सत्यम शिवम सुंदरम
Satyam Shivam Sundaram Lyrics with Karaoke
भारतीय दर्शन और अध्यात्म के मूल मंत्र “Satyam Shivam Sundaram” (सत्यम शिवम सुन्दरम) का संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth), ऐतिहासिक उत्पत्ति (Origin), गायन व श्रवण का सही समय (Practices Time) और दार्शनिक महत्व (Importance) अत्यंत विस्तार से जानें। यह गीत केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता और विश्व-बंधुत्व का संदेश है। संपूर्ण जानकारी, नियम और FAQs के लिए यह विस्तृत लेख पढ़ें।
सत्यम शिवम सुंदरम
| इश्वर सत्य है सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है जागो उठ कर देखो जीवन ज्योत उजागर है सत्यम शिवम सुन्दरम – २ इश्वर सत्य है सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है सत्यम शिवम सुन्दरम – २ राम अवध में काशी में शिव कांहा व्ऱिन्दवन में दया करो प्रभू देखूँ इन को – २ हर घर के आँगन में राधा मोहन शरणम सत्यम शिवम सुन्दरम – २ एक सूर्या है एक गगन है एक ही धरती माता दया करो प्रभू एक बनें सब सब का एक से नाता राधा मोहन शरणम सत्यम शिवम सुन्दरम – २ |
Satyam Shivam Sundaram Lyrics with Karaoke
ishvar satya hai
satya hii shiv hai
shiv hii sundar hai
jaago uTh kar dekho
jiivan jyot ujaagar hai
satyam shivam sundaram – 2
ishvar satya hai
satya hii shiv hai
shiv hii sundar hai
satyam shivam sundaram – 2
raam avadh me.n kaashii me.n shiv kaa.nhaa vRindavan me.n
dayaa karo prabhuu dekhuu.N in ko – 2
har ghar ke aa.Ngan me.n
raadhaa mohan sharaNam
satyam shivam sundaram – 2
ek suuryaa hai ek gagan hai ek hii dharatii maataa
dayaa karo prabhuu ek bane.n sab
sab kaa ek se naataa
raadhaa mohan sharaNam
satyam shivam sundaram – 2
“सत्यम शिवम सुंदरम” गीत का संगीत, गायक और लेखक
“सत्यम शिवम सुंदरम” भारतीय सिनेमा का एक प्रतिष्ठित गीत है, जिसे राज कपूर द्वारा निर्देशित फिल्म “सत्यम शिवम सुंदरम” (1978) में प्रस्तुत किया गया था। यह गीत अपने उच्चतम संगीत और गहन संदेश के कारण लोगों के दिलों में अपनी विशेष जगह रखता है।
गायक:
इस गीत को लता मंगेशकर ने अपनी मधुर और आत्मीय आवाज़ में गाया है। लता मंगेशकर की आवाज़ ने इस गीत को अमर बना दिया, और उनकी गायकी ने इसे एक आध्यात्मिक ऊंचाई दी।
संगीतकार:
इस गाने का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने दिया था। लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल भारतीय फिल्म संगीत के महान संगीतकारों में से एक हैं, जिन्होंने इस गीत में संगीत के माध्यम से भक्ति और सौंदर्य का अद्भुत मेल प्रस्तुत किया।
गीतकार:
इस गीत के शब्द लिखे हैं पंडित नरेंद्र शर्मा ने। उनके द्वारा लिखे गए इस गीत के बोलों में गहनता और आध्यात्मिकता का समावेश है, जो “सत्यम (सत्य), शिवम (शिव), सुंदरम (सौंदर्य)” के सार को दर्शाता है।
गीत की थीम:
“सत्यम शिवम सुंदरम” गीत सत्य, शिव (शुद्धता) और सुंदरता के सिद्धांतों को उजागर करता है। इस गीत के बोल हमें यह सिखाते हैं कि सच्चाई, ईश्वरत्व और सौंदर्य हमारे जीवन के प्रमुख आधार होने चाहिए।
