शंभू नाथ मेरे दीनानाथ
Shambhu Nath Mere Dinanath
भगवान शिव को समर्पित अत्यंत भावपूर्ण और संकटमोचक भजन “Shambhu Nath Mere Dinanath Mere Bhole Nath Lyrics” का संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth), उत्पत्ति (Origin), पूजा व गायन का सही समय (Practices Time) और आध्यात्मिक महत्व (Importance) विस्तार से जानें। महादेव की असीम कृपा प्राप्त करने और संकटों के निवारण के लिए इस विस्तृत लेख को पढ़ें।
शंभू नाथ मेरे दीनानाथ मेरे भोले नाथ
| शंभू नाथ मेरे दीनानाथ मेरे भोले नाथ लिरिक्स शंभू नाथ मेरे दीनानाथ मेरे भोले नाथ मेरे आ जाओ, भक्त तेरे पर विपदा भारी, आके कष्ट मिटा जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय… डम डम तेरा डमरू बाजे, जिसपे सारी सृष्टि नाचे, मनका पड़े जब जब डमरू पे ऐसी तान सुना जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय… एक हाथ त्रिशूल विराजे, गल सर्पों की माला साजे, जटा में तेरी मां गंग विराजे, अमृत पान करा जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय… तेरे अघोरी तुझको पूजे, संग तेरे शमशानों में झूमे, पूरे तन पर भस्म रमा के, मस्तक पर त्रिकुंड सजा के सुंदर रूप दिखा जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय… |
Shambhu Nath Mere Dinanath Mere Bhole Nath
Shambhu Nath Mere Dinanath Mere Bhole Nath
Shambhu Nath Mere Dinanath Mere Bhole Nath
shambhuu naath mere diinaanaath mere bhole naath mere aa jaao,
bhakt tere par vipadaa bhaarii, aake kashṭ miṭaa jaao,
om namah shivaay harii om namah shivaaya…
ḍam ḍam teraa ḍamaruu baaje, jisape saarii sṛshṭi naache,
manakaa pade jab jab ḍamaruu pe aisii taan sunaa jaao,
om namah shivaay harii om namah shivaaya…
ek haath trishuul viraaje, gal sarpon kii maalaa saaje,
jaṭaa men terii maan gang viraaje, amṛt paan karaa jaao,
om namah shivaay harii om namah shivaaya…
tere aghorii tujhako puuje, sang tere shamashaanon men jhuume,
puure tan par bhasm ramaa ke, mastak par trikunḍ sajaa ke
sundar ruup dikhaa jaao,
om namah shivaay harii om namah shivaaya…
शंभू नाथ मेरे दीनानाथ मेरे भोले नाथ (Shambhu Nath Mere Dinanath Mere Bhole Nath) – संपूर्ण विवरण और महिमा
सनातन हिंदू धर्म में भगवान शिव को देवों के देव ‘महादेव’ कहा जाता है। वे जितने भोले और सरल हैं, उतने ही कृपालु और संकटमोचक भी हैं। जब मनुष्य चारों ओर से विपत्तियों और दुखों से घिर जाता है और उसे कोई मार्ग नहीं सूझता, तब वह अपने ‘दीनानाथ’ (दीनों या असहायों के नाथ) भगवान शिव को पुकारता है। “Shambhu Nath Mere Dinanath Mere Bhole Nath” एक ऐसा ही अत्यंत मार्मिक, भक्तिपूर्ण और ऊर्जावान भजन है, जिसमें एक भक्त भारी विपत्ति के समय अपने आराध्य से रक्षा की गुहार लगा रहा है।
