कैसे सुमरु देवी जालपा हो माँ ।।
Kaise Sumru Devi Jalpa Ho Maa
Kaise Sumru Devi Jalpa Ho Maa : मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के महाकौशल क्षेत्र का अत्यंत ओजपूर्ण पारंपरिक ‘देवी जस गीत’ (Devi Jas Geet)—”कैसे सुमरु देवी जालपा हो माँ” का भावार्थ और महत्व जानें। यह लोकगीत माता दुर्गा (जालपा माता) द्वारा महिषासुर वध की पौराणिक कथा का बहुत ही सुंदर और वीर रस से भरा लोक-वर्णन है।

कैसे सुमरु देवी जालपा हो माँ ।।
| कैसे सुमरु देवी जालपा हो माँ ।। महिषासुर एक दानव रे, जग हो गया प्रचंड, धरती के नौ खंड जीत लियो, जीत लियो इंद्रासन ।। कैसे सुमरु ।। ब्रम्हा विष्णु सदा शिव , सुर मुनि करतार, जोत कला वो सब हारी, कोई पार न पाये ।। कैसे सुमरु ।। सकल देव उठ भागेरे, माई दुर्गा के पास । तू मेरी आदि भवानी, मैया रखो अब लाज ।। कैसे सुमरु ।। इतनी सुन उठ गरजी रे, हाथ ले लई तलवार । लुंगरा ने सिगला पलनों , दुर्गा हो गई असवार ।। कैसे सुमरु ।। कौन वरण मई दुर्गा रे, काहे पे असवार । कौन वरण महिषासुर, काहे पे असवार ।। कैसे सुमरु ॥ लाल वरण मई दुर्गा रे, सिंघला पे असवार , कारो वरण महिषासुर, भैसा पे असवार ।। कैसे सुमरु ।। तू मेरी आदि भवानी, रख लईयो मेरी लाज । बेगीराम जस गावे , मैया तेरो दरबार ।। कैसे सुमरु ।। |
“Kaise Sumru Devi Jalpa Ho Maa”
Chorus:
Kaise sumru Devi Jalpa ho maa,
Kaise sumru Devi Jalpa ho maa.
Verse 1:
Mahishasur ek danav re, jag ho gaya prachand,
Dharti ke nau khand jeet liyo,
Jeet liyo Indrasan.
Kaise sumru Devi Jalpa ho maa.
Verse 2:
Brahma, Vishnu, Sadashiv, sur muni karta,
Jot kala wo sab haari,
Koi paar na paaye.
Kaise sumru Devi Jalpa ho maa.
Verse 3:
Sakal dev uth bhaage re, maayi Durga ke paas,
Tu meri Aadi Bhavani,
Maiya rakho ab laaj.
Kaise sumru Devi Jalpa ho maa.
Verse 4:
Itni sun uth garji re, haath le laai talwar,
Lungra ne sigla palno,
Durga ho gayi aswaar.
Kaise sumru Devi Jalpa ho maa.
Verse 5:
Kaun varan mai Durga re, kahe pe aswaar,
Kaun varan Mahishasur,
Kahe pe aswaar.
Kaise sumru Devi Jalpa ho maa.
Verse 6:
Lal varan mai Durga re, singhla pe aswaar,
Kaalo varan Mahishasur,
Bhaisa pe aswaar.
Kaise sumru Devi Jalpa ho maa.
Chorus:
Tu meri Aadi Bhavani, rakh laiiyo meri laaj,
Beggi Ram jas gaave,
Maiya tero darbaar.
Kaise sumru Devi Jalpa ho maa.