यह गीत भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अमर गीत बन चुका है, जिसे आज भी श्रोताओं द्वारा उतने ही आदर और प्रेम से सुना जाता है।
सत्यम शिवम सुन्दरम (Satyam Shivam Sundaram) – संपूर्ण विवरण, इतिहास और दार्शनिक महिमा
सनातन हिंदू धर्म, उपनिषदों और भारतीय दर्शन का सबसे गहरा और अटल सत्य तीन शब्दों में समाहित है— ‘सत्यम, शिवम, सुन्दरम’ (Satyam, Shivam, Sundaram)। यह कोई साधारण वाक्य या केवल एक गीत का मुखड़ा नहीं है; यह उस परम सत्ता (ईश्वर) की संपूर्ण व्याख्या है। प्रस्तुत पंक्तियाँ इसी वैदिक दर्शन को अत्यंत ही सरल, मधुर और काव्यात्मक रूप में प्रस्तुत करती हैं। इस गीत में केवल ईश्वर की स्तुति ही नहीं है, बल्कि इसमें राष्ट्रीय एकता (राम, शिव और कृष्ण के माध्यम से) और वैश्विक बंधुत्व (एक सूर्य, एक धरती) का बहुत ही शक्तिशाली संदेश छिपा हुआ है।
इस अत्यंत विस्तृत, दार्शनिक और ज्ञानवर्धक लेख में हम परम पावन और मानवतावादी स्तुति Satyam Shivam Sundaram का संपूर्ण पाठ, इसकी साहित्यिक व लोक-परंपरागत उत्पत्ति (Origin), गहरा दार्शनिक और आध्यात्मिक भावार्थ (Bhavarth), इसके गान और श्रवण करने की सही विधि व समय (Practices Time), इसका आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक व लौकिक महत्व (Importance) और इससे जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) प्रस्तुत कर रहे हैं। यह लेख अध्यात्म और संगीत प्रेमियों के लिए एक अनमोल निधि है।
सत्यम शिवम सुन्दरम (Satyam Shivam Sundaram) – संपूर्ण गीत / वंदना पाठ
आइए, सबसे पहले ईश्वर के निराकार और साकार, दोनों रूपों की वंदना करने वाले इस अत्यंत भावपूर्ण, दार्शनिक और अलौकिक गीत के मूल बोल (Lyrics) का पूरे भक्ति, श्रद्धा और समर्पण भाव से पाठ करें:
इश्वर सत्य है सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है जागो उठ कर देखो जीवन ज्योत उजागर है सत्यम शिवम सुन्दरम – २
इश्वर सत्य है सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है सत्यम शिवम सुन्दरम – २
राम अवध में काशी में शिव कांहा व्ऱिन्दवन में दया करो प्रभू देखूँ इन को – २ हर घर के आँगन में राधा मोहन शरणम सत्यम शिवम सुन्दरम – २
एक सूर्या है एक गगन है एक ही धरती माता दया करो प्रभू एक बनें सब सब का एक से नाता राधा मोहन शरणम सत्यम शिवम सुन्दरम – २
गीत का विस्तृत विवरण (Description of Satyam Shivam Sundaram)
Description of Satyam Shivam Sundaram को समझना वास्तव में भारतीय संस्कृति की आत्मा को समझना है। यह गीत तीन मुख्य स्तंभों पर खड़ा है: सत्य (Truth), कल्याण (Auspiciousness/Goodness), और सौंदर्य (Beauty)।
- सत्यम (Satyam): सत्य वह है जो कभी नहीं बदलता। भूत, वर्तमान और भविष्य—तीनों कालों में जो स्थिर रहे, वही सत्य है और वह सत्य केवल ‘ईश्वर’ है।
- शिवम (Shivam): शिव का अर्थ है ‘कल्याणकारी’ (Auspicious)। जो सत्य है, वह कठोर नहीं बल्कि सबका कल्याण करने वाला होना चाहिए।
- सुन्दरम (Sundaram): और जो सत्य है, जो सबका कल्याण करता है, वही इस ब्रह्मांड में सबसे ‘सुंदर’ (Beautiful) है। शारीरिक सुंदरता नष्ट हो जाती है, लेकिन सत्य और शिव की सुंदरता शाश्वत (Eternal) है।
