डमरू वाले बाबा तुमको आना होगा Damru Wale Baba Tumko Aana Hoga

डमरू वाले बाबा तुमको आना होगा Damru Wale Baba Tumko Aana Hoga

Damru Wale Baba Tumko Aana Hoga: प्रसिद्ध और अत्यंत मधुर शिव भजन “डमरू वाले बाबा तुमको आना होगा” का अर्थ, महत्व और गाने की सही विधि यहाँ जानें। सुश्री हेमलता जी शास्त्री (Shri Hemlata Ji Shashtri) द्वारा गाए गए इस आनंदमयी भजन के माध्यम से भगवान शिव, माता गौरा और गणपति जी का आह्वान करें।

संपूर्ण भजन (The Lyrics)
डमरू वाले बाबा तुमको आना होगा,
(तर्ज – झिलमिल सितारों का)

डमरू वाले बाबा तुमको आना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।
माँ गौरा संग गणपति जी को, लाना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।
डमरू वालें बाबा तुमको आना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।।


बेलपत्र दूध बाबा, आपको चढ़ाएँगे,
केशरिया चंदन माथे, तिलक लगाएँगे।
भक्तो को दरश, दिखाना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।
डमरू वालें बाबा तुमको आना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।।

आप तो निराले बाबा, रूप भी निराला,
हाथ में त्रिशूल गले, सर्पो की माला।
नंदी पे चढ़कर, आना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।
डमरू वालें बाबा तुमको आना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।।

कल्याणकारी भोले, नाथ तुम हमारे,
दुःख हो या सुख, हम सबके सहारे।
नैया को पार, लगाना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।
डमरू वालें बाबा तुमको आना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।।

देवों के देव, महादेव आज आए,
विष को पिया है, नीलकंठ भी कहाए।
भक्ति से शिव को, मनाना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।
डमरू वालें बाबा तुमको आना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।।

डमरू वाले बाबा तुमको आना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।
माँ गौरा संग गणपति जी को, लाना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।
डमरू वालें बाबा तुमको आना होगा,
डम डम डमरू बजाना होगा।।

Explanation and Proper Reference (व्याख्या और संदर्भ)

आपने जो पाठ साझा किया है, वह भगवान शिव (Lord Shiva) को समर्पित एक बहुत ही उल्लासपूर्ण और लोकप्रिय आमंत्रण भजन (Invitation Bhajan) है।

  • Reference and Singer: यह एक आधुनिक और अत्यंत प्रिय लोक भजन है, जिसे मुख्य रूप से सत्संग और जागरण में गाया जाता है। दी गई जानकारी के अनुसार, इसे सुप्रसिद्ध गायिका सुश्री हेमलता जी शास्त्री (Shri Hemlata Ji Shashtri) द्वारा बहुत ही सुरीले ढंग से गाया गया है। इसकी धुन (Tarj) पुराने प्रसिद्ध बॉलीवुड गीत “झिलमिल सितारों का आंगन होगा” पर आधारित है।
  • The Context (प्रसंग): इस भजन में भक्त भगवान शिव को अपने घर/हृदय में आमंत्रित कर रहा है। भक्त केवल शिव जी को ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार—माता पार्वती (गौरा) और भगवान गणेश (गणपति जी)—को साथ लाने का आग्रह कर रहा है।
  • The Central Theme: यह भजन भगवान शिव के कल्याणकारी और निराले स्वरूप (त्रिशूल, सर्पों की माला, नंदी की सवारी) का वर्णन करता है। इसमें भक्त बेलपत्र, दूध और केसरिया चंदन चढ़ाने का वादा करके अपनी भक्ति और प्रेम को प्रदर्शित कर रहा है। अंत में शिव जी को “नीलकंठ” कहकर उनके उस महान त्याग (समुद्र मंथन का विष पीने) की महिमा गाई गई है।

How and When to Sing (सही समय और गाने की विधि)

यह भजन श्रवण (Sawan) के महीने और शिवरात्रि के अवसर पर विशेष रूप से गाया जाता है। यह एक खुशी और उल्लास से भरा भजन है।

Proper Time (सही समय):

  • Best Days: सोमवार (Monday), मासिक शिवरात्रि, और सावन का पवित्र महीना इस भजन को गाने के लिए सर्वोत्तम हैं।
  • Best Occasions: घर में रुद्राभिषेक के बाद, शिव जागरण, या महिलाओं की कीर्तन मंडली (Satsang) में यह भजन माहौल को भक्तिमय कर देता है।

Proper Method (सही विधि):

  1. Musical Instruments: चूँकि इसके बोलों में ही ‘डमरू’ का ज़िक्र है, इसलिए इसे डमरू (Damru), ढोलक (Dholak), मंजीरा और चिमटे के साथ एक तेज़ और आनंदमयी ताल (Upbeat rhythm) में गाना चाहिए।
  2. Offerings (प्रसाद और अर्पण): भजन गाते समय शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध, बेलपत्र (Belpatra) और केसरिया चंदन (Saffron Sandalwood) अर्पित करना बहुत ही शुभ माना जाता है, जैसा कि भजन की पंक्तियों में वर्णित है।
  3. Mindset (भाव): इसे गाते समय ऐसा महसूस करें जैसे आप सचमुच महादेव और उनके परिवार को अपने घर किसी उत्सव में आमंत्रित कर रहे हैं। भाव में खुशी और उत्साह होना चाहिए।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: भगवान शिव को ‘नीलकंठ’ क्यों कहा जाता है, जैसा कि भजन में वर्णित है?
A: समुद्र मंथन (Samudra Manthan) के दौरान जब हलाहल विष निकला था, तब पूरी सृष्टि को बचाने के लिए शिव जी ने उस विष को पी लिया था। उन्होंने उस विष को अपने गले (कंठ) से नीचे नहीं जाने दिया, जिसके कारण उनका कंठ नीला पड़ गया और वे ‘नीलकंठ’ (Neelkanth) कहलाए।

Q2: इस भजन में भक्त शिव जी के साथ किसे आमंत्रित कर रहा है?
A: भक्त भगवान शिव के साथ माता गौरा (Maa Parvati) और उनके पुत्र भगवान गणेश (Ganapati Ji) को आमंत्रित कर रहा है। यह शिव परिवार (Shiv Parivar) की पूर्ण पूजा का प्रतीक है।

Q3: शिव जी को कौन-कौन सी वस्तुएं चढ़ाने का उल्लेख इस भजन में है?
A: भक्त भजन के माध्यम से शिव जी को दूध, बेलपत्र और केसरिया चंदन का तिलक चढ़ाने की बात कह रहा है। ये सभी वस्तुएं भगवान शिव को अत्यंत प्रिय हैं और इससे वे जल्दी प्रसन्न होते हैं।

Q4: शिव जी की सवारी क्या है?
A: भजन में उल्लेख है—”नंदी पे चढ़कर आना होगा”। नंदी (Nandi) एक बैल हैं जो भगवान शिव के परम भक्त, गण और उनकी सवारी (Vehicle) हैं।

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