इस अत्यंत विस्तृत, दार्शनिक और ज्ञानवर्धक लेख में हम परम पावन और संकटमोचक शिव भजन Shambhu Nath Mere Dinanath Mere Bhole Nath का संपूर्ण पाठ, इसकी साहित्यिक व लोक-परंपरागत उत्पत्ति (Origin), गहरा दार्शनिक और आध्यात्मिक भावार्थ (Bhavarth), इसके गान और श्रवण करने की सही विधि व समय (Practices Time), इसका आध्यात्मिक, मनोवैज्ञानिक व लौकिक महत्व (Importance) और इससे जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) प्रस्तुत कर रहे हैं।
भजन के बोल (Shambhu Nath Mere Dinanath Mere Bhole Nath Lyrics)
आइए, सबसे पहले दुखहर्ता, श्मशान वासी और डमरूधारी भगवान शिव की स्तुति करने वाले इस अत्यंत भावपूर्ण और अलौकिक भजन के मूल बोल (Lyrics) का पूरे भक्ति, श्रद्धा और समर्पण भाव से पाठ करें:
शंभू नाथ मेरे दीनानाथ मेरे भोले नाथ मेरे आ जाओ, भक्त तेरे पर विपदा भारी, आके कष्ट मिटा जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय…
डम डम तेरा डमरू बाजे, जिसपे सारी सृष्टि नाचे, मनका पड़े जब जब डमरू पे ऐसी तान सुना जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय…
एक हाथ त्रिशूल विराजे, गल सर्पों की माला साजे, जटा में तेरी मां गंग विराजे, अमृत पान करा जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय…
तेरे अघोरी तुझको पूजे, संग तेरे शमशानों में झूमे, पूरे तन पर भस्म रमा के, मस्तक पर त्रिकुंड सजा के सुंदर रूप दिखा जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय…
भजन का विस्तृत विवरण (Description of Shambhu Nath Mere Dinanath)
Description of Shambhu Nath Mere Dinanath को समझना एक भक्त की उस मनोदशा को समझना है जब वह संसार से पूरी तरह निराश होकर केवल ईश्वर की शरण में जाता है। इस भजन की शुरुआत एक पुकार (Call for Help) से होती है। इसमें भक्त अपने इष्ट देव को तीन अलग-अलग नामों से पुकारता है—’शंभू नाथ’ (कल्याण करने वाले), ‘दीनानाथ’ (असहायों के स्वामी) और ‘भोले नाथ’ (अत्यंत सरलता से मान जाने वाले)।
इस भजन की सबसे बड़ी विशेषता इसका मंत्रमुग्ध कर देने वाला पंचमुखी मंत्र “ओम नमः शिवाय” है, जो हर अंतरे (Stanza) के बाद एक महामंत्र की तरह गूंजता है। यह भजन शिव के रौद्र और अघोर रूप (श्मशान में भस्म रमाए हुए) को बहुत ही सुंदरता और प्रेम से प्रस्तुत करता है। इसमें शिव के आभूषणों (त्रिशूल, सर्प, गंगा, डमरू और भस्म) का उल्लेख है। यह भजन स्पष्ट करता है कि ईश्वर का रूप चाहे जितना भी वैरागी या भयानक क्यों न प्रतीत हो, एक सच्चे भक्त के लिए वह संसार का सबसे ‘सुंदर रूप’ होता है।
उत्पत्ति और इतिहास (Origin of Shambhu Nath Mere Dinanath)
Origin of Shambhu Nath Mere Dinanath की पृष्ठभूमि आधुनिक भारतीय भक्ति संगीत और ‘जागरण’ परंपरा से गहराई से जुड़ी हुई है।
- लोक भक्ति संगीत (Folk Devotional Music): यह भजन पारंपरिक वैदिक स्तोत्र नहीं है, बल्कि उत्तर भारत की भजन-संध्या, शिव जागरण और कांवड़ यात्रा की जीवंत परंपराओं से उत्पन्न हुआ एक आधुनिक लोक-भजन है। इसकी भाषा अत्यंत सरल और खड़ी बोली हिंदी है, ताकि हर साधारण व्यक्ति इसे आसानी से गा सके।
- दार्शनिक आधार (Philosophical Roots): यद्यपि यह भजन आधुनिक है, लेकिन इसका दार्शनिक Origin शैव आगम और शिव पुराण में निहित है। भजन में अघोरी संप्रदाय, श्मशान साधना और शिव के वैरागी स्वरूप का जो वर्णन किया गया है, वह भारत के प्राचीन कापालिक और नाथ संप्रदाय की मान्यताओं से प्रेरित है।
