Sawan Mein Tarse Mora Jiya Lyrics : सावन मास में महिलाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय और ‘महिला संगीत’ (Mahila Sangeet) की शान माने जाने वाले मनमोहक शिव भजन “Sawan Mein Tarse Mora Jiya” का संपूर्ण भावार्थ, उत्पत्ति , गायन का अवसर और सांस्कृतिक महत्व विस्तार से जानें।
Sawan Mein Tarse Mora Jiya Lyrics
सावन में तरसे मोरा जिया मोरा जिया
| सावन में तरसे मोरा जिया,मोरा जिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। सावन में तरसे मोरा जिया,मोरा जिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। भोले हमारे चंदा के दीवाने। जटा में अपनी गंगा के दीवाने। गंगा स्नान करा दे पिया, करा दे पिया, भोला के दर्शन करा दे पिया। सावन में तरसे मोरा जिया,मोरा जिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। भोले हमारे बिच्छू के दीवाने। गले में अपने नागों के दीवाने। डम डम डमरू बजा दे पिया, बजा दे पिया, डमरू के धुन पर नचा दे पिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। सावन में तरसे मोरा जिया,मोरा जिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। भोला हमारे भंगिया के दीवाने। भस्मी भबूती बाघंबर के दीवाने। थोड़ी सी भंगिया पिला दे पिया, पिया ले पिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। सावन में तरसे मोरा जिया,मोरा जिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। भोला हमारे गोरा के दीवाने। गोदी में बैठे गणपत के दीवाने। गोरा के दर्शन करा दे पिया, करा दे पिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। सावन में तरसे मोरा जिया,मोरा जिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। सावन में तरसे मोरा जिया,मोरा जिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। सावन में तरसे मोरा जिया,मोरा जिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। सावन में तरसे मोरा जिया,मोरा जिया। भोला के दर्शन करा दे पिया। |
सावन में तरसे मोरा जिया (Sawan Mein Tarse Mora Jiya) – संपूर्ण विवरण, इतिहास और महिला संगीत महिमा
सनातन हिंदू धर्म में श्रावण (सावन) का महीना केवल व्रत और उपवास का ही नहीं, बल्कि उल्लास, हरियाली और लोक-संगीत का भी महीना है। उत्तर भारत की लोक-परंपरा में सावन के गीत और ‘महिला संगीत’ (Mahila Sangeet) का विशेष महत्व है। “Sawan Mein Tarse Mora Jiya, Bhola Ke Darshan Kara De Piya” एक ऐसा ही अत्यंत सुमधुर, चुलबुला और भक्तिरस से भरा पारंपरिक लोक-भजन है, जिसे विशेष रूप से महिलाओं के कीर्तन और उत्सवों के लिए रचा गया है।
इस भजन में दांपत्य प्रेम और ईश्वर भक्ति का बहुत ही सुंदर संगम है। इसमें एक पत्नी अपने पति (पिया) से सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव के दर्शन कराने और तीर्थ यात्रा पर ले जाने की मीठी ज़िद कर रही है। यहाँ हम महिलाओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय इस पावन शिव भजन का संपूर्ण पाठ, इसका गहरा भावार्थ (Bhavarth), इसकी उत्पत्ति (Origin), इसके गायन के विशेष अवसर (Practices Time) और इससे जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) प्रस्तुत कर रहे हैं।
भजन का विस्तृत विवरण और उत्पत्ति (Description and Origin)
