर्जन (Jawara Visarjan), या गाँव के देवी मंदिरों में होने वाले रात्रिकालीन जगरातों में इसका गायन प्रमुखता से होता है।
Proper Method (सही विधि):
- Musical Instruments (वाद्ययंत्र): इसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों जैसे ढोलक (Dholak), मंजीरा (Manjira), टिमकी, और झांझ के साथ तेज़ और उत्साहपूर्ण थाप पर गाया जाता है।
- Singing Style (गायन शैली): Ambe Mai Durga Aa Gai Pahuni Jas Lyrics सामूहिक गायन (Group chorus) के लिए बने हैं। एक मुख्य जस-गायक या गायिका पहली पंक्ति उठाती है, और फिर बाकी सभी भक्त तालियों और ढोलक की थाप के साथ उसे दोहराते हैं।
- Mindset: गाते समय भक्तों के भीतर ऐसा उल्लास होना चाहिए जैसे उनके स्वयं के घर में कोई बहुत बड़ा और प्रिय मेहमान (पाहुनी) आया हो।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: जस गीत में ‘पाहुनी’ (Pahuni) शब्द का क्या अर्थ है?
A: क्षेत्रीय लोक भाषा में ‘पाहुनी’ (या पाहुन) का अर्थ ‘अतिथि’ या ‘मेहमान’ (Guest) होता है। इस गीत Ambe Mai Durga Aa Gai Pahuni में देवी दुर्गा को एक अतिथि के रूप में संसार (जगतारण) में आते हुए दिखाया गया है।
Q2: इस गीत में कुम्हार, लोहार, सुनार और दर्जी का ज़िक्र क्यों है?
A: यह लोकगीत समाज की एकता को दर्शाता है। देवी की पूजा किसी एक व्यक्ति से पूरी नहीं होती; कुम्हार कलश बनाता है, लोहार त्रिशूल गढ़ता है, सुनार आभूषण (पैंजन) बनाता है, दर्जी ध्वजा (झंडा) सिलता है, और माली फूलों का हार बनाता है। यह पूजा में संपूर्ण समाज की भागीदारी का प्रतीक है।
Q3: ‘जस गीत’ (Jas Geet) मुख्य रूप से कहाँ गाए जाते हैं?
A: जस गीत भारत के मध्य भाग—विशेषकर मध्य प्रदेश (महाकौशल, बुंदेलखंड, विंध्य) और छत्तीसगढ़ के ग्रामीण व शहरी अंचलों में देवी की आराधना के लिए गाए जाने वाले पारंपरिक लोकगीत हैं।
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