Explanation and Proper Reference (व्याख्या और संदर्भ)
यह एक कथात्मक और अत्यंत शक्तिशाली देवी जस गीत है, जिसमें महिषासुर मर्दिनी (Mahishasura Mardini) की पूरी पौराणिक कथा को बहुत ही सरल लोक-भाषा में पिरोया गया है।
- The Context (प्रसंग): इस जस गीत में ‘जालपा माता’ (माता दुर्गा का ही एक प्रसिद्ध शक्ति स्वरूप, जिनका मध्य प्रदेश आदि में बड़ा प्रभाव है) का स्मरण किया जा रहा है। गीत में उस समय का वर्णन है जब महिषासुर नामक राक्षस ने तीनों लोकों (धरती और इंद्रासन) पर कब्ज़ा कर लिया था और ब्रह्मा, विष्णु, महेश सहित सभी देवता उसके आगे हार मान चुके थे।
- The Central Theme (मूल भाव): यह गीत ‘बुराई पर अच्छाई की जीत’ और ‘मातृ शक्ति की सर्वोच्चता’ का प्रतीक है। जब सभी देवता लाचार होकर माता की शरण में जाते हैं, तब आदि भवानी (Durga) गरजते हुए अपने वाहन सिंह (शेर) पर सवार होकर महिषासुर का वध करने जाती हैं। गीत में माता के लाल तेज (लाल वरण) और राक्षस के काले स्वरूप (कारो वरण) का बहुत ही सुंदर प्रतीकात्मक वर्णन किया गया है।
How and When to Sing (सही समय और गाने की विधि)
यह जस गीत वीर रस (Heroic tone) से भरा हुआ है, इसलिए इसे गाते समय गायकों और श्रोताओं दोनों के भीतर एक अद्भुत ऊर्जा का संचार होता है।
Proper Time (सही समय):
- Best Occasions: यह गीत विशेष रूप से चैत्र और शारदीय नवरात्रि की अष्टमी और नवमी के दिन, देवी जवारा विसर्जन (Jawara Visarjan) के समय, और रात्रिकालीन जगरातों (Jagran) में प्रमुखता से गाया जाता है।
Proper Method (सही विधि):
- Musical Instruments (वाद्ययंत्र): इसे ढोलक (Dholak), नगाड़े, मंजीरे और टिमकी की अत्यंत तेज़ थाप पर गाया जाता है। जब महिषासुर के युद्ध का प्रसंग आता है, तो वादक ढोलक की लय को और भी तेज़ कर देते हैं।
- Singing Style (गायन शैली): यह कथा गायन (Storytelling) शैली का गीत है। जस-गायक इसे बहुत ही ऊंचे और जोशीले स्वर में गाते हैं। जब पंक्ति “लाल वरण मई दुर्गा रे, सिंघला पे असवार” आती है, तो पूरा पांडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठता है।
- Mindset: इसे गाते समय हृदय में माता की सर्वोच्च शक्ति के प्रति पूर्ण विश्वास और श्रद्धा होनी चाहिए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: जस गीत में ‘जालपा माता’ (Jalpa Maa) कौन हैं?
A: जालपा माता, माँ दुर्गा/भवानी का ही एक स्वरूप हैं। मध्य प्रदेश (जैसे राजगढ़ ज़िले में जीरापुर) और भारत-नेपाल के कई क्षेत्रों में जालपा माता के अत्यंत सिद्ध और प्राचीन मंदिर हैं। लोकगीतों में अक्सर दुर्गा जी को जालपा माता के नाम से पुकारा जाता है।
Q2: इस गीत में “लाल वरण” और “कारो वरण” का क्या अर्थ है?
A: ‘वरण’ का अर्थ है रंग या रूप (Complexion/Aura)।
लाल वरण: माता दुर्गा को लाल रंग (क्रोध, शक्ति, ऊर्जा और जीवन का प्रतीक) में सिंह पर सवार बताया गया है।
कारो वरण (काला वरण): महिषासुर को काले रंग (अज्ञानता, अंधकार, अहंकार और मृत्यु का प्रतीक) में भैंसे (Buffalo) पर सवार बताया गया है। यह प्रकाश और अंधकार के बीच के युद्ध का सीधा लोक-वर्णन है।
Q3: “जोत कला वो सब हारी” पंक्ति का क्या मतलब है?
A: इसका अर्थ है कि जब महिषासुर का आतंक बढ़ा, तो ब्रह्मा, विष्णु, शिव और सभी देवी-देवताओं की शक्तियां और अस्त्र (जोत और कला) उसके सामने काम नहीं आए और वे हार गए। जिसके बाद उन्हें आदि शक्ति दुर्गा का आह्वान करना पड़ा।
Q4: गीत के अंत में ‘बेगीराम’ कौन है?
A: लोकगीतों के अंत में अक्सर उस रचनाकार या गायक का नाम होता है जिसने उस गीत को लिखा या लोक-प्रसिद्ध किया। यहाँ ‘बेगीराम’ उस जस गायक या भक्त का नाम है जो माता के दरबार में यह गीत (जस) गाकर अपनी लाज रखने की प्रार्थना कर रहा है।
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