मैया देव दर्शन देवी जालपा हो माँ Maiya Dev Darshan Devi Jalpa Ho Maa Jas Lyrics

।। (मैया) देव दर्शन देवी जालपा हो माँ ।।
Maiya Dev Darshan Devi Jalpa Ho Maa Jas Lyrics

।। (मैया) देव दर्शन देवी जालपा हो माँ ।।

।। (मैया) देव दर्शन देवी जालपा हो माँ ।।
नित अंधियारी कोठरी रे, जहां दिवला न बात,
बइया पकड़ यम ले गवो, कोई संग न साथ ।। देव दर्शन ।।

काहे न को दिवला करू, काहे न करू बात ,
काहे को अरक़ जलाऊ, दिया जलेसारी रात ।। देव दर्शन ।।

तन माँ को दिवला करू, मन की करू बात,
आशा को अरक़ जलाऊ, दिया जले सारी रात ।। देव दर्शन ।।

जय जय जय जगदम्बे, रख लईयो मेरी लाज ,
बेगीराम जस गावे, मैया तेरे दरबार ।। देव दर्शन ।.

Maiya Dev Darshan Devi Jalpa Ho Maa Jas Lyrics
Maiya Dev Darshan Devi Jalpa Ho Maa Jas Lyrics

Maiya Dev Darshan Devi Jalpa Ho Maa Jas Lyrics

।। (Maiya) Dev Darshan Devi Jalpa ho maa ।।

Nit andhiyaari kothri re, jahan divla na baat,
Baiya pakad yam le gavo, koi sang na saath
।। Dev darshan ।।

Kahe na ko divla karu, kahe na karu baat,
Kahe ko arak jalaau, diya jale saari raat ।
। Dev darshan ।।

Tan maa ko divla karu, man ki karu baat,
Aasha ko arak jalaau, diya jale saari raat
।। Dev darshan ।।

Jai Jai Jai Jagdambe, rakh laiyo meri laaj,
Begiram jas gaave, Maiya tere darbar
।। Dev darshan ।।

यह पद्यांश एक भक्ति गीत/कविता है जिसमें भक्त अपनी माँ देवी जालपा से प्रार्थना कर रहा है। इसमें अंधियारी कोठरी, दीपक, अरक़ (पूजा का जल अर्पण) और यमराज का उल्लेख प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं—

✨ पद्य का भावार्थ और विवरण

1. मैया देव दर्शन देवी जालपा हो माँ

  • भक्त माँ जालपा देवी से दर्शन की प्रार्थना करता है।
  • यह पंक्ति श्रद्धा और भक्ति का उद्घोष है।

2. नित अंधियारी कोठरी रे, जहां दिवला न बात, बइया पकड़ यम ले गवो, कोई संग न साथ

  • अर्थ: जीवन की कोठरी अंधकारमय है, जहाँ दीपक नहीं जलता।
  • मृत्यु के समय यमराज हाथ पकड़कर ले जाते हैं और कोई साथ नहीं होता।
  • भावार्थ: संसार अस्थायी है, मृत्यु निश्चित है। केवल देवी की शरण ही सच्चा सहारा है।

3. काहे न को दिवला करू, काहे न करू बात, काहे को अरक़ जलाऊ, दिया जले सारी रात

  • अर्थ: क्यों न दीपक जलाऊँ, क्यों न देवी से बात करूँ, क्यों न अरक़ (जल) अर्पित करूँ ताकि दीपक पूरी रात जलता रहे।
  • भावार्थ: भक्त अपने जीवन को देवी की भक्ति से आलोकित करना चाहता है।

4. तन माँ को दिवला करू, मन की करू बात, आशा को अरक़ जलाऊ, दिया जले सारी रात

  • अर्थ: शरीर को दीपक बनाऊँ, मन की बात माँ से कहूँ, आशा को जल अर्पित करूँ ताकि दीपक रातभर जलता रहे।
  • भावार्थ: भक्त अपने तन-मन को देवी की भक्ति में समर्पित करता है।

5. जय जय जय जगदम्बे, रख लईयो मेरी लाज, बेगीराम जस गावे, मैया तेरे दरबार

  • अर्थ: हे जगदम्बे! मेरी लाज रखो। भक्त तुम्हारे दरबार में गाता है।
  • भावार्थ: देवी से रक्षा और कृपा की याचना।

🌸 समग्र अर्थ

यह पद्य भक्त की आत्मसमर्पण भावना को व्यक्त करता है।

  • जीवन अंधकारमय है, मृत्यु निश्चित है।
  • केवल देवी की भक्ति ही जीवन को प्रकाशमान करती है।
  • तन-मन-आशा सब देवी को अर्पित कर देने से जीवन सार्थक होता है।
  • अंत में भक्त माँ से अपनी लाज रखने और कृपा करने की प्रार्थना करता है।

📌उपयोगी बिंदु

  • मुख्य विषय: देवी भक्ति और आत्मसमर्पण
  • प्रतीक: दीपक = जीवन, अरक़ = आशा, अंधियारी कोठरी = संसार, यमराज = मृत्यु
  • भावार्थ: देवी ही जीवन का सच्चा सहारा हैं
  • संदेश: तन-मन से देवी की भक्ति करने पर जीवन आलोकित होता है

लोकप्रिय 50 देवी जस लीरिक्स : 50 Devi Jas Geet Lyrics in Hindi-Part 1

अन्य देवी गीत हेतु visit करें : देवी जस गीत

Leave a Comment

WhatsApp Channel Join Now
Telegram Channel Join Now