इस गीत की भाषा बहुत ही सरल, सुबोध और आम जनमानस की हिंदी है। इसमें भारत की भौगोलिक और आध्यात्मिक एकता का बहुत ही सुंदर चित्रण (Description) किया गया है। अयोध्या के राम, काशी के शिव और वृंदावन के कृष्ण—तीनों को एक ही परम सत्ता का रूप बताया गया है। गीत का अंतिम भाग ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (संपूर्ण विश्व एक परिवार है) की भावना को चरितार्थ करता है, जहाँ एक सूर्य, एक आसमान और एक धरती के माध्यम से सभी मनुष्यों को एक होने का संदेश दिया गया है।
उत्पत्ति और इतिहास (Origin of Satyam Shivam Sundaram)
Origin of Satyam Shivam Sundaram की ऐतिहासिक, साहित्यिक और सिनेमाई पृष्ठभूमि बहुत ही समृद्ध और दिलचस्प है।
- वैदिक और उपनिषदिक मूल (Vedic Roots): “सत्यम शिवम सुन्दरम” वाक्यांश की उत्पत्ति प्राचीन भारतीय उपनिषदों और अद्वैत वेदांत दर्शन से हुई है। यह ब्रह्म (ईश्वर) के स्वरूप को परिभाषित करने का सबसे प्राचीन सूत्र है।
- साहित्यिक और सिनेमाई रचना (Cinematic Origin): आधुनिक काल में इन विशिष्ट पंक्तियों (जो ऊपर दी गई हैं) की रचना महान कवि और गीतकार पंडित नरेंद्र शर्मा (Pt. Narendra Sharma) जी ने की थी। इसे वर्ष 1978 में प्रदर्शित हुई प्रसिद्ध बॉलीवुड फिल्म ‘सत्यम शिवम सुन्दरम’ (निर्माता-निर्देशक: राज कपूर) के मुख्य शीर्षक गीत (Title Track) के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
- संगीतमय अवतरण: इस कालजयी गीत को महान संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने संगीतबद्ध किया था और इसे ‘स्वर कोकिला’ लता मंगेशकर जी ने अपनी दिव्य और अलौकिक आवाज़ में गाया था।
- सांस्कृतिक प्रभाव: रिलीज़ होने के बाद यह केवल एक फिल्मी गीत नहीं रहा, बल्कि यह भारत के हर स्कूल की प्रार्थना, हर मंदिर का भजन और हर आध्यात्मिक सभा का अनिवार्य हिस्सा बन गया। आज भी यह गीत भारतीय संस्कृति का वैश्विक प्रतिनिधित्व करता है।
संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth of Satyam Shivam Sundaram)
यह वंदना मानव जीवन को सत्य और प्रेम की ओर ले जाने वाला एक मार्गदर्शक प्रकाश है। आइए, Bhavarth of Satyam Shivam Sundaram का एक-एक पद, शब्द और उसके पीछे छिपे दार्शनिक रहस्यों का अत्यंत विस्तृत और गहरा विश्लेषण करें:
पद 1 का भावार्थ
इश्वर सत्य है, सत्य ही शिव है, शिव ही सुन्दर है जागो उठ कर देखो, जीवन ज्योत उजागर है सत्यम शिवम सुन्दरम – २
भावार्थ (Meaning): हे मनुष्य! इस ब्रह्मांड का सबसे बड़ा और अंतिम रहस्य यह है कि परमपिता परमेश्वर ही एकमात्र ‘सत्य’ (Absolute Truth) है। यह संसार नश्वर है, लेकिन ईश्वर शाश्वत है। जो सत्य है, वही ‘शिव’ है, अर्थात् वही संपूर्ण जगत का कल्याण करने वाला है। और जो परम सत्य है और सबका कल्याण करता है, वही इस पूरे ब्रह्मांड में सबसे अधिक ‘सुंदर’ है। कवि मनुष्य की चेतना को झकझोरते हुए कहता है, “जागो! अज्ञान की नींद से उठकर देखो!” तुम्हारे भीतर और इस पूरी सृष्टि में उसी ईश्वर की ‘जीवन ज्योति’ (Life Force / Divine Light) उजागर हो रही है (चमक रही है)। उस परम प्रकाश को पहचानो, जो सत्यम, शिवम और सुन्दरम है।
पद 2 का भावार्थ
