काली कंकालन कालका हो माँ Kaali Kankalan Kalka Ho Maa Lyrics

काली कंकालन कालका हो माँ ।।
Kaali Kankalan Kalka Ho Maa Lyrics

Kaali Kankalan Kalka Ho Maa Lyrics : मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक देवी जस गीत “काली कंकालन कालका हो माँ” का अर्थ, भाव और महत्व जानें। माता काली (कंकालिन/कालका) के उग्र स्वरूप, उनके अस्त्र-शस्त्र और उन्हें अर्पित किए जाने वाले हरे चोले के इस लोक-वर्णन को गाने की विधि यहाँ पढ़ें।

Kaali Kankalan Kalka Ho Maa Lyrics

काली कंकालन कालका हो माँ ।।

काली कंकालन कालका हो माँ ।।

काहे की बनी तिरशुलिया रे, काहे की बनी साठ
काहे को बनो हरो चोलना, मैया तेरो दरबार ।। काली ।।

लोहे की बनी तिरशुलिया रे, बालों की बनी साठ
हरो सूत हरो चोलना मैया तेरो दरबार ।। काली ।।

कोहे चढ़ा दऊ तिरशुलिया रे , बालों की बनी साठ,
कोहे चढ़ा दऊ हरा चोलना , मैया तेरो दरबार ।। काली ।।

देवी चढ़ा दऊ तिरशुलिया, बालों की बनी साठ
लुंगरा चढ़ा दऊ हरो चोलना , मैया तेरो दरबार ।। काली ।।

जय जय जय जगदम्बे रे, रख लईयो मेरी लाज
बेगी राम जस गा लऊ, मैया तेरो दरबार ।। काली ।।

“Kaali Kankalan Kalka Ho Maa”

Kaali Kankalan Kalka ho maa,
Kaali Kankalan Kalka ho maa.

Verse 1:
Kahe ki bani tirshuliya re, kahe ki bani saath
Kahe ko bano haro cholna, Maiya tero darbaar.
Kaali Kankalan Kalka ho maa.

Verse 2:
Lohe ki bani tirshuliya re, balon ki bani saath
Haro soot haro cholna, Maiya tero darbaar.
Kaali Kankalan Kalka ho maa.

Verse 3:
Kohe chadha dau tirshuliya re, balon ki bani saath
Kohe chadha dau hara cholna, Maiya tero darbaar.
Kaali Kankalan Kalka ho maa.

Verse 4:
Devi chadha dau tirshuliya re, balon ki bani saath
Lungra chadha dau hara cholna, Maiya tero darbaar.
Kaali Kankalan Kalka ho maa.

Chorus:
Jai Jai Jai Jagdambe re, rakh laiyo meri laaj
Beggi Ram jas ga lau, Maiya tero darbaar.
Kaali Kankalan Kalka ho maa.

Explanation and Proper Reference (व्याख्या और संदर्भ)

यह एक अत्यंत ऊर्जावान, पारंपरिक और शक्तिशाली देवी जस गीत (Devi Jas Geet) है, जो आदिशक्ति के उग्र स्वरूप—माता काली (कालका और कंकालिन माता) को समर्पित है। कंकालिन माता को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लोक-जीवन में एक अत्यंत जागृत और शक्तिशाली देवी माना जाता है।

  • The Context (प्रसंग): इस लोकगीत की रचना प्रश्नोत्तर (Question-Answer) शैली में की गई है। भक्त पहले उत्सुकता से पूछता है कि माता का त्रिशूल, ‘साठ’ और उनका हरा चोला किन चीज़ों से बना है, और फिर अगले ही पद (Stanza) में वह स्वयं इसका उत्तर देता है।
  • The Central Theme (मूल भाव): यह गीत माता की पूजा सामग्री और उनके अस्त्रों का लोक-वर्णन है। इसमें बताया गया है कि माता का त्रिशूल लोहे का है, ‘साठ’ (सांट) बालों की बनी है, और उनका चोला (वस्त्र) हरे रंग के सूत से बुना गया है। अंत में भक्त यह सब सामग्री माता को (लुंगरा के साथ) अर्पित करता है और प्रार्थना करता है कि हे जगदम्बे! मेरी लाज रखना।

How and When to Sing (सही समय और गाने की विधि)

यह जस गीत बहुत ही ओजपूर्ण (energetic) है और इसे गाते समय माता की असीम शक्ति का आभास होता है।

Proper Time (सही समय):

  • Best Occasions: यह जस गीत विशेष रूप से नवरात्रि की अष्टमी और नवमी (Kali Puja) की रात को, जवारा विसर्जन (Jawara Visarjan) के जुलूस में, और माता कंकालिन/काली के जगरातों में गाया जाता है।

Proper Method (सही विधि):

  1. Musical Instruments (वाद्ययंत्र): इसे ढोलक (Dholak), टिमकी, झांझ और मंजीरे की बहुत तेज़ और जोशीली थाप (High tempo) पर गाया जाता है।
  2. Singing Style (गायन शैली): यह प्रश्न-उत्तर की शैली में है, इसलिए इसे दो समूहों में भी गाया जा सकता है। एक समूह प्रश्न वाली पंक्ति गाता है और दूसरा समूह उत्तर वाली पंक्ति गाकर पूरा माहौल भक्तिमय कर देता है।
  3. Mindset: इसे गाते समय हृदय में माता के प्रति अटूट विश्वास, उत्साह और पूर्ण समर्पण का भाव होना चाहिए।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1: लोकगीत में ‘कंकालन’ (Kankalan) का क्या अर्थ है?
A: ‘कंकालन’ या ‘कंकालिन’ माता काली का ही एक क्षेत्रीय लोक स्वरूप है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ (विशेषकर महाकौशल और बस्तर क्षेत्र) में कंकालिन माता के कई सिद्ध मंदिर हैं। उन्हें बुराई और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली उग्र देवी माना जाता है।

Q2: इस गीत में ‘साठ’ (Saath/Saant) शब्द का प्रयोग किसके लिए हुआ है?
A: महाकौशल और छत्तीसगढ़ की जवारा परंपरा में ‘सांट’ (साठ/कोड़ा) का बहुत महत्व है। यह बालों, सन या चमड़े से गुंथा हुआ एक प्रकार का चाबुक (whip) होता है जिसे देवी के पंडे (जिनके शरीर में देवी का वास माना जाता है) अपने पास रखते हैं या स्वयं पर प्रहार करते हैं। गीत में इसे “बालों की बनी साठ” कहा गया है।

Q3: माता को ‘हरा चोलना’ (Haro Cholna) क्यों अर्पित किया जा रहा है?
A: ‘चोलना’ या ‘चोला’ माता की पोशाक (वस्त्र) को कहा जाता है। लोक परंपराओं में हरे रंग का चोला प्रकृति, समृद्धि, जीवन और शीतलता (शांति) का प्रतीक माना जाता है। उग्र स्वरूप वाली देवी को शांत और प्रसन्न करने के लिए हरा चोला और नारियल चढ़ाया जाता है।

Q4: “लुंगरा चढ़ा दऊ” का क्या मतलब है?
A: ‘लुंगरा’ (लहंगा या सुहाग की चुनरी) एक पारंपरिक परिधान है। भक्त कह रहा है कि वह माता को हरा चोला, चुनरी/लुंगरा और उनके सभी प्रिय अस्त्र (त्रिशूल) पूर्ण श्रद्धा के साथ अर्पित कर रहा है।

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