Description (विवरण): यह भजन विशुद्ध रूप से एक ‘महिला संगीत’ (Ladies Sangeet) का गीत है। इसकी लय बहुत ही तेज़, झूमने वाली और संगीतमय है। भजन में शिव जी के वैरागी और गृहस्थ—दोनों स्वरूपों का बहुत ही प्यारा वर्णन किया गया है। गीत की नायिका (भक्त पत्नी) अपने पति को शिव जी की पसंद (चंदा, गंगा, सांप, बिच्छू, भांग, गोरा और गणपति) के बारे में बताती है और उन्हीं के बहाने अपनी भी मुरादें (गंगा स्नान करना, डमरू की धुन पर नाचना) पूरी करवाना चाहती है।
Origin (उत्पत्ति): इस गीत की उत्पत्ति उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और हरियाणा की ग्रामीण ‘महिला मंडल’ (Mahila Mandal) की कीर्तन परंपरा से हुई है। पहले के समय में जब महिलाएं सावन में झूला झूलती थीं या शिव मंदिरों में सामूहिक रूप से एकत्रित होती थीं, तब वे अपनी मनोकामनाओं और पारिवारिक प्रेम को लोक-गीतों के माध्यम से व्यक्त करती थीं। आज यह भजन आधुनिक जागरणों, मेहंदी/हल्दी समारोहों और शिव-पार्वती विवाह उत्सवों की जान बन चुका है।
संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth of Sawan Mein Tarse Mora Jiya)
यह भजन पति-पत्नी के प्रेम और ईश्वरीय श्रद्धा का अनूठा मिश्रण है। आइए, इसका एक-एक पद और शब्द का आनंदमयी विश्लेषण करें:
मुखड़ा का भावार्थ (दर्शन की लालसा)
सावन में तरसे मोरा जिया, मोरा जिया। भोला के दर्शन करा दे पिया।
भावार्थ: एक पत्नी अपने पति से मनुहार करते हुए कहती है— हे मेरे प्रियतम (पिया)! इस पावन सावन के महीने में मेरा मन (जिया) भगवान शिव के दर्शनों के लिए तरस रहा है। कृपया मुझे किसी शिवालय या तीर्थ में ले चलिए और मेरे भोलेनाथ के दर्शन करा दीजिए।
पद 1 का भावार्थ (चंदा और गंगा का वर्णन)
भोले हमारे चंदा के दीवाने। जटा में अपनी गंगा के दीवाने… गंगा स्नान करा दे पिया
भावार्थ: पत्नी शिव जी का गुणगान करते हुए कहती है कि हमारे भोलेनाथ अपने मस्तक पर सजे ‘चंद्रमा’ (चंदा) और जटाओं में बहने वाली ‘गंगा’ से बहुत प्रेम करते हैं (उनके दीवाने हैं)। हे पिया! मुझे भी हरिद्वार या काशी ले चलो और उसी पवित्र गंगा में स्नान करा दो, जिससे मुझे शिव कृपा प्राप्त हो सके।
पद 2 का भावार्थ (अघोर स्वरूप और नृत्य)
भोले हमारे बिच्छू के दीवाने। गले में अपने नागों के दीवाने… डमरू के धुन पर नचा दे पिया
भावार्थ: शिव जी का श्रृंगार दुनिया से अलग है। वे गले में विषैले नाग (सांप) और बिच्छू धारण करते हैं। पत्नी अपने पति से लाड़ में कहती है कि हे पिया, ज़रा तुम भी शिव जी का डमरू ‘डम-डम’ बजाओ ताकि मैं भी शिव-भक्ति की उस आनंदमयी डमरू की धुन पर मगन होकर नाच सकूं।
पद 3 का भावार्थ (वैराग्य और भांग)
भोला हमारे भंगिया के दीवाने। भस्मी भबूती बाघंबर के दीवाने… थोड़ी सी भंगिया पिला दे पिया
भावार्थ: भोलेनाथ को भांग (भंगिया), शरीर पर रमाई जाने वाली राख (भस्मी/भबूती) और वस्त्रों के रूप में शेर की खाल (बाघंबर) बहुत प्रिय हैं। पत्नी हास्य और उल्लास के साथ अपने पति से कहती है कि शिव जी का प्रसाद मानकर थोड़ी सी भांग मुझे भी पिला दो, ताकि मैं भी शिव की मस्ती में डूब जाऊं।
पद 4 का भावार्थ (शिव का परिवार)
भोला हमारे गोरा के दीवाने। गोदी में बैठे गणपत के दीवाने… गोरा के दर्शन करा दे पिया
भावार्थ: अंतिम पद में शिव के गृहस्थ स्वरूप का वर्णन है। शिव जी अपनी अर्धांगिनी माता पार्वती (गोरा) और अपनी गोद में बैठने वाले प्यारे पुत्र भगवान गणेश (गणपत) के दीवाने (अत्यंत प्रेम करने वाले) हैं। पत्नी कहती है कि हे पिया, मुझे शिव जी के साथ-साथ हमारी जगत जननी माता ‘गौरा’ के भी दर्शन करा दो, ताकि हमारा दांपत्य जीवन भी शिव-पार्वती की तरह सुखमय रहे।