राम अवध में काशी में शिव कांहा व्ऱिन्दवन में दया करो प्रभू देखूँ इन को – २ हर घर के आँगन में राधा मोहन शरणम, सत्यम शिवम सुन्दरम – २
भावार्थ (Meaning): यह पद भारत की आध्यात्मिक और भौगोलिक एकता (Spiritual Integration) का सबसे सुंदर उदाहरण है। कवि कहता है कि भगवान राम अवध (अयोध्या) में बसते हैं, भगवान शिव का निवास पावन नगरी काशी (वाराणसी) में है, और मेरे प्यारे कान्हा (श्री कृष्ण) वृंदावन में रास रचाते हैं। यद्यपि ये स्वरूप और स्थान अलग-अलग हैं, लेकिन वास्तव में ये सब उसी एक परम सत्ता के रूप हैं। भक्त ईश्वर से प्रार्थना (दया की भीख) करता है कि हे प्रभु! मुझ पर ऐसी कृपा करो कि मुझे आपके दर्शन केवल मंदिरों, अयोध्या, काशी या वृंदावन में ही न हों, बल्कि मैं आपके इस दिव्य स्वरूप (सत्य, प्रेम और करुणा) को इस संसार के “हर घर के आँगन में” देख सकूँ। अर्थात्, हर मनुष्य के भीतर मुझे ईश्वर का दर्शन हो। मैं राधा-मोहन (राधा और कृष्ण) की शरण में हूँ, जो सत्यम शिवम सुन्दरम हैं।
पद 3 का भावार्थ (वैश्विक बंधुत्व का संदेश)
एक सूर्या है एक गगन है एक ही धरती माता दया करो प्रभू एक बनें सब, सब का एक से नाता राधा मोहन शरणम, सत्यम शिवम सुन्दरम – २
भावार्थ (Meaning): यह अंतिम पद उपनिषदों के ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (The world is one family) के सिद्धांत की परम व्याख्या है। कवि प्रकृति का उदाहरण देते हुए कहता है कि जब पूरी दुनिया को रोशनी देने वाला ‘सूर्य’ एक है, हम सबके ऊपर मौजूद यह विशाल ‘गगन’ (आसमान) एक है, और हम सबका पालन-पोषण करने वाली यह ‘धरती माता’ भी एक ही है (प्रकृति हममें कोई भेदभाव नहीं करती)। तो फिर हे प्रभु! हम मनुष्यों ने आपस में जाति, धर्म, रंग और देशों की दीवारें क्यों खड़ी कर ली हैं? मुझ पर और संपूर्ण मानवता पर ऐसी दया करो कि हम सब मनुष्य आपस में मिल-जुलकर ‘एक’ बन जाएं। हम सब यह समझ लें कि हम सभी का नाता (रिश्ता) उसी ‘एक’ परमपिता परमेश्वर से है। हम सभी आपस में भाई-भाई हैं। मैं ऐसे राधा-मोहन की शरण में हूँ जो सत्यम, शिवम और सुन्दरम का साक्षात रूप हैं।
गायन और श्रवण का सही समय (Practices Time of Satyam Shivam Sundaram)
यह गीत किसी एक विशेष कर्मकांड या पूजा-पद्धति से नहीं बंधा है, यह आत्मा की पुकार है। फिर भी, मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा को चरम पर ले जाने के लिए Practices Time of Satyam Shivam Sundaram के कुछ विशेष नियम और समय इस प्रकार हैं:
1. प्रातःकाल और ब्रह्म मुहूर्त (Morning & Brahma Muhurta)
सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्म मुहूर्त) या प्रातःकाल योग, ध्यान (Meditation) और प्राणायाम करते समय इस गीत का श्रवण करना मस्तिष्क को असीम शांति प्रदान करता है। गीत के बोल “जागो उठ कर देखो, जीवन ज्योत उजागर है” प्रातःकाल की ताज़गी और आध्यात्मिक जागृति के लिए एकदम सटीक हैं।
2. प्रार्थना सभाएं (School Assemblies & Prayer Meetings)
यह गीत भारत के हज़ारों विद्यालयों की प्रार्थना सभाओं का हिस्सा है। बच्चों को बचपन से ही एकता, समानता और सत्य का पाठ पढ़ाने के लिए इसे सामूहिक रूप से गाना सबसे उत्तम (Best Practices Time) है।