- महामंत्र का समावेश: भजन का मूल आधार पंचाक्षरी मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’ है, जिसकी उत्पत्ति यजुर्वेद के रुद्राष्टाध्यायी से हुई है। यह मंत्र इस पूरे गीत को एक साधारण भजन से उठाकर एक शक्तिशाली ‘मन्त्र-साधना’ में बदल देता है।
संपूर्ण भावार्थ (Bhavarth of Shambhu Nath Mere Dinanath)
भगवान शिव की इस संकटमोचक स्तुति का असली लाभ तब मिलता है जब भक्त इसके अर्थ को गहराई से महसूस करता है। आइए, Bhavarth of Shambhu Nath Mere Dinanath का एक-एक पद, शब्द और उसके पीछे छिपे रहस्यों का अत्यंत विस्तृत और दार्शनिक विश्लेषण करें:
पद 1 का भावार्थ
शंभू नाथ मेरे दीनानाथ मेरे भोले नाथ मेरे आ जाओ, भक्त तेरे पर विपदा भारी, आके कष्ट मिटा जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय…
भावार्थ (Meaning): हे शंभू (आनंद और कल्याण के दाता)! हे दीनानाथ (मुझ जैसे गरीब और असहाय के स्वामी)! हे मेरे भोलेनाथ (जो बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं)! अब आप मेरी रक्षा के लिए आ जाइए। हे प्रभु, आपके इस दास (भक्त) पर बहुत बड़ी विपत्ति (संकट/मुसीबत) आन पड़ी है। अब मुझसे यह दुख और सहन नहीं होता, कृपया आइए और मेरे इन सारे कष्टों को हमेशा के लिए मिटा दीजिए। मैं आपके परम मंत्र ‘ओम नमः शिवाय’ (मैं शिव को नमन करता हूँ) का निरंतर जाप कर रहा हूँ।
पद 2 का भावार्थ
डम डम तेरा डमरू बाजे, जिसपे सारी सृष्टि नाचे, मनका पड़े जब जब डमरू पे ऐसी तान सुना जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय…
भावार्थ (Meaning): हे महादेव! आपके हाथों में जो डमरू है, जब वह ‘डम-डम’ बजता है, तो उसके संगीत (कंपन) पर यह पूरी सृष्टि (संपूर्ण ब्रह्मांड) नृत्य करने लगती है। डमरू की ध्वनि ही इस संसार की उत्पत्ति और संचालन का कारण है। डमरू के धागे में बंधा हुआ मनका (मोती/गांठ) जब-जब डमरू के चमड़े पर प्रहार करता है, तो हे प्रभु, मुझे भी उस डमरू की वह मधुर और जीवनदायिनी तान (धुन) सुना दीजिए, ताकि मेरा अशांत मन शांत हो सके।
पद 3 का भावार्थ
एक हाथ त्रिशूल विराजे, गल सर्पों की माला साजे, जटा में तेरी मां गंग विराजे, अमृत पान करा जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय…
भावार्थ (Meaning): इस पद में शिव के उस दिव्य स्वरूप का वर्णन है जो प्रकृति और शक्तियों को संतुलित करता है। हे प्रभु! आपके एक हाथ में महान ‘त्रिशूल’ विराजमान है (जो सत्व, रज, तम—तीनों गुणों और भूत, भविष्य, वर्तमान का प्रतीक है)। आपके गले (गल) में भयंकर विषैले सर्पों की माला बहुत ही सुंदर लग रही है (साजे)। आपने अपनी उलझी हुई जटाओं में परम पवित्र ‘माता गंगा’ को धारण किया हुआ है। हे शिव, मुझे भी अपनी भक्ति रूपी उस गंगा जल का ‘अमृत पान’ करा दीजिए (पिला दीजिए), ताकि मैं इस जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो जाऊं।
पद 4 का भावार्थ (अघोर और वैरागी स्वरूप)
तेरे अघोरी तुझको पूजे, संग तेरे शमशानों में झूमे, पूरे तन पर भस्म रमा के, मस्तक पर त्रिकुंड सजा के सुंदर रूप दिखा जाओ, ओम नमः शिवाय हरी ओम नमः शिवाय…