महिला संगीत में गायन के विशेष अवसर (Occasions for Mahila Sangeet)
यह गीत विशेष रूप से महिलाओं के उत्सवों के लिए बना है। इसे गाने के प्रमुख अवसर इस प्रकार हैं:
1. सावन के झूले और शिव पूजा (Sawan Festivals)
सावन के महीने में जब महिलाएं हरी चूड़ियाँ पहनकर झूला झूलती हैं या सावन के सोमवार का व्रत रखकर शिव मंदिर में एकत्रित होती हैं, तब ढोलक-मंजीरे पर यह गीत सबसे अधिक गाया जाता है।
2. शिव-पार्वती विवाह (Maha Shivaratri & Vivah Panchami)
महाशिवरात्रि के अवसर पर जब शिव जी की बारात का प्रसंग आता है, तब महिलाएं इस भजन पर झूमकर नृत्य करती हैं।
3. विवाह समारोहों का ‘महिला संगीत’ (Wedding Sangeet / Haldi)
आजकल शादियों में होने वाले ‘लेडीज़ संगीत’ (Ladies Sangeet), हल्दी या मेहंदी की रस्मों में भी इस गीत को बहुत उत्साह से शामिल किया जाता है। यह नव-दंपति को शिव-पार्वती जैसा प्रेमपूर्ण जीवन जीने का आशीर्वाद देने का एक संगीतमय तरीका है।
सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक महत्व (Importance)
Importance of this Bhajan भारतीय पारिवारिक संरचना और मनोविज्ञान को बहुत सुंदरता से दर्शाता है:
- दांपत्य प्रेम की प्रगाढ़ता (Marital Bonding): भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी का साथ तीर्थ यात्रा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह गीत एक पत्नी की उस इच्छा को दर्शाता है जहाँ वह अपने पति के साथ मिलकर आध्यात्मिक शांति और ईश्वर के दर्शन प्राप्त करना चाहती है।
- ईश्वर के साथ उल्लास (Joyful Devotion): यह भजन सिखाता है कि भक्ति केवल रोने या गंभीर होने का नाम नहीं है। ईश्वर की पूजा ताली बजाकर, नृत्य करके (डमरू की धुन पर नचा दे) और पूर्ण उल्लास के साथ भी की जा सकती है।
- लोक-कला का संरक्षण: ग्रामीण परिवेश की बोली (“मोरा जिया”, “पिया”, “गोरा”) हमें हमारी जड़ों (Roots) से जोड़े रखती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: यह भजन ‘महिला संगीत’ (Mahila Sangeet) के लिए इतना उपयुक्त क्यों माना जाता है?
उत्तर: क्योंकि इस भजन की भाषा एक पत्नी और पति के बीच का संवाद है। इसमें एक महिला की स्वाभाविक इच्छाएं (जैसे पति के साथ बाहर जाना, दर्शन करना, नाचना) झलकती हैं। इसकी तेज़ लय (Beat) महिलाओं को ढोलक बजाने और सामूहिक नृत्य (Group Dance) करने के लिए एक उत्तम माहौल प्रदान करती है।
प्रश्न 2: “बाघंबर” शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: ‘बाघ’ का अर्थ होता है शेर या बाघ (Tiger), और ‘अंबर’ का अर्थ होता है वस्त्र (कपड़े)। बाघंबर का अर्थ है बाघ की खाल, जिसे भगवान शिव अपने वस्त्रों और आसन के रूप में धारण करते हैं।
प्रश्न 3: शिव जी को भांग, नाग और बिच्छू का दीवाना क्यों कहा गया है?
उत्तर: शिव जी ‘पशुपति’ हैं, वे समाज और प्रकृति द्वारा ठुकराए गए विषैले जीवों (नाग, बिच्छू) को भी आश्रय देते हैं। भांग एक जंगली जड़ी-बूटी है जो समुद्र मंथन के विष की गर्मी को शांत करने के लिए उन्हें दी गई थी। यह शिव जी के परम वैरागी और समदर्शी स्वभाव को दर्शाता है।
प्रश्न 4: क्या इस गीत पर नृत्य (Dance) करना उचित है?
उत्तर: जी हाँ, बिल्कुल उचित है! हिंदू धर्म में भगवान शिव स्वयं ‘नटराज’ (नृत्य के देवता) हैं। भक्ति भाव में डूबकर डमरू की ताल पर झूमना या नाचना सगुण भक्ति का एक अत्यंत सुंदर और मान्य रूप है।