3. निराशा और तनाव के समय (Times of Distress and Conflict)
जब भी मन में समाज की बुराइयों, भेदभाव या व्यक्तिगत जीवन में भारी तनाव (Anxiety) और निराशा हो, तब एकांत में बैठकर इस गीत को सुनने से हृदय में सकारात्मक ऊर्जा (Positive Energy) का संचार होता है। यह गीत मनुष्य को शांति और प्रेम की ओर वापस लाता है।
4. ध्यान और योग साधना (Yoga & Meditation)
चूंकि यह गीत सीधे ईश्वर के निराकार और शाश्वत स्वरूप से जुड़ता है, इसलिए त्राटक (Tratak) या गहरे ध्यान की अवस्था में प्रवेश करने के लिए इसे पृष्ठभूमि (Background) में हल्की आवाज़ में बजाया जा सकता है।
धार्मिक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक महत्व (Importance of Satyam Shivam Sundaram)
सनातन दर्शन में Importance of Satyam Shivam Sundaram का कोई पार नहीं है। यह गीत मनुष्य के लौकिक (Material) और आध्यात्मिक (Spiritual) दोनों ही पहलुओं पर गहरा मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालता है:
1. अद्वैत दर्शन और समानता का बोध (Realization of Non-Duality)
हम अक्सर राम, शिव और कृष्ण को अलग-अलग मानकर विवाद करते हैं। यह गीत (राम अवध में, काशी में शिव…) हमें सिखाता है कि सत्य एक ही है, जिसे ज्ञानी लोग अलग-अलग नामों से पुकारते हैं (‘एकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति’). यह विचार धार्मिक कट्टरता और सांप्रदायिकता को जड़ से नष्ट कर देता है और सर्वधर्म समभाव की भावना पैदा करता है।
2. वसुधैव कुटुम्बकम और विश्व शांति (Global Peace and Brotherhood)
तीसरा पद (एक सूर्या है एक गगन है) आज के युद्ध, नफरत और सीमाओं में बंटे विश्व के लिए सबसे बड़ी औषधि है। यह मनोवैज्ञानिक रूप से मनुष्य को यह अहसास कराता है कि जब प्रकृति हममें भेदभाव नहीं करती, तो हमें भी एक-दूसरे से घृणा नहीं करनी चाहिए। यह ‘ग्लोबल सिटिजन’ (Global Citizen) की वैदिक अवधारणा है।
3. बाहरी नहीं, भीतरी सौंदर्य की पहचान (True Meaning of Beauty)
आज का समाज केवल शारीरिक और भौतिक सौंदर्य (Physical Beauty) के पीछे भाग रहा है, जो नश्वर है। यह गीत स्पष्ट करता है कि वास्तविक ‘सुन्दरम’ (Beauty) वही है जिसमें ‘सत्य’ और ‘शिव’ (कल्याण की भावना) हो। जो सत्य नहीं है और जो दूसरों का कल्याण नहीं करता, वह कभी सुंदर नहीं हो सकता। यह मनोविज्ञान व्यक्ति को चारित्रिक रूप से मजबूत और सुंदर बनाता है।
4. ईश्वर का सर्वव्यापी होना (Omnipresence of the Divine)
ईश्वर केवल मंदिरों या तीर्थों में नहीं है। “हर घर के आँगन में” देखने की प्रार्थना यह सिद्ध करती है कि मानव सेवा ही माधव सेवा है। यदि हम अपने आस-पास के लोगों में ईश्वर का रूप देखने लगें, तो समाज के सभी अपराध और दुख स्वतः ही समाप्त हो जाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs about Satyam Shivam Sundaram)
भारत की सांस्कृतिक पहचान बन चुके इस गीत से जुड़े कई प्रश्न लोगों के मन में उठते हैं। यहाँ Satyam Shivam Sundaram से जुड़े कुछ सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों (FAQs) के विस्तृत उत्तर दिए गए हैं:
प्रश्न 1: “सत्यम शिवम सुन्दरम” का शाब्दिक और दार्शनिक अर्थ क्या है?