भावार्थ (Meaning): यह पद भगवान शिव के सबसे रहस्यमयी और वैरागी स्वरूप का वर्णन है। हे देव! आपके परम भक्त ‘अघोरी’ (जिन्होंने संसार की सारी मोह-माया छोड़ दी है) आपकी पूजा करते हैं और वे आपके साथ मृत्यु के स्थान (श्मशानों) में आनंद से झूमते हैं। (श्मशान वह स्थान है जहाँ जीवन का हर अहंकार राख हो जाता है)। आपने अपने पूरे शरीर (तन) पर चिता की राख (भस्म) लगाई हुई है (जो इस बात का प्रतीक है कि यह शरीर नश्वर है)। आपने अपने मस्तक (माथे) पर भस्म से तीन रेखाओं वाला ‘त्रिपुंड’ (त्रिकुंड) सजाया हुआ है। हे भोलेनाथ, दुनिया के लिए यह रूप चाहे जितना भी वैरागी हो, पर मेरे लिए आपका यही श्मशान वासी रूप सबसे सुंदर है। मुझे अपने इसी ‘सुंदर रूप’ के दर्शन दे जाओ।
भजन गायन और श्रवण का सही समय (Practices Time of Shambhu Nath Mere Dinanath)
यह भजन एक पुकार है, और ईश्वर को पुकारने का कोई निश्चित समय नहीं होता। जब भी हृदय में सच्ची व्याकुलता हो, तब भगवान शिव को पुकारा जा सकता है। फिर भी, आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत करने के लिए Practices Time of Shambhu Nath Mere Dinanath के कुछ विशेष नियम और समय इस प्रकार हैं:
1. संकट और विपत्ति का समय (Times of Distress)
- जैसा कि भजन में ही कहा गया है “भक्त तेरे पर विपदा भारी”, यह भजन उस समय गाना या सुनना सबसे उत्तम है जब आप बहुत अधिक मानसिक तनाव, अवसाद (Depression), आर्थिक हानि, या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हों। शिव जी की यह स्तुति मन को अभूतपूर्व साहस और शांति प्रदान करती है।
2. सर्वोत्तम दिन और समय (Best Practices Time & Days)
- प्रदोष काल (Pradosh Kaal): शिव पूजा के लिए सूर्यास्त का समय (गोधूलि बेला) सबसे पवित्र माना जाता है। शाम के समय घर के पूजा कक्ष में बैठकर आंखें बंद कर इस भजन को सुनने से मन एकाग्र होता है।
- सोमवार का दिन (Mondays): प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव के शिवलिंग पर जल अर्पित करने के पश्चात इस भजन का सस्वर गान करना बहुत शुभ फलदायी होता है।
- महाशिवरात्रि और सावन (Maha Shivaratri & Sawan): सावन के पवित्र महीने में कांवड़ यात्रा के दौरान, या महाशिवरात्रि की रात्रिकालीन पूजा (चारों प्रहर की पूजा) में जागरण करते समय इस भजन का गान शिव की विशेष कृपा दिलाता है।
3. पूजा की विधि (Rituals & Procedure)
- शुद्ध और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर या किसी शिव मंदिर में जाएं।
- शिवलिंग पर शुद्ध जल, बेलपत्र, भांग, धतूरा और सफेद पुष्प अर्पित करें।
- शुद्ध घी का दीपक जलाएं और चंदन या गुग्गुल की धूप करें।
- रुद्राक्ष की माला हाथ में लेकर पहले “ॐ नमः शिवाय” का 108 बार जाप करें और उसके बाद पूर्ण समर्पण के साथ Shambhu Nath Mere Dinanath का गायन करें।
धार्मिक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक महत्व (Importance of Shambhu Nath Mere Dinanath)
Importance of Shambhu Nath Mere Dinanath केवल इसके संगीतमय होने में नहीं है, बल्कि इसके नियमित श्रवण और गान से मनुष्य के जीवन में गहरे मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक बदलाव आते हैं:
1. भय और अवसाद से मुक्ति (Freedom from Fear and Depression)
विपत्ति के समय मनुष्य अक्सर घबरा जाता है। यह भजन भक्त को यह याद दिलाता है कि ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्ति (दीनानाथ) उसके साथ है। इसके श्रवण से ‘मृत्यु का भय’ (Fear of Death) और अज्ञात चिंताएं दूर होती हैं और मनुष्य के भीतर किसी भी संकट से लड़ने का आत्म-विश्वास पैदा होता है।
2. ॐ नमः शिवाय का उपचारात्मक प्रभाव (Healing Power of the Mantra)
बार-बार “ओम नमः शिवाय” के उच्चारण से शरीर और मस्तिष्क में विशिष्ट सकारात्मक तरंगें (Vibrations) उत्पन्न होती हैं। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि इस मंत्र के जाप से हृदय गति सामान्य होती है, तनाव (Stress) कम होता है और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) शांत होता है।
3. जीवन की नश्वरता का सत्य (Acceptance of Mortality)
भजन में “शमशान”, “भस्म”, और “अघोरी” जैसे शब्दों का प्रयोग बहुत ही प्रतीकात्मक है। यह मनुष्य के अहंकार (Ego) को तोड़ता है। यह सिखाता है कि जीवन का अंतिम सत्य श्मशान की राख ही है। जब व्यक्ति इस सत्य को स्वीकार कर लेता है, तो उसके भीतर से लोभ, ईर्ष्या और सांसारिक मोह-माया हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है और वह सच्चा वैरागी बन जाता है।
4. ईश्वर के असीमित प्रेम की अनुभूति (Experience of Unconditional Love)
भजन स्पष्ट करता है कि शिव जी वह देवता हैं जो राजा के महलों में नहीं, बल्कि श्मशान में निवास करते हैं और भस्म लगाते हैं। वे बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति से प्रसन्न होते हैं। यह विचार भक्त को ईश्वर के प्रति और अधिक करीब लाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs about Shambhu Nath Mere Dinanath)
भोलेनाथ के इस संकटमोचक भजन से जुड़े कई प्रश्न भक्तों के मन में उठते हैं। यहाँ Shambhu Nath Mere Dinanath Mere Bhole Nath से जुड़े कुछ सबसे महत्वपूर्ण प्रश्नों (FAQs) के विस्तृत उत्तर दिए गए हैं:
प्रश्न 1: भगवान शिव को ‘दीनानाथ’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर: ‘दीन’ का अर्थ होता है गरीब, असहाय, शोषित या दुखी व्यक्ति, और ‘नाथ’ का अर्थ है स्वामी या रक्षक। भगवान शिव बहुत ही दयालु हैं और वे समाज के सबसे पिछड़े, शोषित और असहाय लोगों (यहाँ तक कि भूत-प्रेतों और अघोरियों) को भी अपनी शरण में ले लेते हैं। इसीलिए उन्हें दीनानाथ कहा जाता है।
प्रश्न 2: भजन में ‘अघोरी’ और ‘शमशान’ का उल्लेख क्यों किया गया है?
उत्तर: अघोरी शिव के वे परम साधक हैं जो समाज के स्थापित नियमों और मोह-माया से पूरी तरह मुक्त हो चुके हैं। वे मानते हैं कि ईश्वर हर जगह है, यहाँ तक कि श्मशान जैसी जगह (जिसे अपवित्र माना जाता है) में भी। भगवान शिव मृत्यु और संहार के देवता भी हैं। श्मशान वैराग्य का सर्वोच्च स्थान है, जहाँ शिव अपने भक्तों के साथ आनंद में रहते हैं। यह दृश्य मोह-त्याग का प्रतीक है।
प्रश्न 3: शिव जी अपने शरीर पर भस्म (राख) क्यों लगाते हैं?