उत्तर: शाब्दिक रूप से— सत्यम (Truth), शिवम (Goodness/Auspiciousness), सुन्दरम (Beauty)। दार्शनिक रूप से यह बताता है कि ईश्वर ही एकमात्र सत्य है, वह सत्य अत्यंत कल्याणकारी है, और जो परम सत्य और कल्याणकारी है, वही इस ब्रह्मांड में सबसे सुंदर है। यह ब्रह्म की पूर्ण व्याख्या है।
प्रश्न 2: इन विशिष्ट पंक्तियों (गीत) की रचना किसने की थी?
उत्तर: इन कालजयी पंक्तियों की रचना महान साहित्यकार और कवि पंडित नरेंद्र शर्मा जी ने की थी। इसे राज कपूर द्वारा निर्देशित 1978 की हिंदी फिल्म ‘सत्यम शिवम सुन्दरम’ में इस्तेमाल किया गया था। इस गीत को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज़ दी थी।
प्रश्न 3: गीत में “जागो उठ कर देखो, जीवन ज्योत उजागर है” का क्या आशय है?
उत्तर: यहाँ ‘जागने’ से तात्पर्य केवल नींद से उठना नहीं है, बल्कि ‘आध्यात्मिक जागृति’ (Spiritual Awakening) से है। कवि कह रहा है कि अज्ञानता और मोह-माया की नींद से बाहर आओ और देखो कि तुम्हारे भीतर और इस पूरी सृष्टि में ईश्वर की चैतन्य रूपी ज्योति (परम प्रकाश) निरंतर चमक रही है।
प्रश्न 4: राम, शिव और कृष्ण का एक ही गीत में उल्लेख क्यों किया गया है?
उत्तर: यह भारत की आध्यात्मिक एकता को दर्शाने के लिए किया गया है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों (अवध, काशी, वृंदावन) में ईश्वर के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। कवि ने इन तीनों का उल्लेख करके यह स्पष्ट किया है कि ये तीनों रूप अलग नहीं हैं, बल्कि उसी एक ‘सत्यम शिवम सुन्दरम’ (परमेश्वर) के ही विभिन्न अवतार हैं।
प्रश्न 5: “एक बनें सब, सब का एक से नाता” से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
उत्तर: कवि संपूर्ण मानव जाति को यह संदेश देना चाहता है कि जब हमारी धरती, आसमान और सूरज एक हैं, तो हम मनुष्यों ने आपस में जाति, धर्म और देशों की दीवारें क्यों बना ली हैं? चूँकि हम सभी को उसी ‘एक’ परमपिता परमेश्वर ने बनाया है, इसलिए हम सभी को नफरत भुलाकर ‘एक’ परिवार की तरह रहना चाहिए।
प्रश्न 6: क्या इस गीत को किसी भी धर्म का व्यक्ति गा सकता है?
उत्तर: हाँ, बिल्कुल! यद्यपि इसमें राम, शिव और कृष्ण के नाम हैं, लेकिन इस गीत का मूल संदेश (एक सूर्य, एक गगन, एक धरती) पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष और सार्वभौमिक (Universal) है। यह संपूर्ण मानवता का गीत है जिसे विश्व शांति और एकता की कामना रखने वाला कोई भी व्यक्ति गा सकता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
Satyam Shivam Sundaram मात्र एक फिल्मी गीत या साधारण प्रार्थना नहीं है, बल्कि यह ऋग्वेद से लेकर उपनिषदों तक के उस महान ज्ञान का सबसे मीठा और संगीतमय निचोड़ है जो भारत ने विश्व को दिया है। इसका एक-एक शब्द सत्य के दर्शन (Description) से भरा है, इसका दार्शनिक भावार्थ (Bhavarth) समाज को जोड़ने का कार्य करता है, और इसकी उत्पत्ति (Origin) आधुनिक कला और प्राचीन दर्शन का सर्वश्रेष्ठ संगम है।
जब भी आप जीवन में भटकाव, नफरत या मानसिक अशांति महसूस करें, तो उचित समय (Practices Time) पर आंखें बंद करके इस गीत का श्रवण करें। यह आपको याद दिलाएगा कि आप कोई साधारण शरीर नहीं, बल्कि उसी परम सत्ता का अंश हैं। इस गीत का संदेश (Importance) यदि हर मनुष्य अपने जीवन में उतार ले, तो यह धरती ही स्वर्ग बन जाएगी, जहाँ हर घर के आँगन में सत्य, कल्याण और सौंदर्य का वास होगा।
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