उत्तर: भस्म इस बात का प्रतीक है कि यह भौतिक शरीर नश्वर है और अंततः मिट्टी (राख) में मिल जाएगा। शिव जी भस्म रमाकर संसार को यह संदेश देते हैं कि शारीरिक सुंदरता और आकर्षण का अहंकार व्यर्थ है, केवल आत्मा और ईश्वर का सत्य ही शाश्वत है। भस्म पवित्रता और वैराग्य का परम चिन्ह है।
प्रश्न 4: “मस्तक पर त्रिकुंड सजा के” में त्रिकुंड (त्रिपुंड) क्या है?
उत्तर: त्रिपुंड (भजन में जिसे त्रिकुंड कहा गया है) भगवान शिव और उनके भक्तों द्वारा माथे पर भस्म या चंदन से लगाई जाने वाली तीन आड़ी (क्षैतिज) रेखाएं हैं। ये तीन रेखाएं त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश), तीन गुणों (सत्व, रज, तम) और मनुष्य के तीन जन्मों के पापों के नाश का प्रतीक मानी जाती हैं।
प्रश्न 5: क्या विपत्ति के समय केवल यह भजन गाने से कष्ट मिट जाते हैं?
उत्तर: यह भजन एक माध्यम है जिससे मनुष्य का ईश्वर के प्रति विश्वास दृढ़ होता है। जब मनुष्य पूर्ण श्रद्धा से “ॐ नमः शिवाय” का जाप करता है और शिव से पुकार लगाता है, तो उसके भीतर वह मानसिक शक्ति और साहस पैदा होता है जिससे वह अपनी विपत्ति का डटकर सामना कर सकता है और ईश्वरीय कृपा से मार्ग प्रशस्त होता है।
प्रश्न 6: “अमृत पान करा जाओ” से भक्त का क्या आशय है?
उत्तर: यहाँ ‘अमृत पान’ से तात्पर्य किसी वास्तविक पेय पदार्थ से नहीं, बल्कि शिव की ‘भक्ति और ज्ञान रूपी अमृत’ से है। भक्त प्रार्थना कर रहा है कि हे शिव, मुझे अपनी भक्ति का ऐसा रस पिला दीजिए जिसे पीकर मैं संसार के सारे दुखों से मुक्त होकर अमरता (मोक्ष) को प्राप्त कर लूँ।
निष्कर्ष (Conclusion)
Shambhu Nath Mere Dinanath Mere Bhole Nath मात्र एक संगीतमय भजन नहीं है, बल्कि यह विपत्ति में घिरे एक जीव का परब्रह्म परमात्मा से सीधा संवाद है। इसका भावपूर्ण वर्णन (Description), एक-एक शब्द का गहरा दार्शनिक भावार्थ (Bhavarth) और भस्म, श्मशान व अघोर स्वरूप का प्रतीकवाद इसे शिव भक्ति का एक अत्यंत शक्तिशाली मंत्र बनाता है।
जब भी आप स्वयं को विपत्तियों में घिरा हुआ पाएं, निराश हों या मन में भय व्याप्त हो, तो बिना किसी संकोच के उचित समय (Practices Time) पर आंखें बंद करके अपने भोलेनाथ को इस भजन के माध्यम से पुकारें। वह दीनानाथ, जिसके डमरू की ताल पर पूरी सृष्टि नाचती है, आपके जीवन की हर ‘विपदा’ को अपनी कृपा से मिटा देगा। इस भजन की आध्यात्मिक ऊर्जा (Importance) आपके जीवन को भयमुक्त, शांत और शिवमय बना देगी।
ओम नमः शिवाय!
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